बस्ती। बिल्कुल न्याय के मुहाने पर पहुंचकर निराश लौट आए तो समझिए राजस्व विवाद है। राजस्व विभाग से जुड़े न्यायालयों में फरियाद सुनाते-सुनाते थक जाएंगे, लेकिन न्याय की ख्वाहिश पूरी नहीं होगी। ऐसे एक नहीं अनेक मामले हैं। वादकारियों को साधारण नामांतरण, जमीन कब्जा, भूमि पैमाइश कराने में भी साल-दर-साल दौड़ना पड़ रहा है। तहसील और कलेक्ट्रेट के अधीन न्यायालयों में हाजिर होते-होते पैरों के चप्पल और जूते घिस जा रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि यहां तो सिर्फ और सिर्फ तारीख पड़ती है साहब, फैसला भविष्य के गर्भ में छोड़ दिया जाता है।
राजस्व न्यायालयों में जब वादकारी को यह लगे कि अब बिल्कुल न्याय मिल जाएगा तब पर भी कई साल गुजर जा रहे हैं। विवाद जस का तस बना हुआ है। सरकारी आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। जनपद में पांच वर्ष से अधिक का उम्र गुजार चुके राजस्व विवाद के 5867 मुकदमे लंबित हैं। ये सभी मुकदमे विभिन्न राजस्व न्यायालयों में विचाराधीन हैं। एक जनवरी 2018 के बाद से अभी तक की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो मुकदमों का यह आंकड़ा दस हजार के पार है। इतनी बड़ी तादाद में मुकदमों की फाइलों का बंडल विभिन्न न्यायालयों के तहखाने में धूल फांक रहा है।
-
सदर तहसील में शुक्रवार को नहीं सुनी गई फरियाद
दोपहर के एक बज रहे थे। सदर तहसील के लगभग सभी न्यायालयों में हाकिम की कुर्सी खाली रही। एसडीएम सदर अपने चैंबर में फरियादियों से घिरे हुए थे। न्यायालय में पीठासीन अधिकारी नहीं आए। दोपहर बाद यहां फरियादियों को तारीख दी गई। यहां तहसीलदार और नायब तहसीलदार के भी न्यायिक कक्ष में भी फरियादी, अधिवक्ता और कार्मिक ही नजर आए। तारीख देने का सिलसिला जारी रहा।
दोपहर 12 बजे के बाद शुरू हो जाता है तारीख देने का सिलसिलाराजस्व न्यायालयों में प्रत्येक कार्यदिवस के दौरान दस बजे से 12 बजे तक पहले हाकिम के बैठने का इंतजार होता है। जैसे ही 12 बजते हैं, पेशकार को हाकिम के न आने की सूचना मिल जाती है। इसके बाद पेशकार समेत दो से तीन की संख्या में कर्मचारी फाइलों पर तारीख लगाना शुरू करते हैं। यह सिलसिला 3 से 4 बजे तक चलता है। यह लगभग रोज की परंपरा बन गई है। पखवाड़े में एक दो बार शायद ही हाकिम न्याय की कुर्सी पर बैठ पाते हैं। नतीजा सुनवाई के अभाव में अधिकांश मामले लंबित चल रहे हैं।
सर्वाधिक लंबित मामले हर्रैया में
पांच वर्ष से अधिक हो चुके मुकदमों के मामले में हर्रैया तहसील सबसे आगे है। यहां नायब और तहसीलदार स्तर के न्यायालयों में लंबित चल रहे कुल 3438 मामले 1 जनवरी 2018 के पहले के हैं। इसके बाद सदर तहसील के विभिन्न न्यायालयों इसी तरह के 1032 पुराने मामले लंबित है। भानपुर में 662 और रुधौली में 515 पुराने मुदकमे लंबित हैं। जबकि जिलाधिकारी के न्यायालय में 61 और एडीएम वित्त एवं राजस्व के न्यायालय में 37 तथा मुख्य राजस्व अधिकारी के न्यायालय में लंबित 122 मुकदमें पांच वर्ष से अधिक के हो चुके हैं।
-
केस- एक
सदर तहसील के नरहरिया मौजे के रहने वाले रामानंद की 14 साल पहले मौत हो गई। उनकी संतान के रूप में राघव शरण जीवित हैं, लेकिन पिता की संपत्ति का वरासत उनके नाम नहीं हो सका। राघव शरण मजदूरी करके पत्नी, बच्चों समेत किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वह कहते हैं कि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि तहसील में हर पटल पर चढ़ावा चढ़ाए। उनकी गरीबी का लाभ उठाते हुए पट्टीदार उनके पिता की संपत्ति हड़पना चाह रहे हैं। वह वरासत के लिए ऑनलाइन आवेदन के अलावा नायब तहसीलदार साऊंघाट के न्यायालय में दफा 34 के तहत मुकदमा भी दाखिल किए हैं। फाइल में सभी साक्ष्य उपलब्ध हैं, हाकिम को सिर्फ परीक्षण करके आदेश देना है। मगर, यह कब होगा कुछ नहीं पता।
-
केस- दो
सदर तहसील के पिकौरा शिवगुलाम मौजे के रहने वाले सगे भाई राधेश्याम और दीनानाथ का वाद राजस्व न्यायालय अतिरिक्त अधिकारी प्रथम के यहां वर्ष 2012 से विचाराधीन है। राधेश्याम बताते हैं कि उनकी मालवीय रोड स्थित बेशकीमती नान जेडए जमीन में कूटरचना कर दूसरों के नाम दर्ज कर दी गई। जिसकी बाद में रजिस्ट्री भी हो गई। इस प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई मुकदमा करने के बाद भी नहीं हो रा रही है। राधेश्याम बताते हैं कि हर तारीख पर लगता है कि इस बार फैसला पक्ष में आएगा, लेकिन तारीख के सिवाय 12 साल से कुछ नहीं मिला।
-
राजस्व विभाग के अधीन संचालित न्यायालय
राजस्व विभाग के अधीन कई न्यायालय संचालित हैं। इनमें तहसील स्तर पर सर्किलवाइज नायब तहसीलदार, तहसीलदार, तहसीलदार न्यायिक, उपजिलाधिकारी न्यायालय, अतिरिक्त उपजिलाधिकारी न्यायालय, मुख्य राजस्व अधिकारी न्यायालय, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, अपर जिलाधिकारी न्यायिक एवं जिलाधिकारी न्यायालय शामिल हैं।
-
राजस्व से संबंधित सभी मुकदमों के त्वरित निस्तारण के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। शासन से भी सख्त हिदायत दी गई कि पांच साल से अधिक हो चुके मुकदमों का तत्काल निस्तारण कराया जाए। मुकदमों की नियमित समीक्षा होगी। जहां हीलाहवाली मिलेगी संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी। -प्रियंका निरंजन, डीएम।