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Basti News: चढ़ावा चढ़ाते ही बीडीए में फील गुड... प्रतिबंधित क्षेत्र में भी बिना नक्शे के हो रहे निर्माण

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बस्ती। बीडीए में चढ़ावा चढ़ाने की परंपरा बंद नहीं हो रही है। इस फार्मूले को अपनाए बगैर शहरी क्षेत्र में निर्माण करना संभव नहीं है। चढ़ावा चढ़ते ही बीडीए में फील गुड जैसा माहौल छा जाता है। फिर तो जिम्मेदार अधिकारी खुद नियमों का पालन कराना भूल जाते हैं। हद तो तब हो गई जब ग्रीन बेल्ट एवं अन्य प्रतिबंधित जोन में भी चढ़ावा चढ़ाने के चलन का नुस्खा अपनाने के बाद निर्माण की छूट मिल जा रही है। हाईवे के किनारे एवं शहरी क्षेत्र के प्रतिबंधित जोन में बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें बिना नक्शा पास कराए ही खड़ी हो रही हैं। इस तरह के कई उदाहरण हैं। इसमें कामर्शियल निर्माण भी शामिल हैं।
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खुद की कार्यशैली को लेकर विवादों से अक्सर घिरा रहने वाला बीडीए इन दिनों फिर चर्चा में है। बीडीए में अधिशासी अधिकारी का पद रिक्त चल रहा है। इसका प्रभार यहां तैनात सहायक अभियंता संदीप के पास है। इसके अलावा एक अन्य सहायक अभियंता अरुण कुमार शर्मा भी तैनात हैं। बीडीए के पास खुद का अवर अभियंता भी नहीं है। पीडब्ल्यूडी में तैनात अवर अभियंता केके चौधरी का शुक्रवार को रुपये लेते वीडियो वायरल हो गया। आरोप है कि वह घूस की रकम ले रहे थे।
बतौर बीडीए उपाध्यक्ष डीएम प्रियंका निरंजन ने फिलहाल तत्काल प्रभाव से संबंधित जेई का संबद्धीकरण बीडीए से खत्म कर दिया है। इसके अलावा बीडीए में संविदा पर तैनात चार मेट में से तीन ने नौकरी छोड़ दी है। बीडीए ने नगर पालिका क्षेत्र के 69 मुहल्लों को चार जोन में बांटा है। इसमें से दो जोन के प्रभारी की जिम्मेदारी कार्यालय के एक पत्रवाहक को सौंप दी गई है। वहीं शेष दो जोन की जिम्मेदारी एकल मेट के पास है। नक्शे पास कराने में भी यहां का गड़बड़झाला सामने आ चुका है। जिनके पास केवल निर्माण देखने का अधिकार है वह नक्शा विजिट और नक्शा पास करने का कार्य कर रहे हैं। जबकि इसके लिए डीएम से अनुमति लेनी जरूरी होती है।
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छोटे कर्मचारियों को किया जाता है आगे
निर्माण के दौरान फील गुड करने के लिए छोटे कर्मचारियों को आगे किया जाता है। मौके पर जोन प्रभारी के रूप में उन्हें भेजा जाता है। संबंधित कर्मचारी भूमि स्वामी से मिलकर नक्शा आदि के बारे में पूछताछ करता है। बाद में भूमि स्वामी को बीडीए कार्यालय में आकर अधिकारी से मिलने की सलाह देकर वह चले आते है। इसके बाद शुरू हो जाता है नियमों की आड़ में फील गुड का खेल। विभागीय सूत्रों की मानें तो निर्माणाधीन या निर्मित हो चुके भवन का नक्शा समन 2010 के तहत ऑफलाइन दाखिल होता है। व्यवसायिक निर्माण है तो सरकारी शुल्क के अलावा 50 हजार और आवासीय होने पर 10 हजार चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। होटल एवं अन्य बड़े भवन के लिए दो लाख रुपये तक चढ़ावा चढ़ाने की चर्चा आम है। फिलहाल अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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सहायक अभियंता का भी वीडियो हो रहा वायरल
बीडीए में तैनात सहायक अभियंता अरुण कुमार शर्मा का भी एक वीडियो क्लीप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें सहायक अभियंता कार्यालय में बैठे हैं। एक मेट उन पर एक पेटी घूस मांगने का आरोप लगाते हुए बोल रहा है कि स्वाभिमान बेचकर नौकरी नहीं करेंगे। दोनों के बीच झड़प होता यह वीडियो काफी चर्चा में है। अमर उजाला इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। मगर जब सहायक अभियंता से बात की गई ताे उन्होंने वीडियो क्लीप वायरल होने की बात स्वीकार की। कहा कि वीडियो में घूस मांगने का आरोप लगाने वाले मेट मोहित शुक्ल हैं। उन्होंने एक गरीब व्यक्ति से धमकाकर दस हजार रुपये वसूल लिए थे। इसका मैंने विरोध किया तो उन्होंने मेरे ही ऊपर आरोप लगा दिया। उनके आरोप में सत्यता नहीं है। हालांकि इसी झड़प के बाद तीन मेट ने नौकरी छोड़ दी थी।
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केस- एक
हाईवे के दोनों तरफ 87.5 मीटर की दूरी तक ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है। यहां निर्माण प्रतिबंधित है। बड़ेवन ओवरब्रिज के निकट हाईवे के किनारे इस दायरे में निर्माण कराया जा रहा था। पहले बीडीए ने इस पर रोक लगा दी। कुछ दिनों के बाद भूमि स्वामी से सांठगांठ हुई तो निर्माण की छूट दे दी गई। ग्रीन बेल्ट में ही इस कामर्शियल भवन का निर्माण पूरा हो गया।

केस- दो
कटरा के आगे बांसी रोड पर स्थित एसबीआई शाखा के निकट निर्माण के दौरान एक कामर्शियल भवन का कार्य रोकवा दिया गया। भवन स्वामी ने इसका नक्शा नहीं पास कराया था। कुछ दिनों के बाद बीडीए को न जाने कौन सी बूटी मिली कि निर्माण को छूट दे दी। बिना नक्शे के ही बेसमेंट के साथ यह बिल्डिंग भी बनकर तैयार हो गई। बीडीए के अफसर चुप्पी साधे रहे।
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केस- तीन
मनौरी से चैनपुरवा मार्ग पर एक बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण किए जा रहे एक बिल्डिंग को बीडीए अधिकारियों ने रोक दिया। सब कुछ मौखिक ही चला। भवन स्वामी को नोटिस तक नहीं जारी की गई। बाद में जब भूमि स्वामी ने परंपरा के अनुकूल व्यवहार पेश किया तो उन्हें भी निर्माण की मौन सहमति दे दी गई। मकान बनकर तैयार हो गया।
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केस- चार
बड़ेवन-बांसी मार्ग पर बरगदवा में पिछले दिनों एक नेताजी के भाई का कामर्शियल निर्माण चल रहा था। बीडीए ने जांच की तो पता चला कि नक्शा ही नहीं पास कराया गया है। पहले निर्माण रोका गया। कुछ दिनों बाद मौखिक अनुमति दे दी गई। फिर क्या बिना नक्शे के ही यहां भी कामर्शियल बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई।

मेरे जानकारी में जैसे अवैध निर्माण का मामला आता है। तत्काल कार्रवाई की जाती है। मेरे संज्ञान जितने भी अवैध निर्माण है सभी को नोटिस जारी की गई है। जहां एई और जेई के वायरल वीडियो का मसला है तो इससे मेरा कोई इत्तेफाक नहीं है।
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-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए।
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