बस्ती। ट्रांसफाॅर्मर फुंकने की सबसे बड़ी वजह ओवरलोडिंग को बताया जा रहा है। खराब होने के बाद मरम्मत के लिए कार्यशाला लाए जाने वाले 70 प्रतिशत ट्रांसफाॅर्मर की जांच (डीटीसी) में इसकी पुष्टि हो रही है। सर्वाधिक 25 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर ओवरलोड होकर जल रहे हैं। जुलाई में 488 ट्रांसफाॅर्मर फुंक चुके हैं।
गर्मी व उमस बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी बढ़ गई थी, जिससे बिजली उपकेंद्रों से लेकर लाइन, ट्रांसफाॅर्मर तक पर भार बढ़ गया। परिणाम स्वरूप ट्रांसफाॅर्मर खराबी की संख्या में इजाफा हो रहा है। अभियंताओं का कहना है कि गर्मी में बड़ी आबादी तेजी से कूलर व एसी पर शिफ्ट हो रही है, जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है। ऐसे में ट्रांसफाॅर्मर की क्षमता जहां कम है, वहां फुंकने की समस्या अधिक आ रही है।
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वोल्टेज का उतार-चढ़ाव बन रहा बड़ी वजह
ओवरलोडिंग के अलावा भी तमाम ऐसे कारण हैं, जिसकी वजह से ट्रांसफाॅर्मर फुंक रहे हैं। अधिशासी अभियंता ट्रांसफाॅर्मर कार्यशाला अंब्रीश श्रीवास्तव बताते हैं कि किसी एक फेज पर अधिक वोल्टेज का आ जाना, तीन फेज के ट्रांसफाॅर्मर को महज दो फेज की लाइन पर चलाना, आकाशीय बिजली गिरना, पेड़ व डाल बिजली की लाइन पर गिरने और उपभोक्ता के केबल शाॅर्ट होने के कारण से भी ट्रांसफाॅर्मर खराब हो जाते हैं।
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शहर में सबसे कम और हैर्रैया में सर्वाधिक
जुलाई में 400 केवीए के चार ट्रांसफॉर्मर खराब हुए। विद्युत वितरण खंड प्रथम में दो, खंड द्वितीय व हर्रैया में एक-एक ट्रांसफाॅर्मर खराब हुए। सबसे ज्यादा 179 ट्रांसफाॅर्मर हर्रैया में खराब हुए हैं, जबकि सबसे कम वितरण खंड प्रथम में सात ट्रांसफाॅर्मर खराब हुए हैं। जिले में सबसे ज्यादा 25 केवीए के 271 ट्रांसफाॅर्मर खराब हुए हैं।
वर्जन-
खराब हुए ट्रांसफाॅर्मर को कार्यशाला लाकर खराबी के कारणों का पता किया जाता है। इसे तकनीकी भाषा में डैमेज ट्रांसफाॅर्मर सार्टिफिकेट (डीटीसी) कहते हैं। इसमें ट्रांसफाॅर्मर जलने का प्रमुख कारण ओवरलोडिंग होना मिल रहा है।
-अंब्रीश श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, कार्यशाला।