बस्ती। अपराध के रास्ते पर चलने वाले खाकी से बचने के लिए खादी का साथ चाहते हैं। इस सोच को निकाय चुनाव में बदमाशों ने एक बार फिर से साबित किया है। इस बार के चुनाव में छह बदमाशों को बड़े दलों का साथ मिला है। इसके अलावा नेतागीरी का शौक रखने वाले जिन बदमाशों की किसी दल से टिकट पाने की जुगाड़, सिफारिश काम नहीं आई, वे नौ निर्दलीय मैदान में हैं। हालांकि, मुकदमों की बात आते ही सभी फंसाए जाने या फिर रंजिश के मुकदमे बताकर खुद को बेदाग बताने में जरा भी देर नहीं करते हैं।
चुनाव कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, निकाय चुनाव में 12 ऐसे प्रत्याशी हैं, जिनके ऊपर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। 15 में से सर्वाधिक नौ बदमाश निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। वहीं, सपा से 2, बसपा से 1 तथा भाजपा से 3 बदमाश टिकट हासिल करने में सफल रहे हैं। इसके अलावा कई ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिनके परिवार में कोई न कोई बदमाश है।
उधर, गंभीर या छोटे अपराध में शामिल और टिकट हासिल करने वालों पर पुलिस भी नजर बनाए हुए है। पुलिस इनकी गतिविधियों की निगरानी करने के साथ ही पाबंद करने, शांतिभंग में चालान करने सहित ही हवालात में रात गुजरवाने जैसी सजा देकर सख्ती का संदेश दे रही है।
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जनता आपराधिक छवि वालों का करे बहिष्कार
यह हमारे क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि साफ और स्वच्छ छवि के लोगों के रहते हुए भी अपराधियों की भागीदारी चुनाव में हुई है। कहीं न कहीं इसमें जनता का भी दोष है, अगर जनता अपराधियों का चुनाव में बहिष्कार कर देती तो शायद साफ और स्वच्छ छवि के लोगों को चुनाव लड़ने का मौका मिलता। -डॉ. अजीत प्रताप सिंह, अध्यक्ष रोटरी क्लब बस्ती मिडटाउन
नैतिकता दिखाएं राजनीतिक दल
अपराधी प्रवृत्ति के लोगों की चुनाव में भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी त्रासदी है। इस मामले में पहले तो राजनीतिक दलों को ही नैतिकता का परिचय देते हुए आपराधिक छवि वाले को टिकट नहीं देना चाहिए। फिर भी ऐसा हो तो जनता को इस तरह के प्रत्याशियों को नकार देना चाहिए। लोकतंत्र को मजबूत करना हम सभी की जिम्मेदारी है। -दिनेश गुप्ता कटरा
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सोच समझ कर करें मतदान
अगर चुनाव मैदान में कोई अपराधी उम्मीदवार है तो फिर जनता की भी जिम्मेदारी है कि वह सोच-समझकर मतदान करे। सिर्फ पार्टी या किसी के कहने पर वोट नहीं देना चाहिए। अगर जनता सख्त संदेश देगी तो नैतिकता, शुचिता का दावा करने वाले राजनीतिक दलों को भी सद्बुद्धि मिलेगी और सही लोगों को टिकट मिलेगा। -सुुमन श्रीवास्तव, रौता वार्ड
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अपराध और राजनीति के गठजोड़ गलत
अपराध और राजनीति के गठजोड़ के बुरे परिणाम आए दिन नजर आते हैं। अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को शुरू से ही राजनीति से दूर रखना चाहिए। आम लोगों को इनके कारनामे पता नहीं होते। ऐसे में कई बार लोग पार्टी के नाम पर अनजाने में गलत उम्मीदवार का चुनाव कर लेते हैं, जिसके दुष्परिणाम आगे चलकर नजर आते हैं। -आरती यादव, बेलवाड़ाडी
जिला अध्यक्ष बोले
पार्टी ने कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है। इसके लिए संचालन समितियां बनी थीं। किसी अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति या उसके परिवार को टिकट देने की जानकारी मुझे नहीं है। अगर किसी पर मुकदमा दर्ज है तो इसकी जांच कराई जाएगी। - महेश शुक्ल, जिलाध्यक्ष भाजपा
पार्टी ने सक्रिय और साफ छवि वाले लोगों को ही टिकट दिया है। यदि किसी पर मुकदमा दर्ज है तो वह भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं या फिर उनकी शह पर द्वेषवश कराया गया होगा। निष्पक्षता से जांच हो जाए तो सब साफ हो जाएगा। - महेंद्र नाथ यादव, जिलाध्यक्ष, सपा।
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पार्टी ने स्वच्छ छवि के लोगों को ही उम्मीदवार बनाया है। संघर्ष करने वालों पर विरोधी सरकारों ने राजनीतिक मुकदमे दर्ज कराए हैं। किसी भी उम्मीदवार पर दर्ज मुकदमे में कोर्ट से सजा नहीं हुई है, जिससे वह अपराधी माना जाए। -जयहिंद गौतम, जिलाध्यक्ष, बसपा।
पार्टी ने संघर्ष करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को ही उम्मीदवार बनाया है। संघर्ष के दौरान राजनैतिक मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, इससे वह अपराधी नहीं कहे जा सकते। कांग्रेस के किए गए कामों को लेकर हम लोग जनता के बीच जा रहे हैं। -ज्ञानेंद्र पांडेय, जिलाध्यक्ष कांग्रेस।