आंचल हत्याकांड : खुलासा न कर पाने की दशा में न्यायालय को भेज दी अंतिम रिपोर्ट
40 महीने पहले दिसंबर 2020 में हुई थी छह वर्ष की आंचल की हत्या
परशुरामपुर के रोहदा से 14 दिसंबर को लापता हुई, 20 को मिला था शव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परशुरामपुर थाना क्षेत्र के रोहदा गांव के 75 वर्ष के राम अदालत मासूम पोती आंचल को इंसाफ दिलाने के लिए 40 महीने से थाने का चक्कर काट रहे हैं। कई एसओ आए और चले गए। दर्जनों बार थाने से लेकर जिले के अधिकारियों के पास फरियाद लेकर गए। मगर, अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते रहे। कातिलों का पता लगाने में पुलिस नाकाम रही। पोस्टमार्टम में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि हुई थी। किसने और क्यों ऐसा किया यह अब तक रहस्य बना हुआ है।
तंत्रमंत्र की दृष्टि से भी पुलिस छानबीन कर चुकी है। पुलिस न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट भेजकर एक तरह से हाथ खड़े कर चुकी है। मगर, परिवार के लोगों को अब भी उम्मीद है कि मासूम के कातिलों को सजा जरूर मिलेगी। 14 दिसंबर 2020 को दोपहर बाद रोहदा गांव के रामयश की छह वर्ष की बेटी आंचल गांव की एक ऐसी दुकान से अचानक लापता हुई थी, जहां देर रात तक लोग मौजूद रहते थे।
घर में उसके मुंडन की तैयारी चल रही थी। परिवार के लोग कार्ड बांट रहे थे। देर रात उसका पता नहीं चला तो पिता ने पुलिस को सूचना दी। परशुरामपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने तीन टीम बनाकर गांव और आसपास तलाश कराई। गोंडा और अयोध्या के संभावित स्थानों पर तीन दिन तक खोजबीन की गई। इसी बीच 20 दिसंबर 2020 को गन्ने की कटाई करने गए ग्रामीणों ने बालिका का शव देखा। परिवार के लोग पहुंचे और उसकी पहचान की।
केस के अंतिम विवेचक रहे रामेश्वर यादव का कहना है इस केस में जितनी आशंका थी, उस हिसाब से हर संभव कोशिश की गई। मगर, कोई सुराग हाथ नहीं लगा। चूंकि केस को काफी लंबा समय हो गया था, इसलिए कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट भेज दी गई है। यदि कोई साक्ष्य मिल जाएगा तो केस को फिर से खोला जा सकता है।
शुरू में पुलिस का शक बालिका के साथ किसी और अनहोनी की तरफ गया। लगा कि उसके साथ दरिंदगी के बाद हत्या की गई होगी। मगर, पोस्टमार्टम में पाया गया कि उसके शरीर में एक खरोंच भी नहीं लगी थी। उसके कपड़े बिल्कुल ठीक हालत में पाए गए थे। यहां तक कि उसके बाल भी करीने से थे। देखने से ऐसा लग रहा था मानो कुछ ही देर पहले किसी ने कंघी किया हो। सिर्फ बांह में एक जगह सूई चुभोने जैसा महीन निशान मिला था। इसके बारे में पुलिस ने काफी पता किया लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
...
फेल रहा जांच का तानाबाना
तमाम अनसुलझे मामलों को सुलझाने का दंभ भरने वाली पुलिस का सारा तानाबाना इस केस में फेल साबित हुआ। नाई का काम करने वाले पिता रामयश की इकलौती बेटी आंचल का कत्ल इतनी सफाई से की गई थी कि पुलिस के कई सूरमा गुत्थी सुलझाने में नाकाम रहे। मौजूदा समय में इस हत्याकांड की तफ्तीश करने वाले तत्कालीन एसएचओ रामेश्वर यादव भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। घर पर आंचल के बूढ़े बाबा भर मौजूद हैं। वह पुलिस के पास जब भी जाते हैं तो जांच, तफ्तीश और पता लगाने का आश्वासन देकर भेज दिया जाता है। रोजी-रोटी के लिए मुंबई में रहने वाले आंचल के पिता का कहना है कि कई एसओ आए और चले गए, मगर बेटी के हत्यारों तक कोई पहुंच नहीं पाया।
...
तंत्र-मंत्र की दिशा में भी हो चुकी है छानबीन
बेहद उलझे इस केस में पुलिस ने तंत्र-मंत्र के कोण से भी छानबीन करने की कोशिश की। चूंकि जिस दिन उसकी हत्या की गई, उसी दिन आंचल का जन्मदिन था। संदेह था कि कहीं किसी ने टोटका या तंत्र-मंत्र के लिए उसे मौत के घाट न उतार दिया हो। उस पूरे इलाके के सभी झाड़-फूंक करने वालों से पूछताछ की जा चुकी है। मगर, कुछ हासिल नहीं हुआ।