बस्ती। साइबर ठगों के मकड़जाल को तोड़ने के लिए पुलिस पूरे साल प्रयास करती रही। पर, सफलता नहीं मिल सकी। ठग लगातार नए-नए पैंतरे अपनाकर लोगों के खाते खाली करते रहे। पुलिस ने कुछ मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार किया। कुछ पीड़ितों के रुपये भी वापस कराए। पर, पूरी तरह से अंकुश नहीं लगा सकी। 12 महीने में पुलिस ने 143 साइबर ठगी से जुड़े केस दर्ज किए। वही, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए वॉयस स्कैम और हनी ट्रैप के केस भी इस साल काफी चर्चा में रहे।
एक जनवरी से लेकर 25 दिसंबर के बीच में साइबर ठगों ने कभी चर्चित वेबसाइट के जरिए ठगी की। तो कभी बैंक कर्मी बनकर डेबिट व क्रेडिट कार्ड का लालच देकर रकम उड़ाई। ऑन लाइन जॉब, बिजली का बिल, लोन, मनी ट्रांस्फर, ई-केवाईसी, कस्टमर केयर के जरिए सैकड़ों लोगों की जमापूंजी उड़ाने में सफल रहे। पुलिस की कार्रवाई का खौफ इन साइबर ठगों को नहीं है। हाल यह है कि कई लोगों ने ठगों को पुलिस से पकड़वाने की धमकी भी दी। तो उल्टे जवाब मिला कि तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दूसरे प्रदेशों में बैठकर ऑन लाइन ठगी करने वाले गिरोह को गिरफ्तार कर पाना कठिन है। लगातार पता और सिम बदलते रहने की वजह से सर्विलांस के जरिए भी उनकी लोकेशन नहीं मिल पाती है। लोकेशन मिल भी जाए तो वे ऐसे बीहड़ में रहते हैं, जहां दबिश देना आसान नहीं है।
आईजी आरके भारद्वाज ने बताया कि साइबर थाना और जिले के साइबर सेल में ऐसे अपराधों की तफ्तीश के लिए टीमें तत्पर हैं। साइबर अपराधियों के प्रत्येक चुनौती का पुलिस के पास माकूल जवाब है। हालांकि लोगों की अज्ञानता, जल्दबाजी और कई बार लालच में पड़ने की वजह से अपराधी सफल हो जाते हैं।
मेवात और जामताड़ा के ठगों ने खूब छकाया
पुलिस की जांच में सामने आया कि राजस्थान के मेवात और झारखंड के जामताड़ा के साइबर अपराधियों ने सबसे ज्यादा वारदात किया। इन अपराधियों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए कई तरह की तकनीकी भी इस्तेमाल किया है। स्पैम कॉल, कॉल स्पूफिंग जैसे तरीके भी अपनाकर अपराध किए। इसे ट्रैस कर पाना आसान नहीं
इस तरह हो रही साइबर ठगी
- क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की जानकारी जुटाकर।
- फर्जी शॉपिंग साइट और ई-कॉमर्स पोर्टल बनाकर।
- कोविड केयर या समाज सेवा के नाम पर।
- नौकरी का विज्ञापन निकालकर।
- पीएम केयर फंड और प्रधानमंत्री बीमा योजना के नाम पर।
- ई-कॉमर्स वेबसाइट पर सामान बेचने और खरीदने के नाम पर।
- ऑनलाइन ब्लैक मेलिंग के मामले।
- फेसबुक और मैट्रिमोनियल वेबसाइट से दोस्ती करके।
- इंश्योरेंस पॉलिसी मेच्योर होने या पॉलिसी पर कैश बैक के नाम पर।
बचाव के लिए बरतें सावधानी
- क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड और ओटीपी किसी को न बताएं।
- कोई सिम, एटीएम या क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने की बात कर आपसे कोई एप या क्यूआर कोड स्कैन करने का कहे तो मना कर दें।
- ऑन लाइन शॉपिंग करते समय सामान की कीमत को जरूर देखें, कहीं ऐसा तो नहीं किसी ने सामान पर ज्यादा छूट दी हुई हो। ऐसी साइट से सामान खरीदते समय सावधानी बरतें।
- ऑनलाइन सामान खरीदते समय साइट पर शक हो तो कैश आन डिलीवरी के ऑप्शन पर जाकर ठगी से बच सकते हैं।
- कोई कोविड के नाम पर आपस से मदद मांगे तो बिना पड़ताल के किसी को भी रुपये न दें।
- सरकार की लाभकारी योजनाओं के लिए रुपया खर्च करने से पूर्व इन साइट्स की अच्छी तरह पड़ताल कर लेना चाहिए।