चुनावी मोड में आई पुलिस,हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन शुरू
- आईजी ने तीनों जिले के एसपी को दिए दिशा निर्देश
- रडार पर पिछले चुनाव में गड़बड़ी पैदा करने वाले तत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले तैयारियों में जुटी पुलिस कार्रवाई के मोड में आ चुकी है। हिस्ट्रीशीटरों पर शिकंजा कसने के साथ ही पिछले चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी पैदा करने वालों को चिन्हित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आईजी आरके भारद्वाज ने तीनों जिले से ऐसे तत्वों की सूची तलब की है। बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर जिले के हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन कराया जा रहा है।
विधानसभा, पंचायत और निकाय चुनावों में बूथों पर मारपीट करने वाले, मतदाताओं को धमकी देने, शराब या अन्य प्रलोभन देने के अलावा फर्जी मतदान कराने के कई मामले दर्ज हुए थे। पुलिस ने छानबीन में पाया था कि कुछ ऐसे तत्व गांव-मोहल्लों में मौजूद हैं जो राजनैतिक दल या प्रत्याशी के उकसाने और लाभान्वित कर देने के बाद माहौल को खराब करते हैं। ऐसे लोगों को पहले से चिन्हित करने को कहा गया है। इसके अलावा आपराधिक छवि के लोगों पर पाबंद करने की कार्रवाई भी तेज करने को कहा गया है। आईजी ने बताया कि रेंज स्तर पर चुनाव सेल में आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा होने से पहले पुलिस और प्रशासनिक अमला होमवर्क करने में जुटा है। तीन दिन पहले आए एडीजी जोन गोरखपुर डा. केएस प्रताप ने भी निरुद्ध करने की कार्रवाई पर जोर दिया था। इसके साथ ही संवेदनशील व अतिसंवेदनशील मतदान केंद्राें की संवेदनशीलता कम करने के प्रयास करने को कहा था। आईजी ने बताया कि चुनाव के संबंध में की जा रही तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है।
-
16 हजार लोग हुए थे पाबंद
- विधानसभा चुनाव और 2019 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में करीब 16 हजार लोगों को पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत पाबंद किया था। इनमें ज्यादातर के विरुद्ध जाब्ता फौजदारी, शांतिभंग की आशंका, निषेधाज्ञा के तहत पाबंद करने के अलावा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों, हिस्ट्रीशीटरों पर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके पीछे पुलिस का मकसद था कि मतदान व चुनाव प्रचार के दौरान कोई हिंसक वारदात न होने पाए। साथ ही मतदाताओं पर कोई जोर-जबरदस्ती न कर सके।
अपराधियों की बनाई जाएगी कुंडली
- आईजी का कहना है कि अब चुनाव घोषित होने में ज्यादा देर नहीं है। इसलिए पुलिस को अपना होमवर्क शुरू कर देना चाहिए। इसकी पहली कड़ी में असामाजिक तत्वों की पहचान और उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। पिछले तीन वर्षों में गंभीर घटनाओं में लिप्त रहे अपराधियों की अलग से कुंडली निकाली जाएगी। वांछित/फरार आरोपितों को शीघ्र गिरफ्तार करने का अभियान चलाया जाएगा।