- कमाई कम होने पर डग्गामार कहकर प्राइवेट बसों पर ठीकरा फोड़ देते अधिकारी
- गंतव्य तक पहुंचने में समय व किराया अधिक लगने के कारण मुंह मोड़ रहे यात्री
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परिवहन निगम का लोड फैक्टर खराब हो रहा। बसें उतनी कमाई नहीं कर पा रही हैं, जितना निगम की ओर से निर्धारित है। इसका ठीकरा निगम अधिकारी डग्गामार बताकर प्राइवेट बसों पर फोड़ रहे हैं। जबकि रोडवेज की बसों का संचालन समयबद्ध तरीकों से न होने, किराया मंहगा होने और हाईवे पर जगह-जगह ढाबों पर बसों को रोककर जलपान करने के कारण यात्रियों का मोहभंग हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ और गोरखपुर रुट पर रोडवेज की सर्वाधिक बसें संचालित की जा रही है। इन बसों
से निगम को मनचाही आय प्राप्त नहीं हो रही है। विभागीय सूत्र इसकी कई वजह बताते हैं। गोरखपुर रुट पर चलने वाली एक बस के कंडक्टर का कहना है कि संतकबीर नगर जिले के पुल के नीचे से गोरखपुर की सवारियां मिलती हैं। यहां से गोरखपुर तक प्राइवेट वाहन 40 रुपये में लेते हैं जबकि रोडवेज की बसों में 51 रुपये लगते हैं। कमोबेश, यही हाल लखनऊ रुट पर भी है। शहर के बड़ेवन से प्राइवेट वाहन लखनऊ तक का 250-300 रुपये तक लेते हैं जबकि रोडवेज की बसों में 354 रुपये किराया लगता है। शहर के कंपनी बाग निवासी अमित मिश्र बताते हैं कि वह हफ्ते में दो बार लखनऊ जाते हैं। शहर से 205 किमी लखनऊ की दूरी है रोडवेज की बसों से यह दूरी तय करने में पांच घंटे लग जाते हैं जबकि निजी वाहनों से यह दूरी साढ़े तीन घंटे में ही पूरी हो जाती है। यही हाल गोरखपुर का है, निगम की बसें पौने दो घंटे में पहुंचाती हैं जबकि प्राइवेट बस यह दूरी सवा घंटे में तय कर लेती हैं।
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यात्रियों को अखरता है ढाबों पर जगह-जगह रुकना
- रोडवेज के अधिकारी खामियां छुपाने के लिए डग्गामार बसों पर भले ही ठीकरा फोड़ लें लेकिन हाईवे के ढाबों पर जगह-जगह खड़ी बसें हकीकत बयां कर ही देती हैं। मंगलवार को हमने हाईवे पर पड़ताल किया तो हर्रैया क्षेत्र के संसारीपुर, हर्रैया कस्बा, विक्रमजोत में रोडवेज की बसें खड़ी मिलीं। जगह-जगह ढाबों पर रुककर जलपान की परंपरा रोडवेज की आमदनी पर असर डाल रही है। इससे यात्रियों को समय बर्बाद होता है। परिणाम स्वरूप वह निगम की बसों के बजाय प्राइवेट वाहनों का सहारा ले रहे हैं।