सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में आयोजित चित्रकला कार्यशाला में रंगोली बनाते कलाकार
बस्ती। चित्रकला देश की संस्कृति का परिचायक है। यह युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ उनका सर्वांगीण विकास करती है। ऐसे में सभी को इससे जुड़कर अपनी संस्कृति को करीब से जानना चाहिए।
यह कहना है ग्रीष्मकालीन चित्रकला 2023 की संयोजक डॉ. रमा शर्मा का। वह राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश (संस्कृति विभाग ) की ओर से आयोजित ग्रीष्मकालीन चित्रकला के दूसरे दिन मंगलवार को प्रशिक्षुओं को संबोधित कर रही थीं। चित्रकला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उसके मूलाधारों की विस्तृत जानकारी दी।
राज्य ललित कला अकादमी के सदस्य डॉ. नवीन श्रीवास्तव ने बच्चों को सहज रूप में चित्र बनाने के बारे में समझाया। प्रशिक्षक के रूप में श्री अरविंद कुमार पांडेय ने प्रशिक्षुओं को चित्रकला में छाया एवं प्रकाश के महत्व को समझाया। इससे संबंधित कलात्मक प्रयोग भी किया। इस मौके पर ईशा, आँचल,यशी, कृति, पलक, गौरी, प्रतिभा, श्रेयंशी आदि प्रशिक्षुओं ने अति उत्साह के साथ चित्र सृजन की बारीकियां सीखीं।