बस्ती। इस बार धान खरीद के लिए सरकार ने धान की क्रय नीति में बदलाव कर ढुलाई करने वाले ट्रकों में जीपीएस लगाने का निर्णय लिया है। सेवा प्रदाता कंपनी के इंजीनियर मंडल के तीनों जिलों में ट्रकों पर जीपीएस लगाने का कार्य कर रहे हैं।
पूर्व में केंद्रों पर धान खरीदने के बाद परिवहन कार्य में लगे साधारण ट्रकों से मिलों तक धान पहुंचाया जाता था। इसमें कई तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते थे। इसमें केंद्र प्रभारियों का कहना रहता था कि केंद्र पर तौले गए धान व मिलों पर पहुंचने वाले खेप के तौल में अंतर आ जाता है। इससे मिलर्स व केंद्र प्रभारी के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती थी। यही नहीं कई बार भारी गोलमाल की शिकायत भी मिलती थी। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कई ट्रक समय से मिलों तक न पहुंच कर केंद्र प्रभारियों व मिलर्स को चकमा देते रहते थे। इससे केंद्र से भेजे जाने वाले धान के दिन व समय की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी।
शासन ने गेहूं व धान के खरीद समेत खाद्यान्न पहुंचाने की अधिकांश प्रक्रिया को जीपीएस से ऑनलाइन कर दिया है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए भी शासन ने केंद्रों से मिलों तक परिवहन करने वाले वाहनों का टेंडर फाइनल कर दिया है और धान की ढुलाई व मिलों से मिलने वाले चावल की आपूर्ति करने वाले वाहनों को भी जीपीएस से जोड़ने का निर्देश दिया है। यह व्यवस्था अभी प्रदेश के बस्ती, संतकबीरनगर व सिद्धार्थनगर समेत 40 जिलों में बतौर ट्रायल लागू की गई है। जल्द ही अन्य जनपदों में भी चालू करने की योजना बनाई गई है।
704 ट्रकों पर लगाया जा रहा जीपीएस
आरएफसी दुर्गेश प्रसाद ने बताया कि संभाग में कुल 352 धान खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। जहां 704 ट्रक धान की ढुलाई में लगाए गए हैं। सेवा प्रदाता कंपनी के अधिकारी जनपदवार संबंधित डिप्टी आरएमओ की निगरानी में ट्रकों पर जीपीएस लगा रहे हैं।
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