अति संवेदनशील तटबंध कटरिया चांदपुर और गौरा सैफाबाद पर कई जगह पानी का रिसाव शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे चांदपुर कटरिया तटबंध पर सांड़पुुर भरवटिया गांव के सामने पानी का रिसाव शुरू हो गया। कुछ ही देर में तटबंध का करीब चार मीटर हिस्सा बैठ गया।
तटबंध का बेस बैठते देखकर सांड़पुर, हेंगापुर के ग्रामीण और बाढ़ खंड कर्मियों ने मिट्टी भरी बोरियां लगाकर रिसाव को रोका। इसके बावजूद, तटबंध का करीब चार मीटर हिस्सा बीच से बैठ गया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तटबंध ठीक किया जा सका। इसी तरह बंजरिया सूबी, भनखरपुर, पाहीमाफी आदि जगहों पर तटबंध में पानी का रिसाव शुरू हो गया। बाढ़ खंड रिसाव रोकने के लिए सक्रिय रहा।
भूखे-प्यासे बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने में अक्षम दिन रहा प्रशासन
विक्रमजोत। जिले की सीमा घघौवा से लेकर विक्रमजोत तक करीब सात किलोमीटर बाढ़ का पानी हाईवे से सटा हुआ है। जलमग्न गांवों के लोग गृहस्थी का सामान और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। दो दिनों से भूखे-प्यासे बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने में प्रशासन अक्षम दिख रहा है। तटबंध विहीन गांव कल्यानपुर और भरथापुर की स्थित अत्यंत दयनीय है।
करीब 200 घरों के इन गांवों के लोग विक्रमजोत और बाघानाला में दूसरे के घरों में शरण लिए हुए हैं। बृहस्पतिवार को कवलपुर फूलडीह, बाघानाला, गौरियानयन, खतमसराय और विक्रमजोत कस्बे में पानी घुस गया। हाईवे के सर्विस रोड पर करीब एक फुट पानी भर गया है। बड़ी मात्रा में बाढ़ राहत सामग्री कस्बे के वाल्मीकि इंटर कॉलेज परिसर में रखी गई है।
बाढ़ से क्षेत्र के माझा किता अव्वल, मड़ना माझा, दलपतपुर, जरही, कुड़निया, सहजौरा पूरे दु:खी, अराजी भगला, चंदहा, पाही माफी, सरवरपुर, काशीपुर, अइलिया जुग्गाराम, चकिया, सलेमपुर, अराजीडूही, पिपरी संग्राम, बड़ागांव, अर्जुनपुर, नरसिंहपुर, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दुबे, शंभूपुर, बेतावा माझा, पकड़ी संग्राम, खेमराजपुर, कन्हईपुर, संदलपुर, चानपुर, पड़ाव, कल्यानपुर, भरथापुर आदि गांव जलमग्न हैं। कल्यानपुर व भरथापुर में परिषदीय विद्यालयों व हाटपैड पर भी पानी भर गया है। घघौवा पुल के रास्ते नदी का पानी हाईवे पार कर रिधौरा, माचा, मल्हनी, मुनियांवा, सिकंदरपुर, हैदराबाद के सिवान में पहुंचने लगा है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंची स्वास्थ्य टीम
बाढ़ प्रभावित गांवों में दो दिनों से स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर जीवनरक्षक दवाएं और ब्लीचिंग पाउडर वितरण में जुटी है। नोडल अधिकारी (बाढ़) डॉ. दीपक ने बताया कि छह टीमों को गठित कर अलग अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है। पानी से जलमग्न गांवों में स्पेशल मोबाइल हेल्थ टीम लगाई गई है, जो दिनभर नाव के सहारे लोगों की मदद कर रही है। सीएचसी प्रभारी डॉ. आसिफ फारुकी ने बताया कि बाढ़ चौकी क्षेत्र विक्रमजोत का निरीक्षण किया गया है। वहां आवश्यक चिकित्सा औषधि व अन्य सामग्री भरपूर मात्रा में उपलब्ध कराई गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने पूरी तैयारी है।
स्थिर हुआ जलस्तर, एक-दो दिन में राहत की उम्मीद
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार, जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.73 मीटर से 1.25 मीटर ऊपर यानी 93.98 मीटर दर्ज किया गया, जो हाई फ्लड लेबल से महज दो सेमी नीचे है। यहीं पर आकर जलस्तर स्थित हो गया हैै। अपस्ट्रीम में नदी के जलस्तर में कमी बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जलस्तर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। एक-दो दिन में कुछ राहत की उम्मीद की जा रही है।
सरयू का जलस्तर हाईफ्लड स्तर के करीब पहुंचते ही बिजली आपूर्ति ठप कर दी गई है। कल्यानपुर, भरथापुर के हेमंत पांडेय, कमलाकांत, नन्हे सिंह आदि ने बताया कि गांव जलमग्न है। बिजली आपूर्ति भी रोक दी गई है। इससे अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। मोबाइल फोन की बैटरी खत्म होने के बाद लोगों से संपर्क टूट गया है। अवर अभियंता विक्रांत सिंहने बताया कि बाढ़ खतरनाक हो चुकी है। सुरक्षा की दृष्टि से आपूर्ति रोक दी गई है। जैसे की पानी उतरेगा, आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
तटबंध पर लगे फाटक से आधा दर्जन गांवों को खतरा
क्षेत्र के कई गांवों में घघरा तटबंध पर लगे फाटक के रिसाव के कारण बाढ़ का पानी भर रहा है। इससे पिपरपाती, पंडोहिया, भरवलिया, तिलकारपुर एवं मटियरियां गांव के बाहर पानी बढ़ता जा रहा है। इससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। यदि समय रहते फाटक को दुरुस्त नहीं किया गया तो बगैर बाढ़ के ही तटवर्ती क्षेत्रों में तबाही मच सकती है। किसान फतेहबहादुर पाल ने बताया कि तीन दिन से तेजी से पानी का रिसाव हो रहा है। इससे बंद कर करने की मांग अधिकारियों से की गई है। अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।