- लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन और लुंबिनी-दुद्धी हाईवे से शहर के लिए सीधा रास्ता नहीं
- इमरजेंसी में शहर में दाखिल होने के लिए 500 मीटर गलत लेन में चलना मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। चाहे आप फोरलेन पर लखनऊ की तरफ से आ रहे हों या लुंबिनी दुद्धी हाईवे पर कलवारी की तरफ से, बिना जोखिम से गुजरे शहर में प्रवेश का कोई रास्ता नहीं है। अगर शहर में सुरक्षित पहुंचना है तो छह किलोमीटर का चक्कर लगाकर बड़ेवन फ्लाईओवर के नीचे से आना होगा। इमरजेंसी में अगर कम दूरी और कम समय में पहुंचना है तो पांच सौ मीटर तक गलत लेन में चलने का जोखिम उठाने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है।
पैकोलिया, दुबौला की तरफ से आने वाले हजारों लोगों के लिए डमरूआ अंडरपास के नीचे से गुजरना मजबूरी है, जहां बारिश में पानी भरा रहता है। जाम तो वहां आम है। कुछ समय पहले तक मूड़घाट चौराहे के कट से लोग कटरा चुंगी होकर पहुंच जाते थे लेकिन हादसे बढ़ने का हवाला देकर एनएचएआई ने कट बंद कर दिया। इस समस्या से करीब 15 सालों से हजारों लोग रोजाना दो-चार हो रहे हैं। मगर कोई उपाय अब तक नहीं किए गए। जानकार बताते हैं कि हाईवे निर्माण के दौरान शहर में प्रवेश की व्यवस्था पर गौर नहीं किया गया। शहर की कुछ प्रमुख सड़कों का जुड़ाव फोरलेन से सीधा जुड़ाव नहीं हो सका। न अंडरपास बनाए गए और न ही कट।
30 मीटर रास्ता बंद होने से लगाते हैं दो किमी का चक्कर
जिले के पश्चिमी हिस्से में स्थित परशुरामपुर, पैकोलिया, गौर, बभनान के लोग गनेशपुर के रास्ते मुख्यालय पहुंचते हैं। मूड़घाट चौराहे पर आकर यह रास्ता बंद हो गया है। यहां से हाईवे गुजरने के कारण दोनों तरफ बैरिकेडिंग हैं। ऐसे में कटरा पहुंचाने वाला गनेशपुर मार्ग का कनेक्शन मूड़घाट में समाप्त हो गया है। महज 30 मीटर रास्ता बंद होने से इस मार्ग के राहगीरोें को सर्विस रोड पर दो किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। कचहरी पहुंचने वाले लोग लगभग एक किमी तक उलटा चलकर शहर की ओर आ रहे हैं।
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अमहट मार्ग पर तीन किमी खतरनाक सफर की मजबूरी
यहीं हाल शहर के अमहट प्रवेश मार्ग का भी है। इसका भी कनेक्शन हाईवे से नहीं है। यह रास्ता तो एक तरह से वन-वे की शक्ल में है। जिले के कलवारी, हर्रैया, कप्तानगंज, दुबौलिया, विक्रमजोत क्षेत्र के नागरिकोें को शहर पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर दूर स्थित फुटहिया और संसारपुर से ही सचेत होकर चलना पड़ता है। हाईवे से आने वाले लोग संसारपुर के पास सर्विस रोड का सहारा लेकर फुटहिया अंडरपास पहुंचते हैं। फिर उलटी दिशा में एक किमी तक चलकर किसी तरह अमहट पहुंच रहे हैं।
मूड़घाट पर अंडरपास पास की योजना दबाव में हुई खारिज
हाईवे निर्माण के दौरान मूड़घाट चौराहे पर ओवरब्रिज के साथ अंडरपास बनाने की योजना थी। बताते हैं कि राजनीतिक दबाव के चलते यहां से अंडरपास हटाना पड़ा। शुरूआत में गनेशपुर- कटरा मार्ग को हाईवे से बहाल रखा गया। ट्रैफिक लोड बढ़ने पर हाईवे पर जाम लगने लगा। स्थानीय यात्रियों के हाईवे पार करने के दौरान हादसे भी होने लगी। आखिरकार एनएचएआई ने यहां दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर गनेशपुर- कटरा मार्ग पर आवागमन बंद करा दिया। अब लोगों को शहर पहुंचने के लिए सर्विस रोड से एक किमी घूमकर बड़ेवन जाना पड़ता है या फिर विपरीत दिशा में चलकर कटरा पहुंचना पड़ रहा है।
अमहट पर भी नहीं हुआ हाईवेे से शहर का कनेक्शन
शहर का कनेक्शन अमहट के पास भी हाईवे से नहीं हो सका। इस रास्ते हर्रैया तहसील क्षेत्र एवं कलवारी, बहादुरपुर, कुदरहा और दुबौलिया क्षेत्र के लोगों का आना जाना है। लखनऊ से बस्ती आने वाले भी इस रास्ते शहर में प्रवेश करते हैं। अमहट से हाईवेे के लिए वन-वे सड़क है। जबकि यहां आवागमन दोनों तरफ से हैं। अमहट से डेढ़ किमी दूर फुटहिया चौराहे पर लुंबिनी- दुद्धी मार्ग के लिए अंडरपास है। इसी के सहारे राहगीर विपरीत दिशा से अमहट पहुंच रहे हैं। हालांकि इस सफर में हादसे का खतरा बना रहता है।
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कई बार हुए हैं आंदोलन, नतीजा शून्य
शहर के अमहट और मूड़घाट प्रवेश मार्ग को हाईवे से अलग कर सुरक्षित करने के लिए कई बार आंदोलन हुए हैं। नागरिकों के काफी संघर्ष के बाद अमहट से फुटहिया तक हाईवे के किनारे केवल सर्विस लेन बन पाई है। इस पर लुंबिनी- दुद्धी मार्ग का भी आवागमन जोड़ दिया गया है। इस वजह से एक किलोमीटर लंबी यह सड़क काफी संवेदनशील हो गई है।
हाईवे पर मूड़घाट और अमहट के पास यदि आवागमन में कठिनाई है तो सर्वे कराया जाएगा। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर अनाधिकृत कट बंद किया जाता है। फोरलेन की डिजाइन भी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर ही बनाई जाती है।
- ई. ललित प्रसाद, परियोजना निदेशक, एनएचएआई