आंचल हत्याकांड
34 महीने से थाने के चक्कर काट-काटकर थक गए मासूम के बाबा अदालत, पुलिस ने लगाई अंतिम रिपोर्ट
पोती की हत्या के इंसाफ के लिए बाबा खा रहे ठोकर
अपहरण के पांच दिन बाद हुआ था आंचल का कत्ल
पोस्टमार्टम में मुंह और नाक दबाने से मौत की हुई थी पुष्टि
गन्ने के खेत में मिला था छह वर्ष की आंचल का शव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परशुरामपुर थाना क्षेत्र के रोहदा गांव के 75 वर्ष के राम अदालत मासूम पोती आंचल को इंसाफ दिलाने के लिए दो वर्ष 10 महीने से थाने का चक्कर काट रहे हैं। 19 दिसंबर 2020 को आंचल की हत्या हो गई थी। 20 दिसंबर को उसका जन्मदिन था। उसी दिन गांव के बाहर गन्ने के खेत में उसका शव मिला था। दो साल से अधिक की तफ्तीश के बाद भी पुलिस इस केस की असल वजह जान पाई और न ही हत्या के आरोपियों का पता लग पाई। अब इस केस में पुलिस ने कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट लगा दी है।
विवेचक रामेश्वर यादव का कहना है इस केस में जितनी आशंका थी, उस हिसाब से हर संभव कोशिश की गई। मगर, कोई सुराग हाथ नहीं लगा। चूंकि केस को काफी लंबा समय हो गया था, इसलिए कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट भेज दी गई है। यदि कोई साक्ष्य मिल जाएगा तो केस को फिर से खोला जा सकता है। जबकि आंचल के बाबा अदालत का कहना है कि वह थाने का चक्कर लगाकर हार चुके हैं। कई एसओ आए और चले गए। दर्जनों बार थाने से जिले के अधिकारियों के पास फरियाद लेकर गया। मगर, अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं। अब तक कातिलों का पता लगाने में पुलिस नाकाम है।
34 महीने पहले परशुरामपुर थाने के रोहदा गांव की छह वर्षीय मासूम आंचल की हत्या का केस अनसुलझा रह गया। पुलिस का सारा तानाबाना इस केस में फेल साबित हो चुका है। नाई का काम करने वाले पिता रामयशकी इकलौती बेटी आंचल का कत्ल इतनी सफाई से की गई थी कि पुलिस के कई सूरमा गुत्थी सुलझाने में नाकाम रहे। मौजूदा समय में इस हत्याकांड की तफ्तीश कर रहे एसएचओ रामेश्वर यादव भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। आंचल के बूढ़े बाबा भर मौजूद हैं। वह पुलिस के पास जब भी जाते हैं तो जांच, तफ्तीश और पता लगाने का आश्वासन देकर भेज दिया जाता है। रोजी-रोटी के लिए मुंबई में रहने वाले आंचल के पिता का कहना है कि कई एसओ आए और चले गए, मगर बेटी के हत्यारों तक कोई नहीं पहुंच पाए।
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पोस्टमार्टम में दम घुटने से मौत की हुई थी पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, 14 दिसंबर 2020 को रोहदा गांव से लापता हुई आंचल की मौत दम घुटने से हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, कत्ल शव मिलने (20 दिसंबर 2020 ) के 24 घंटे पहले अर्थात 19 दिसंबर को मौत हुई थी। उसी दिन उसका मुंडन भी होना था। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 14 दिसंबर को लापता होने के बाद 19 दिसंबर तक आंचल कहां थी। ऐसा किसने और क्यों किया? फिलहाल, पुलिस ने पिता की तहरीर पर अज्ञात पर हत्या का केस दर्ज किया था।
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यह थी घटना
14 दिसंबर को दोपहर बाद रोहदा गांव के रामयश की बेटी आंचल गांव की एक ऐसी दुकान से अचानक लापता हुई थी, जहां देर रात तक लोग मौजूद रहते थे। घर में उसके मुंडन की तैयारी चल रही थी। परिवार के लोग कार्ड बांट रहे थे। देर रात उसका पता नहीं चला तो पिता ने पुलिस को सूचना दी। परशुरामपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस ने तीन टीम बनाकर गांव और आसपास तलाश कराई। गोंडा और अयोध्या के संभावित स्थानों पर तीन दिन तक खोजबीन की गई। इसी बीच 20 दिसंबर 2020 को गन्ने की कटाई करने गए ग्रामीणों ने बालिका का शव देखा। परिवार के लोग पहुंचे और उसकी पहचान की।
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अज्ञात पर हत्या का दर्ज हुआ था केस
तत्कालीन एसपी हेमराज मीणा ने बताया था कि शव मिलने के 24 घंटे पहले यानी 19 दिसंबर 2020 को ही आंचल की हत्या कर दी गई थी। शरीर पर किसी तरह के चोट और खरोच नहीं मिले थे। बाल भी नहीं बिखरे थे। करीने से कंघी किए हुए बालों में क्लिप भी लगी हुई थी। पोस्टमार्टम के बाद प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि आंचल की मौत दम घुटने से हुई है। उसके पिता मुंबई में रहते हैं जो घर पर ही थे।
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तंत्र-मंत्र की दिशा में भी हो चुकी है छानबीन
घास में घोड़ा ढूंढने वाली कहावत इस केस में पुलिस के लिए चरितार्थ होती है। बेहद उलझे इस केस में पुलिस ने तंत्र-मंत्र के कोण से भी छानबीन करने की कोशिश की। चूंकि जिस दिन उसकी हत्या की गई, उसी दिन आंचल का जन्मदिन था। संदेह था कि कहीं किसी ने टोटका या तंत्र-मंत्र के लिए उसे मौत के घाट न उतार दिया हो। उस पूरे इलाके के सभी झाड़-फूंक करने वालों से पूछताछ की जा चुकी है। मगर कुछ हासिल नहीं हुआ।
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