लिखा, डुबोने से नहीं बल्कि डूबने से हुई थी संदीप विश्वकर्मा की मौत
- मृतक के चाचा की तहरीर पर कप्तानगंज थाने में दर्ज हुआ था हत्या का केस
-13 जून को कप्तानगंज के कच्चीपुर के संदीप का रवई नदी में मिला था शव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती/महराजगंज। कप्तानगंज के कच्चीपुर निवासी संदीप विश्वकर्मा केस की पुलिस ने तफ्तीश पुलिस ने पूरी कर ली है। जिसमें पाया गया कि उसे किसी ने डुबोया नहीं था। बल्कि उसकी मौत नहाते समय पानी में डूब जाने की वजह से हुई थी। मृतक के परिवार के लोग इसे हत्या बताते हुए उसके तीन दोस्तों पर हत्या व शव छिपाने का केस दर्ज कराए थे। आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजने की मांग लेकर वे मुख्यमंत्री तक से मिल चुके हैं। मगर साक्ष्य और अन्य पहलुओं की विवेचना में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। विवेचक नारायण लाल श्रीवास्तव के मुताबिक हत्या कर शव छिपाने का कोई साक्ष्य पुलिस को नहीं मिला। ऐसे में केस में फाइनल रिपोर्ट भेज दी गई है।
13 जून को कप्तानगंज थाना क्षेत्र के कच्चीपुर (भूपालपुर) गांव के संदीप कुमार विश्वकर्मा (22) का रवई नदी में शव मिला था। उनके चाचा बाबूराम का कहना है कि वह गन्ने की सिंचाई कर रहा था। 11 बजे घर से खाना खाकर खेत में जाने के लिए निकला था। काफी देर तक घर न लौटने पर चाचा ने फोन किया तो संदीप ने बताया कि करचोलिया के पास सांड़ भगाने आया है। दोपहर दो बजे सूचना मिली कि संदीप का शव बघौड़ा गांव के निकट रवई नदी में (ढोढ़रहवा घाट) पर पड़ा है। चरवाहों ने शव निकालकर फोटो वायरल किया। परिवार के लोग और पुलिस पहुंची तो उसकी बाइक घटना स्थल से कुछ दूरी पर खड़ी मिली और बाइक की चाबी और मोबाइल फोन गायब था।
पोस्टमार्टम में हुई थी डूबने की पुष्टि
- पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया तो उसके आहार नली, पेट और लेंस आदि में पानी व बालू भरा मिला। इस आधार पर पुलिस ने दावा किया कि नहाते समय डूबने से उसकी मौत हुई। मगर, घटना के तीसरे दिन संदीप के परिजनों ने उसके तीन दोस्तों पर संदीप को बुलाकर ले जाने और हत्या करने का आरोप लगाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि के चलते यह गुत्थी उलझ गई थी।
परिवार वालों के शक का आधार
- केस के वादी और मृतक के चाचा बाबूराम फाइनल रिपोर्ट लगने की जानकारी होते ही निराश हो गए। उनका कहना है कि पुलिस ने तमाम पहलुओं को नजरअंदाज करके पूर्वानुमान के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगा दिया। उनकी दलील है कि जिन दोस्तों के साथ वह देखा गया था, वे सभी संदीप को बहाने से लेकर नदी के किनारे लेकर गए थे। उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई होती तो सच्चाई सामने आ गई होती। संदीप की मोबाइल और चाभी लेकर वही लोग भाग गए थे। अगर उनके मन में काला न होता तो मोबाइल तोड़कर नष्ट करने के बजाए हम लोगों को या पुलिस को दिए होते। बाइक की चाभी अब तक नहीं मिली।
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तीन सवालों का नहीं मिला जवाब
एक- चारों के एक साथ नदी में नहाने के लिए जाने पर यदि संदीप की डूबकर मौत हो गई, तो बाकी तीनों दोस्तों ने इसकी किसी को सूचना देने के बजाए भाग क्यों गए।
दो- संदीप की मोबाइल और बाइक की चाभी उन दोस्तों के पास थी तो मोबाइल को परिवार वालों को देने के बजाए तोड़कर फेंक क्यों दिए।
तीन- जिस जगह डूबकर मरने की बात बताई जा रही वहां डूबने भर का पानी ही नहीं था तो कैसे डूबा संदीप।