- 156 दवाओं के नमूने भेजे गए, 131 का आया रिजल्ट
- हिमांचल की बनी गैस की दो दवाएं मिली अधोमानक
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दवाओं के कारोबार में भी खेल है। गैर प्रांतों से अधोमानक दवाओं की खेप बल्क में यहां खपाई जा रही है। इनके नाम चिकित्सकों के पर्चे पर कलमबद्ध हो रहे हैं। इस पर नियंत्रण की व्यवस्था इतनी कमजोर है कि जब तक जांच होगी तब तक मिलावटी दवाओं की खेप बाजार में बिक चुकी होंगी। अभी जिन 131 दवाओं के नमूने की जांच रिपोर्ट में जिन दो दवाओं को अधोमानक पाया गया है उसमें भी यही कहानी है। नमूने फेल होने के बाद कंपनी को नोटिस और केस दर्ज करने की कार्रवाई में अभी माह भर का समय लगेगा। तब तक इस लॉट की दवाएं बाजार में बिक चुकी होंगी।
दवा बाजार की निगरानी के लिए ड्रग इंस्पेक्टर हर माह कम से कम 15 सैंपल जांच के लिए भेजते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले भर से 156 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए। 31 मार्च तक इनमें से 131 दवाओं की रिपोर्ट मिली है। इनमें से दो दवाओं के नमूने अधोमानक पाए गए हैं। मतलब यह कि इनमें साल्ट की मात्रा निर्धारित मानक से कम है। अधोमानक पाई गईं दवाओं को एसिडिटी के इलाज में प्रयोग की जाती हैं।
विभागीय नियमानुसार, अधोमानक पाई गई इन दवाइयों को बाजार से हटाने के लिए पहले रिपोर्ट प्रदेश के औषधि नियंत्रक कार्यालय को भेजी जाएगी। वहां से इसकी रिपोर्ट दवा निर्माता कंपनी जिस राज्य में होगा, वहां भेजी जाएगी। इसके बाद कंपनी को पत्र जाएगा। कंपनी रिपोर्ट पर चुनौती भी दे सकती है। इस प्रक्रिया के साथ-साथ दवा विक्रेता से दवा खरीद से संबंधित बिल बाउचर लिया जाएगा। फिर उसके स्टाकिस्ट के स्टॉक का मिलान होगा। इन सब प्रक्रिया के बाद दवा को बाजार से वापस मंगाने के लिए निर्देश जारी होगा।
जानकारों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम चार माह लग जाते हैं। अगर कहीं कंपनी ने आपत्ति कर दी तो उसके नमूनों की जांच दूसरे लैब से कराई जाएगी। इसके बाद जो रिपोर्ट आएगी उसके अनुसार कार्रवाई होगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी होगी तब तक जिस बैच नंबर का नमूना लिया गया था उससे संबंधित दवाएं बाजार में खप चुकी होंगी। थोड़ी मात्रा में अगर कहीं दवा बची रही होगी तो वही वापस होगी। अभी 25 दवाओं के नमूने ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
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हिमाचल प्रदेश की कंपनी है राज्य सरकार को लिखेंगे
ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि नमूनों की जांच में जिन दो एसिडिटी दवाओं को अधोमानक पाया गया है वह हिमाचल प्रदेश की कंपनी से निर्मित है। विभाग सीधे संबंधित कंपनी पर कार्रवाई नहीं कर सकता है। हम संबंधित राज्य को कार्रवाई के लिए पत्राचार करेंगे। वहां से संबंधित कंपनी को नोटिस मिलेगा। उन्होंने बताया कि अगर किसी दवा में साल्ट की मात्रा उसके रैपर पर प्रदर्शित मात्रा के सापेक्ष 90 प्रतिशत तक मिलता है तो ऐसे मामलों में केवल निर्माता कंपनी को नोटिस जारी किया जा सकता है। 89 से 85 ग्राम के बीच होने पर चेतावनी जारी होगी। यदि इससे कम है तो इसे अधोमानक माना जाएगा। अगर साल्ट 50 प्रतिशत से भी कम है तो उसे नकली मानकर कार्रवाई होगी। फिलहाल यहां अभी दो दवाओं का नमूना फेल पाया गया है।
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एक वाकया- मरीज के पर्चे पर चिकित्सक ने लिख दी 14 हजार की दवा
शहर के रंजीत चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में महिला मरीज पहुंची। वहां कर्मचारियों ने परामर्श शुल्क जमा कराने के बाद उसे महिला चिकित्सक के पास पहुंचाया। महिला चिकित्सक ने उसके पर्चे पर 20 दिन के लिए 14 हजार रुपये की दवा लिखी। शुक्र मनाइए कि मरीज के परिजन पर्चा लेकर बाहर के मेडिकल स्टोर पर पहुंच गए। दवा दुकानदार पर्चा देखते ही बता दिया कि इसमें अधिकतर दवाएं कमीशन की है। एंटीबायोटिक, मल्टी बिटामिन टैबलेट और पाउडर दोनों टाइम खाने को लिखा है। बिल 14 हजार बताने पर मरीज के तीमारदार का माथा ठनक गया। वह पर्चा और मरीज लेकर लौट गए।
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आसपास की ही दुकानों पर मिलती है दवाएं
ब्रांडेड दवाओं की तर्ज पर बनाई जा रही मेडिसिन अच्छे खासे कमीशन पर चिकित्सक लिख रहे हैं। सेंटिंग के अनुसार अलग-अलग कंपनियों की दवा अलग- अलग नर्सिंग होम एवं आसपास एजेंटों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। इसीलिए अधिकतर चिकित्सकों के पर्चे की दवा आम तौर पर सभी दवा दुकानों पर नहीं मिलती है। वहीं प्रतिष्ठित चिकित्सकों की ब्रांडेड दवाएं बड़ी दवा दुकानों पर आसानी से मिल जाती है।