बस्ती। शहर के लिए नए 132 केवी बिजली घर के निर्माण का रास्ता साफ होता दिख रहा है। जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों और प्रशासन की वार्ता अंतिम दौर में है। बिजली घर बनने से जिले में नए उद्योगों को संजीवनी मिलने के साथ ही विकास की गाड़ी सरपट दौड़ेगी। मेडिकल कॉलेज, कुदरहा और देईसांड को स्वतंत्र फीडर मिल जाएगा। उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और कटौती की झंझट से छुटकारा मिलेगा।
फिलहाल, गिदही स्थित 220 केवी बिजली घर से जिले के 12 वितरण उपकेंद्रों को आपूर्ति दी जा रही है। 220 केवी बिजली घर में अब ''वे'' (नई 33 केवी लाइन के लिए जगह) नहीं है। यही कारण है कि मेडिकल कॉलेज के लिए स्वतंत्र फीडर का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए ट्रांसमिशन प्रबंधन ने शहर के आसपास 132 केवी बिजली घर के निर्माण की स्वीकृति ले ली है। 2020 में लॉकडाउन से पहले फरवरी में नया बिजली घर बनाने की शासन ने मंजूरी दे दी थी। तभी से जिला प्रशासन जमीन की तलाश में जुट गया था। अब जमीन की बाधा दूर होने वाली है।
गिदही में स्थित 220 केवी बिजली घर से शहर से छह उपकेंद्रों पॉलीटेक्निक, पुरानी बस्ती, गिदही, रौता, अमहट व बड़ेवन के अलावा नगर बाजार, बाघनगर, महसों, मुंडेरवा, सल्टौआ और भानपुर उपकेंद्रों को भी बिजली दी जा रही है।
इस बिजली घर में नई 33 केवी लाइन को आपूर्ति देने के लिए ''वे'' नहीं है। इसका खामियाजा अभी मेडिकल कॉलेज को भुगतना पड़ रहा है। इसे ओपेक कैली चिकित्सालय के फीडर से जोड़कर चलाया जा रहा है। यही हाल महसों उपकेंद्र की 33 केवी लाइन का है। इस लाइन से ही कुदरहा और देईसांड़ उपकेद्रों को बिजली दी जा रही है। गर्मी में जब खपत बढ़ती है तो यह लाइन ओवर लोड हो जाती है और उपभोक्ताओं को कटौती का सामना करना पड़ता है।
रिंग रोड निर्माण को मिल चुकी है मंजूरी
शहर का क्षेत्रफल और आबादी तेजी से बढ़ रही है। रिंग रोड निर्माण के लिए भी केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। माना जा रहा है कि रिंग रोड बनने के बाद जिले में उद्योगों का तेजी से विकास होगा। ऐसे में बिजली आपूर्ति संसाधनों को विकसित किया जाना आवश्यक माना जा रहा है। इसी आवश्यकता को समझते हुए ट्रांसमिशन प्रबंधन शहर के आसपास नया बिजली घर बनाने जा रहा है। इसके अलावा जिले में 17 नए विद्युत उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव रीवैंप योजना में भेजा गया है। जिस पर अगले महीने स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इन उपकेंद्रों को नए बिजली घर से बिजली मिल सकेगी।
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मुआवजे को लेकर नहीं बन पा रही सहमति
- सदर एसडीएम शैलेश दुबे ने बताया कि 132 केवी बिजली घर बनाने के लिए महसों के 33/11 केवी उपकेंद्र के बगल में एक हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। यह जमीन 24 काश्तकारों की है। जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है। किसानों के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं। मुआवजे पर जल्द सहमति बनने की उम्मीद है। उसके बाद बिजली घर का निर्माण शुरू किया जा सकेगा
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लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगा छुटकारा
- जमीन अधिग्रहण के बाद बिजली घर निर्माण पर आने वाले खर्च का आंकलन तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। नए बिजली घर से शहर की करीब सवा लाख आबादी को फायदा होगा। उन्हें लो वोल्टेज की समस्या से छुटकारा मिलेगा। नए उद्योगों को उनकी जरूरत के मुताबिक स्वतंत्र फीडर और बिजली मिल सकेगी।
घनश्याम मिश्र, अधीक्षण अभियंता, ट्रांसमिशन
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शहर का अपना बिजली घर होना खुशी की बात
- गर्मी में लो वोल्टेज की समस्या रहती है। जब शहर का अपना बिजली घर हो जाएगा तो इससे से राहत मिले सकेगी। -विवेक प्रजापति, रोडवेज मोहल्ला।
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बिजली घर होने से नहीं आएगी समस्या
- बिजली अब अति आवश्यक है। धीरे-धीरे शहर का क्षेत्रफल बढ़ रहा है। ऐसे में खपत भी बढ़ेगी। शहर का अपना बिजली घर होने से समस्या नहीं आएगी। -रितु पांडेय, पुरानी बस्ती।
पीक ऑवर में बढ़ रही बिजली की खपत
- गर्मी बढ़ने के बाद बिजली की खपत भी बढ़ गई है। गिदही बिजली घर के अनुसार, गर्मी में सामान्य खपत करीब 78 मेगावाट प्रति घंटे हो रही है। जबकि पीक ऑवर में 85 मेगावाट प्रति घंटे तक की खपत हो रही है। यह खपत ठंडी की तुलना में 20 मेगावाट अधिक है।
एक नजर में फायदा
- शहर में प्रस्तावित नए 33 केवी उपकेंद्रों को सीधे मिलेगी बिजली
- लो वोल्टेज, कटौती और ओवरलोडिंग की समस्या से मिलेगी मुक्ति
- उद्यमियों के लिए स्वतंत्र फीडर बनाने में होगी आसानी