कलवारी। क्षेत्र के काली मंदिर खेमऊपुर में भागवत कथा में व्यास दिवाकर शास्त्री ने कंस वध व रुक्मिणी विवाह की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब कंस अपने राक्षसों को भेज कर श्रीकृष्ण को नहीं मार पाया तो उसने धनुष यज्ञ महोत्सव देखने के बहाने उन्हें मथुरा बुलाया। मथुरा के लिए जाते समय यमुना स्नान करने गये अक्रूर जी को अपनी लीला दिखाई। श्रीकृष्ण की लीला देख उनके मन से भय दूर हो गया। मथुरा पहुंचने पर रंगशाला में रखे धनुष का श्रीकृष्ण ने भंजन कर दिया। व्यास ने कहा कि मल्ल युद्ध में कृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर दिया और उसके अत्याचार से पृथ्वी को मुक्त कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि शिशुपाल बरात लेकर रुक्मिणी से शादी करने के लिए विदर्भ राज्य पहुंचा। उधर, रुक्मिणी ने पूजा करने के बहाने मंदिर गईं और वहां श्री कृष्ण को बुलाकर उनके साथ चली गईं। भागवत कथा में शंकर दास, ब्रह्म प्रकाश द्विवेदी, प्रिंस, सरिता आदि मौजूद रहे। संवाद