बस्ती। नगर पालिका के हाथ काफी हद तक खाली हो चुके हैं। विकास कार्य लगभग ठप है। धनाभाव में सड़क, नाली, पुलिया, पुल, इंटरलॉकिंग जैसे कार्य दो साल से नहीं हुए हैं। निर्माण इकाई लगभग टूटने के कगार पर है। कभी ठेकेदार और इंजीनियरों से गुलजार रहने वाली पालिका की निर्माण इकाई अब वीरान हो गई है। यहां एक भी इंजीनियर नहीं है।
वर्ष 2022 के बाद से नगर पालिका के निर्माण की गति धीमी पड़ गई। बजट खत्म होने के साथ स्टाफ भी चले गए। यहां निर्माण के लिए दो अवर अभियंता और एक सहायक अभियंता का पद सृजित है। दो साल पूर्व तक इन पदों की तैनाती भी रही। सहायक अभियंता सेवानिवृत्ति हो गए, जबकि तैनात एक अवर अभियंता अशोक सिंह का स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से किसी भी अभियंता की तैनाती यहां नहीं की गई। निर्माण इकाई में इंजीनियरों के तीनों पद रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा अवर अभियंता जलकल का भी पद तीन वर्ष से खाली है। निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी के एक जेई और जलकल से जलनिगम के एक जेई को संबंध करके जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
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एक सफाई निरीक्षक का पद भी खाली
नगर पालिका परिषद में सफाई निरीक्षक के दो पद सृजित है। तीन साल पहले यहां तैनात दो सफाई निरीक्षकों में से एक का स्थानांतरण हो गया। तभी से एक पद रिक्त चल रहा है। 25 वार्डों वाले इस शहर की सफाई व्यवस्था सिर्फ एक सफाई निरीक्षक पर निर्भर होकर रह गई है। जिससे शहर की समुचित सफाई भी नहीं हो पा रही है।
3.63 करोड़ रुपये की तैयार हुई कार्य योजना
नगर पालिका के पास निर्माण के लिए केवल 15 वें केंद्रीय वित्त आयोग के मद में महज 3.63 करोड़ रुपये ही उपलब्ध है। इसकी कार्ययोजना अभी सप्ताह भर पहले तैयार हुई है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा वार्डों के विकास में खर्च होगा। बाकी धनराशि चौराहों के सौंदर्यीकरण और जिला परिसर की खस्ताहाल सड़कों के पुर्ननिर्माण पर खर्च होगा।
निर्माण इकाई और जलनिगम में इंजीनियरों की अनुपलब्धता से शासन को अवगत कराया गया है। बजट के अलावा इंजीनियर और सफाई निरीक्षक की डिमांड की गई है। फिलहाल संबंद्ध इंजीनियरों से काम चलाया जा रहा है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद।