- जुलूस इमामबाड़ा शाबान मंजिल से जिला अस्पताल स्थित कर्बला तक निकाला गया
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कर्बला के शहीदों की याद में चेहल्लुम पर सोमवार को अंजुमने इमामिया गांधी नगर ने मातमी जुलूस निकाला। जुलूस इमामबाड़ा शाबान मंजिल से शुरू हुआ। नौहा व मातम करते हुए जुलूस जिला अस्पताल स्थित कर्बला पहुंचकर सलाम का नजराना पेश करने के बाद समाप्त हुआ। जुलूस में अलम व ताबूत शामिल रहा।
शाबान मंजिल में आयोजित मजलिस में मौलाना नकी इमाम रिजवी ने कहा कि कर्बला वह पाठशाला है, जहां मानवता, प्रेम व भाईचारे का संदेश दिया जाता है। इमाम हुसैन का गम वह इबादत है, जिसमें किसी धर्म, संप्रदाय कैद नहीं है। यजीद इब्ने माविया की हुकूमत के सामने जब आले रसूल ने झुकने से इन्कार कर दिया, तो कर्बला के मैदान में रसूलल्लाह के नवासे इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों को यजीदियों ने तीन दिन तक भूखा प्यासा रखकर शहीद कर दिया।
परिवार के जो लोग बच गए थे, उन्हें कैद कर दिया गया। लगभग एक साल तक कैद रखने के बाद यजीद ने उनको छोड़ा। यजीद की कैद से आजाद होने के बाद इमाम हुसैन की बहन जैनब ने सीरिया में सबसे पहली इमाम हुसैन की मजलिस की। इसके बाद वह लोग कर्बला पहुंचे, उसी दिन चेहल्लुम था। काफिले में शामिल महिलाओं ने अपने बेटों, भाई व करीबी लोगों की कब्र पर आंसू बहाए। इसकी याद में इराक स्थित कर्बला में हर साल चेहल्लुम पर बड़ी तादाद में अकीदतमंद पहुंचकर इमाम हुसैन का गम मनाते हैं।
इमामबाड़ा लाडली मंजिल में भी मजलिस हुई। यहां मौलाना नकी इमाम ने कहा कि जालिम से नफरत व मजलूमों से हमदर्दी ही हुसैनियत की पहचान है। जिनके यहां जुल्म बर्बरियत व आतंक है, वह यजीदी हैं। जहां मोहब्बत का पैगाम दिया जाता है, वहां हुसैनियत है।
इस दौरान आबिद, साबिर, सुहेल, सोनू, अयान आदि ने नौहा व सलाम पेश किया। इस मौके पर मौलाना अली हसन, हाजी अनवार काजमी, अन्नू, जैन, शम्स आबिद, जावेद, आले मुस्तफा, सफदर रजा, तकी हैदर, फहीम हैदर, आले हसन, जर्रार हुसैन आदि मौजूद रहे।