बाढ़ की तैयारी : माझा क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में अब भी राह नहीं, नाव पर बैठकर चलते हैं लोग
घरों में घुस जाता है पानी, शरणार्थी बनकर गुजारा करते हैं जलमग्न गांवों के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मानसून सिर पर आ चुका है। मगर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एहतियाती उपाय अब तक नहीं हो पाए हैं। बंधों की मरम्मत का काम अधर में लटका है। आज भी यहां के आधा दर्जन गांवों में पहुंचने के लिए राह नहीं है। कागजों में सब तैयारी चकाचक रहती है। मगर, धरातल पर कुछ नहीं दिखता। अब फिर समय करीब है। समीपवर्ती गांवों में फिर आने वाली है सरयू मैया। वह खुद बताएंगी तबाही से राहत के लिए हुए जतन का सच क्या है।
बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासनिक हल्के में चहलकदमी तेज हो गई है। तटबंधों की मरम्मत, बाढ़ के दौरान पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण, शिविर के लिए टेंट, कुर्सी आदि के इंतजाम के नाम पर धन खपाने की कागजी प्रक्रिया फिर पूरी की जा रही है। मगर, इसके वास्तविक हकदार काे कुछ पता नहीं है। प्रभावित गांवों के आसपास तटबंधों पर मरम्मत के लिए कुछ हलचल बढ़ी हुई दिख रही है, लेकिन काम में तेजी नहीं है। शायद जिम्मेदारों को हर वर्ष की तरह फिर बाढ़ आने का इंतजार है।
दुबौलिया विकास खंड के सुबिका बाबू, टेढ़वा, देवरार गंगबरार का पुरवा, माझाकिता अव्वल, विक्रमजोत ब्लॉक के कल्याणपुर, लकड़ी, पकड़ी, संग्रामपुर, संदलपुर आदि गांव तटबंध विहीन हैं। इनमें से अधिकतर गांवों में पहुंचने के लिए राह नहीं है। बाढ़ की त्रासदी में मंजर कुछ और हो जाता है। जलमग्न गांव से दूर तटबंध या ऊंचाई वाले जगह पर गाड़ियों को देख पीड़ितों का हुजूम दौड़ पड़ता है।
बेबसी के हाथ फैल उठते हैं, कुछ पाने की आस में सिकुड़ी धमनियां भी मोटी होकर उभर आती हैं। मगर, हिस्से में आता है भूजा, लइया, चने के कुछ दाने, मोमबत्ती और माचिस की डिबिया.. आदि। इसके अलावा कोई स्थाई निदान नहीं। हां आश्वासन भरपूर मिलता है। सूखे दिनों में नई राह बनेगी, नए ठोकर बनेंगे, आवास मिलेंगे, तटबंध की मरम्मत होगी। बाढ़ खत्म होते यह वादे-दावे भी खत्म हो जाते हैं।
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सुबिका बाबू : विस्थापन तो दूर गांव में पहुंचने के लिए राह नहीं
दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र का सुविका बाबू गांव लगभग 40 घरों का यह पुरवा है। 300 लोग यहां रहते हैं। अधिकतर परिवारों को अब भी छत नसीब नहीं है। फूस एवं मिट्टी के घर हैं। बाढ़ का नाम लेते ही यहां के लोग सिहर जा रहे हैं। तटबंध और नदी के बीच स्थित यह गांव बाढ़ के दौरान चारो तरफा पानी से घिर जाता है। कटरिया-चांदपुर तटबंध से इस गांव तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। सामान्य दिनों मेंं पगडंडी ही सहारा है। बाढ़ के समय लोग नाव से आते-जाते हैं। घरों में पानी घुसता है तो मकान की छतों पर लोग रहना शुरू कर देते हैं। त्रासदी जब और बढ़ती है तो यहां के लोग आसपास के शिविरों में पहुंचकर शरणार्थी बनते हैं।
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देवरार गंगबरार का पुरवा : खेती-बाड़ी के लिए नदी पार कर आते हैं लोग
दुबौलिया ब्लॉक का देवरार गंगबरार का पुरवा सरयू नदी के उस पार है। 350 आबादी वाले इस गांव में पहुंचने के लिए राह नहीं है। यहां के नागरिकों को खेती-बाड़ी के लिए नाव से नदी पार कर आना पड़ता है। मगर, बाढ़ के दौरान यह गांव पूरी तरह से कट जाता है। यहां के नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतें नदी उस पार स्थित आंबेडकरनगर जिले से पूरी हो रही है। बाढ़ के दिनों में तहसील, ब्लॉक एवं जिले स्तर का काम पड़ने पर लोग आंबेडकरनगर के टांडा से होकर यहां पहुंच पाते हैं। नदी उस पार गांव होने के नाते यहां राहत कार्य भी नहीं हो पाते हैं। नागरिक खुद की व्यवस्था से ऊंचे स्थानों पर नाव में ही पन्नी तानकर गुजर बसर करते हैं।
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माझाकिता अव्वल : अयोध्या होकर मुख्यालय पहुंचते हैं लोग
विक्रमजोत बलॉक क्षेत्र का ग्राम पंचायत माझाकिता अव्वल भी नदी उस पार है। यह अभी अपने ब्लॉक, तहसील और जिले से संपर्क विहीन है। यहां 2000 की आबादी निवासी करती है। यहां के नागरिक सरकारी कार्य से ही ब्लॉक, तहसील एवं जिला मुख्यालय पहुंचते है। इनका आवागमन आंबेडकर नगर, अयोध्या के रास्ते संभव हो पाता है। नागरिक राजकुमार, राजन, राजेश, रामबूझ आदि कहते हैं कि बाढ की त्रासदी झेलना उनकी आदत में शुमार है। रोजमर्रा की जरूरतें अयोध्या जिले से पूरी होती है। थाना एवं ब्लॉक पहुंचने के लिए 70-80 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
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बोले- नागरिक
छप्पर डाल कर नदी उस पार निवास करते हैं। बाढ़ के समयजीव-जंतुओं के चलते जिंदगी दांव पर रहती है। ब्लॉक मुख्यालय आने के लिए करीब सात किमी रेत में पैदल चलना पड़ता है।
-राम करन, देवरार गंगबरार
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बाढ़ के दौरान अक्सर अधिकारी गांव में नाव से आते हैं और आश्वासन देते हैं कि इस बार रास्ता बन जाएगा। लेकिन, बाढ़ खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। हम लोग पगडंडी से आते-जाते हैं। बाढ़ के दौरान तो नाव ही सहारा है।
-रामनाथ, सुविका बाबू
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कोट
बाढ़ बचाव के कार्य में तेजी लाई गई है। प्रस्तावित परियोजनाओं को बाढ़ आने से पूर्व पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए ठेकेदारों को मजदूर बढ़ाकर कार्य कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड