महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज को संसाधनों से सुसज्जित करने की पहल तेज हो गई है। इसी क्रम में कॉलेज को जहां आंख ऑपरेशन के लिए फेंको मशीन मिल गई है, वहीं ब्रांको स्कोप की भी मशीन शासन ने दी है। दूसरी ओर लंबे समय से एमआरआई की मांग पर शासन ने मुहर लगा दी है। मशीन की आपूर्ति ड्रग काॅरपोरेशन करेगा।
मेडिकल कॉलेज में आंख के दो सर्जन हैं। यह लोग मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद मैनुअल लेंस डालते हैं। इससे कई बार आंख में दिक्कत आ जाती है। इस दिक्कत को अब दूर करने के लिए शासन ने मेडिकल कॉलेज को फेंको मशीन मुहैया करा दी है। यह मशीन कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में स्थापित की गई है। अभी इसका संचालन शुरू नहीं हुआ है, मगर इस माह के अंत तक तकनीकी टीम इसका ट्रायल कर कॉलेज प्रशासन को सौंप देगी।
इसके अलावा कैली में ब्रांको स्कोप भी आ रही है। जो दो दिन में यहां पहुंच जाएगी, जिसे 10 मार्च के बाद ट्रायल कर मार्च के अंत तक मरीजों को सेवा देनी शुरू कर दी जाएगी।
क्या है ब्रांको स्कोप
चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि ब्रांको स्कोप अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित मशीन है। इससे जहां फेफड़े में होने वाले संक्रमण, कैंसर व गांठ को जाना जा सकता है, वहीं इससे बायोस्पी भी कर ली जाती है।
क्या है फेको मशीन
मोतियाबिंद के ऑपरेशन व आंखों में लेंस डालने के लिए इस मशीन का प्रयोग होता है। अत्याधुनिक फेंको मशीन से संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालय कैली से लोगों को बेहतर चिकित्सा मुहैया कराई जा सके। इसके लिए शासन लगातार प्रयास कर रहा है। फेंको मशीन के बाद ब्रांको स्कोप अस्पताल को मिल गई है। जिसे मार्च के अंत तक संचालित कर दिया जाएगा, जबकि एमआरआई मशीन की आपूर्ति ड्रग काॅरपोरेशन की ओर से मिलनी है। जैसे ही मशीन यहां आएगी उसे स्थापित करा दिया जाएगा। एमआरआई के लिए भवन आदि तैयार है। मशीन स्थापित होने पर अस्पताल में मरीजों को निशुल्क सेवा दी जा सकेगी। निजी संस्थानों में मरीजों को एमआरआई के लिए 25 सौ रुपये देने पड़ते हैं। अस्पताल यह सुविधा निशुल्क मुहैया कराएगा।