रोडवेज तिराहे पर चुनाव पर चर्चा करते लोग।
बस्ती। जिले में नगर पालिका सहित दस निकायों में 11 मई को मतदान होगा, लेकिन चुनाव की गहमागहमी चौक चौराहों पर तेज हो गई है। कयास के आधार पर लोग अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत चौक पर ही कर रहे हैं। इसके पीछे कोई जातीय तो कोई दलीय समीकरण को जीत का रास्ता बता रहा है। यह अलग बात है कि अभी भी सेहरा किसके सिर बंधेगा? यह तो तय नहीं हुआ है, मगर राजनीतिक गलियारे में कयासों का दौर शुरू हो गया है।
नगर निकाय में पालिका का चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम है। पालिका में अध्यक्ष की कुर्सी के लिए जहां भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशी पूरी ताकत से जुटे हैं वहीं इस बार आम आदमी पार्टी ने भी मैदान में प्रत्याशी उतारा है। यही नहीं भाजपा व सपा को अपने ही दल के बागियों से चुनौती मिल रही है, मगर पार्टी के परंपरागत मतदाताओं के चलते बागियों को लेकर प्रत्याशी व उनके समर्थक निश्चिंत हैं।
चुनाव को लेकर अब हार जीत की चर्चा होने लगी है। चाय की दुकान से लेकर चौराहों और चौपालों पर खूब बहस हो रही है। मौका चाहे जैसा हो लोग चुनाव पर चर्चा करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जो अपने प्रत्याशी के लिए वोट देने की बात कहते हुए जीत का दावा भी कर देते हैं। इसके लिए वह प्रत्याशी की खूबियां भी गिनाते हैं। कोई अपने प्रत्याशी को सरल सहज बता रहा है तो कोई ईमानदारी की मिसाल कहकर उसके तारीफ के पुल बांधते नहीं अघा रहे हैं। इधर राजनीतिक विश्लेषक मतदान दूर होने के कारण जीत का ऊंट किस करवट बैठेगा इस पर चर्चा तो नहीं कर रहे हैं, मगर जातीय व दलीय समीकरण को अपने नजरिए से देख कर गणित बैठाने लगे हैं।
गणेशपुर व रुधौली में पूर्व विधायक बैठा रहे गणित
नगर पालिका के बाद सबसे अहम चुनाव गणेशपुर व रुधौली का है। यहां पूर्व विधायकों की पत्नियां मैदान में हैं। यहां की स्थिति अभी स्पष्ट तो नहीं हो रही है, मगर दोनो 24 घंटे क्षेत्र में डट गए हैं। हालांकि इनके अलावा अन्य उम्मीदवार भी क्षेत्र को खंगालने में जुटे हैं।