फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: परियोजनाएं ठप... एक इंजीनियर के भरोसे बन रहा मास्टर प्लान

Mon, 09 Oct 2023 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
विज्ञापन
विज्ञापन
बीडीए के एक सहायक अभियंता भी हो गए स्थानांतरित, बचे एक इंजीनियर पर है पूरा दारोमदार
विज्ञापन

संविदा के कर्मचारियों पर निर्भर हो गई बीडीए की योजनाएं, परियोजनाएं ठप
संवाद न्यूज एजेंसी

बस्ती। पांच साल पूरे होने के बाद भी बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) स्टॉफ से गुलजार नहीं हो सका है। इंजीनियरिंग से लेकर प्लॉनिंग तक के कार्यों के लिए बीडीए के पास स्टॉफ नहीं है। शुरू से ही उधार के अभियंता पर बीडीए निर्भर रह गया। पर्याप्त इंजीनियरों की व्यवस्था नहीं बन पाई। इसके अलावा कार्यालयी कामकाज निपटाने वाले लिपिकों की भी कमी है। नतीजा संविदा पर तैनात तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी बाबू और इंजीनियरों तक का दायित्व संभालते हुए देखे जा रहे हैं।

स्थापना के समय से ही बीडीए विवादों में घिरा फिर इससे उबर नहीं पाया। वर्ष 2016 में बीडीए का गठन होने के बाद शुरू के दो साल तक कार्यालय की स्थापना ही नहीं हुई। 2018 में तत्कालीन डीएम डॉ. राजशेखर की पहल पर गांधी कला भवन को बीडीए के हवाले किया गया। तब जाकर कार्यालय खुल पाया। इसके बाद विभिन्न पदों के सृजन के सापेक्ष तैनाती अभी तक नहीं हो सकी। बीडीए में कुल पांच अभियंताओं के पद है। इसमें एक अधिशासी अभियंता, दो सहायक अभियंता, दो अवर अभियंता का पद शामिल है। शुरूआत में एक अधिशासी अभियंता और एक अवर अभियंता की तैनाती हुई। जिनके साथ बीडीए प्रभाव में आने लगा। जिला प्रशासन की मदद से शुरू से ही दूसरे विभाग के एक अवर अभियंता यहां संबद्ध होते रहे। बाद में शासन स्तर से दो सहायक अभियंताओं की स्थाई रूप से तैनाती हुई। करीब आठ माह पूर्व अधिशासी अभियंता पंकज पांडेय का यहां से स्थानांतरण हो गया और बीडीए के एक अवर अभियंता लंबे अवकाश पर चले गए। इसके बाद बीडीए फिर लड़खड़ा गया। सहायक अभियंता संदीप कुमार को अधिशासी अभियंता का प्रभार मिल गया। उनके साथ एक अन्य सहायक अभियंता अरुण शर्मा थे जिनका सितंबर में अयोध्या के लिए स्थानांतरण हो गया। दो माह पूर्व यहां संबद्ध किए गए पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता केजी चौधरी रिश्वत लेने के आरोप में हटा दिए गए। अब बीडीए का पूरा बोझ केवल एक सहायक अभियंता पर ही है। जिन्हें एक्सईएन की भी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है।
विज्ञापन

-
कर्मचारियों का भी अभाव
बीडीए कार्यालय में कर्मचारियों का भी अभाव है। प्लाॅनिंग के कार्यों के लिए यहां पांच पद सृजित है। मानचित्राकार, मुख्य मानचित्राकार, ड्राफ्टमैन, ट्रेनर एवं सहायक नगर नियोजक में से किसी की भी तैनाती नहीं है। लिपिक के दो पद है। इसमें एक पद खाली है। संविदा लिपिक पर ही कार्यालय के कामकाज का जिम्मा है। इसके अलावा चार मेट में से वर्तमान में एक मेट तैनात है। तीन मेट ने नौकरी छोड़ दी है। संविदा पर एक पत्रवाहक भी तैनात है।


बीडीए के पास प्रशासनिक अफसर भी नहीं
बीडीए के पास खुद के प्रशासनिक अफसर भी नहीं है। सचिव पद का प्रभार वर्तमान में अपर जिलाधिकारी कमलेश चंद्र के पास है। बीडीए उपाध्यक्ष पद का प्रभार शुरू से ही डीएम खुद संभालते आ रहे हैं। जबकि पदेन अध्यक्ष मंडलायुक्त है।

-
प्रभावित है परियोजनाएं
बीडीए की निर्माण परियोजनाएं स्टॉफ न होने से प्रभावित है। महायोजना 2031 के लिए नए मास्टर प्लान का संशोधन अभी तक नहीं हो सका है। इसके अलावा रामयाण सिटी बसाने की योजना भी औधे मुंह गिर गई है। शहरी क्षेत्र में विकास कार्यों के निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने में भी कठिनाई आ रही है। जिससे सड़क, नाली निर्माण जैसे कार्य ठप है।

कागज में बढ़ रहा दायरा, देखने संभालने वाला कोई नहीं
2016 में गठन के समय नगर पालिका समेत 69 गांव बीडीए में शामिल किए गए थे। इन गांवों का मास्टर प्लॉन भी तैयार हुआ था। इसका क्षेत्रफल 51.12 वर्ग किलोमीटर था। महायोजना 2021 में बीडीए का दायरा बढ़कर 150.76 वर्ग किलोमीटर में फैल गया है। नगर पालिका समेत कुल 217 गांव शामिल हो गए। मगर बीडीए के पास बढ़े हुए क्षेत्रों की निगरानी एवं नियोजित आबादी का प्रस्ताव तैयार कराने के लिए कोई नहीं है।
विज्ञापन

-
स्टाॅफ की डिमांड शासन से की जाती है। सृजित पदों के सापेक्ष रिक्तियों से शासन को अवगत कराया जा चुका है। फिलहाल मौजूद स्टॉफ की मदद से बीडीए का कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाता है।

कमलेश चंद्र, सचिव/अपर जिलाधिकारी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें