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Basti News: माझा क्षेत्र का जिले से कटा संपर्क... सुध लेने वाला कोई नहीं

Mon, 03 Jul 2023 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। दुबौलिया ब्लॉक के देवारागंगबरार गांव के नागरिक जनपद से कट गए हैं। तहसील क्षेत्र हर्रैया के इस राजस्व गांव के लोगों की खेती-बारी सरयू नदी के उस पार है। माझा क्षेत्र के इस गांव की लगभग तीन सौ की आबादी उस पार रहने को विवश है। साल के आठ महीने इनकी जिंदगी नाव पर चलती है और बाढ़ के दौरान चार माह इन नागरिकों का अपने ब्लाॅक या जनपद में आना जाना लगभग बंद हो जाता है।
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माझा क्षेत्र का देवारागंगबरार गांव गौरा-सैफाबाद तटबंध के दक्षिणी छोर पर तटबंध और सरयू नदी के बीच स्थित है। बाढ़ के समय यह गांव नदी के आगोश में आ जाता है। यहां की करीब सौ की आबादी छप्पर और पालीथीन तान कर नदी के उस पार निवास करती है। इन्हें अपने ब्लाक दुबौलिया, तहसील हर्रैया या जनपद मुख्यालय आने के लिए नाव का ही सहारा लेना पड़ता है। वह भी सामान्य दिनों में केवल आठ महीने तक। इस दौरान पशुचारा और अन्य सामग्री ग्रामीण नाव के जरिये ले जाते हैं। बाढ़ आने से पहले घर-गृहस्थी और पशुओं के चारे आदि सामानों की उपलब्धता नाव से बना ली जाती है। बाढ़ के समय चार महीने तक इन नागरिकों को जनपद से कटे रहना पड़ता है। इनकी आजीविका का मुख्य साधन खेती व पशुपालन है। जिससे जीवन स्तर में कोई खास बदलाव नहीं हो पाता है। इन ग्रामीणों को गुजर बसर छप्पर एवं पन्नी के घरों में खानाबदोश की तरह हो रहा है। नदी के उस पार रहने की वजह से आवास, पेंशन एवं अन्य सरकारी योजनाएं भी इनकी चौखट तक नहीं पहुंच पाती। साल में यदाकदा किसी मामले की सूचना पर थाने की पुलिस और हल्का लेखपाल ही नदी पार कर इस आबादी में पहुंच पाते हैं। जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अफसर कभी रुख नहीं करते। नदी उस पार बाढ़ की विभीषिका से इन्हें भी हर बार जूझना पड़ता है, लेकिन राहत कार्य वहां तक नहीं पहुंच पाता है।
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बाढ़ के दौरान आंबेडकरनगर से होकर आना पड़ता है मुख्यालय
बाढ़ के दौरान नाव से नदी पार करना आसान नहीं होता है। ऐसे में यह ग्रामीण अपने जनपद, तहसील एवं ब्लाक मुख्यालय तक पहुंचने के लिए आंबेडकर जनपद के टांडा होते हुए आना पड़ता है। लगभग 60 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
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15 साल पहले बदल गई भौगोलिक दशा
गांव के रामराज ने बताया की 15 साल पहले तक गांव में खुशहाली थी। तब सरयू नदी की मुख्य धारा आंबेडकरनगर की सीमा में बह रही थी। इसके बाद नदी कटान कर लगभग छह किलोमीटर खिसकर बस्ती जनपद की सीमा में गौरा-सैफाबाद तटबंध के करीब आ गई। जिससे उनके गांव की भौगोलिक दशा बिगड़ गई। वह कहते हैं कि अब तो हम लोगों की जिंदगी मां सरयू की गोद में ही कट रही है। संतराम निषाद बताते है कि खेती और पशुपालन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। बाढ़ के समय नदी के उस पार मिट्टी के टीलों और नाव पर जिंदगी गुजारनी पड़ती है। हमें कोई सरकारी मदद भी नहीं मिलती है। जगदीश निषाद का कहना है कि अब उस पार सरयू की रेत में रहने की आदत पड गई है। खेती, बारी छोड़कर कहां जाए। बाढ़ के समय रात के समय जहरीले जंतुओं से खतरा रहता है। मगर छोटे सोलर पैनलों के जरिये झोपड़ी में उजाला करके काम चलाते हैं। प्रशासन हमारे खेतों को सीमांकन भी नहीं करा सका है। आंबेडकरनगर जिले के लोग उनकी जमीनों को अपना बताते है।
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नदी उस पार रहने वाले नागरिकों को बाढ़ के दौरान राहत सामग्री पहुंचाई जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं। संबंधित ग्रामीणों के पात्रता के आधार पर सरकारी योजनाओं का भी लाभ दिलाया जाएगा। -गुलाब चंद्र, एसडीएम हर्रैया।
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