कुदरहा। धर्म की स्थापना, संतों व भक्तों की रक्षा के लिए समय समय पर परमात्मा को अवतरित होना पड़ता हैं। द्वापर युग में जब कंस के अत्याचार एवं पाप कर्म से लोग त्राहि त्राहि करने लगे तब प्रभु ने राम के रूप मे अवतार लेकर धर्म और संतों की रक्षा किया। यह बातें अवध धाम से पधारे कथा वाचक सानिध्य शुक्ल ने हथियांव कला श्रीराम महायज्ञ में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में कही। कथा में मुख्य यजमान हरिश्चंद्र सिंह, रणविजय सिंह, श्याम सुंदर चौधरी, कुंदन सिंह, राकेश सिंह, मस्ताना सिंह, राजेश सिंह, बब्बन, महेंद्र, विक्रम चौधरी, लल्लन सिंह, रामगोपाल, वीरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।