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Basti News: कदम-कदम पर खतरा... खुले नाले के बगल से गुजर रही जिंदगी

Mon, 22 Apr 2024 03:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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शहर के मुख्य नालों को ढकने की योजना नहीं, पटरी पर आवागमन
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वाहनों के गुजरने के दौरान नाले के किनारे से निकल रहे स्कूली बच्चे

संवाद न्यूज एजेंसी



बस्ती। शहर के कुछ जगहों पर राह चलना भी खतरे से खाली नहीं है। यहां आवागमन के लिए खुलेे नाले की पटरियों पर राह है। कहीं इंटरलॉकिंग तो कहीं आरसीसी सड़क बनी है। बगल में बिना ढक्कन का नाला है। पटरियों पर दो और चार पहिया वाहनों की आवाजाही हर समय है। इसी के बीच से महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग पैदल भी चलते हैं। वाहनों की आवाजाही के दौरान इन्हें खुले नाले के किनारे से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में जरा सी चूक हुई तो लड़खड़ा कर सीधे गहरे नाले में गिरने का खतरा है। यदि गिरे नहीं तो यहां सांस लेते हुए चलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

शहर की कॉलोनियों व मुख्य सड़कों के किनारे नालों काे खुला ही रखा गया है। यहां कदम-कदम पर खतरा है। केवल दुर्घटना का ही भय नहीं है, स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह है। शहर के नालों की खोदाई के बाद उसके उच्चीकरण का कार्य नहीं किया गया। नालों के पक्के निर्माण की कोई योजना अब तक नहीं बनी। इस पर ढक्कन रखने की भी पहल नहीं हुई। जबकि 50 साल पहले बनाए गए नालों के अगल-बगल आबादी है। वर्तमान में शहर के प्रमुख नाले आबादी के मध्य हो गए है।
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साल में एक बार नालों की सिल्ट सफाई करने के बाद उसी हाल में छोड़ दिया जा रहा है। आबादी के बीच खुला नाला होने से दुर्गंध उठ रही है। घरों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। स्कूल जाते समय और और खेलते हुए बच्चों का नाले में गिरने का खतरा बना रहता है। मवेशी तो अक्सर इसमें गिरकर घायल हो रहे हैं। शहर के तुरकहिया, लौकियहवा, मंगला कॉलोनी, पिकौरा शिवगुलाम, संतपुर, दक्षिण दरवाजा निषद टोला आदि हिस्सों में खुले नाले के बगल से आवागमन की व्यवस्था है। यहां बाकायदे इंटरलॉकिंग और आरसीसी सड़क बनाई गई है। दससे आते-जाते समय थोड़ी सी चूक होने पर लोग नाले में गिर रहे हैं। कई बार इस तरह की दुर्घटनाएं सामने आ चुकी है।

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तुरकहिया में नाले के बगल से है मुख्य सड़क
तुरकहिया और लौकियहवा मोहल्ले का मुख्य रास्ता नाले की पटरी पर बनाया गया है। तीन मीटर चौड़ी यह आरसीसी सड़क काफी व्यस्त रहती है। करीब बीस हजार की आबादी का आवागमन होने के अलावा छोटे बच्चों के तीन स्कूल और एक ऑटो मोबाइल कंपनी का वर्कशाॅप भी इस मार्ग पर है। नाले के एक बगल रास्ता है और दूसरे बगल नाले से सटकर मकान बने हुए हैं। घरों की खिड़की नाले की ओर है। ऐसे में गंदे पानी के जमा होने से बीमारी फैलने का खतरा रहता है। सड़क से गुजरते समय लोग पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। दुर्गंध से बचने के लिए नाक पर रूमाल रखनी पड़ रही है। रास्ता इतना संकरा है कि एक बार में एक ही चार पहिया वाहन निकल सकता है। गनीमत इतनी है कि सुरक्षा की दृष्टि से नाले के किनारे एक फिट ऊंचाई में दीवार खड़ी कर दी गई है। दो साल पहले यह व्यवस्था नहीं थी तो राहगीर अक्सर इस नाले में गिरकर चोटिल होते रहे। यदि यहां नाले का पक्का निर्माण कर ढक दिया जाए तो सेहत की दृष्टि से भला होगा और रास्ता भी दोगुना से अधिक चौड़ा हो जाएगा।



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मंगला कॉलोनी में नाले के बगल से गुजरने पर सबसे अधिक खतरा



मालवीय रोड से मंगला कॉलोनी से होकर पचपेड़िया एवं सेंट बेसिल स्कूल जाने वाली राह मुख्य नाले की पटरी पर बनाई गई है। यहां कई जगहों पर सड़क धंस गई है। एक-दो फिट के गड्ढे बन गए हैं। बगल में खुला नाला है। सुरक्षा की दृष्टि से नाले के किनारे दीवार या ठोकर भी नहीं बनाए गए हैं। ऐसे में राह चलने के दौरान छोटे-बड़े वाहन गड्ढों में हिलते- डुलते चल रहे हैं। कभी-कभी अनियंत्रित हाेकर यह वाहन नाले में पलट जा रहे हैं। दूसरी ओर नाले के अगल-बगल आबादी हो गई है। स्कूली बच्चे भी रोजाना इसी नाले के बगल से होकर गुजर रहे हैं। इनके सेहत के लिए खतरा है।

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40 किमी लंबाई में है मुख्य नाला

नगर पालिका की ओर शहर की जलनिकासी की व्यवस्था नालों के जरिए की जा रही है। शहर में अभी सीवर लाइन की व्यवस्था नहीं है। 50 वर्ष पहले 40 किमी की दूरी में कच्चे नाले का निर्माण कराया गया था। इन नालों से 25 वार्डों को जोड़ा गया है। इन नालों पर आवागमन के लिए लगभग 50 की संख्या में पुलिया का निर्माण हुआ है, लेकिन इनके पक्के निर्माण व ढकने की व्यवस्था कहीं नहीं है।



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केस- एक



मंगला कॉलोनी स्थित एक कोचिंग में पढ़ने जा रही छात्रा वाहनों के आवागमन के दौरान अचानक अनियंत्रित होकर नाले में गिर गई। वह कचरे से सराबोर हो गई। उसे हल्की चोटें भी आईं। लोगों ने उसे नाले से निकाला। छात्रा इस कदर सदमे में हुई कि उसने बाद संबंधित मोहल्ले में कोचिंग जाना छोड़ दिया।

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केस- दो

मंगला कॉलोनी में ही कुछ दिनों पहले नाले के किनारे सड़क से जा रहा ऑटो गड्ढे में अनियंत्रित होकर पलट गया। ऑटो नाले में गिर गया। चालक किसी तरह बच गया। बाद में नगर पालिका से जेसीबी बुलाकर ऑटो को निकलवाया गया। ऑटो क्षतिग्रस्त हो गया था।



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केस- तीन



तुरकहिया मोहल्ले की मुख्य सड़क पर एक साल पहले रात में कार अनियंत्रित होकर नाले में चली गई। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। मगर, कार को काफी क्षति पहुंची। बाद में क्रेन की मदद से कार को निकाला गया। मोहल्लेवासियों की मांग पर अब यहां नाले के किनारे एक फीट ऊंचाई की चहारदीवारी बना दी गई है।

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लोग बोले

शहर के मुख्य नालों के किनारे सड़क और आबादी दोनों है। ऐसे में नाले का पक्का निर्माण कराकर ढका जाना चाहिए। इससे रास्ता भी चौड़ा होगा और बीमारी भी नहीं फैलेगी।



संदीप कुमार, तुरकहिया
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आबादी के बीच नाले पर ढक्कन नहीं होने से बीमारी का खतरा है। लोगों के घरों में मच्छरों का प्रकोप हर समय रहता है। आते-जाते समय गिरने का भय रहता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों के लिए हैं।
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रमेश सिंह, मंगला कॉलोनी



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कोट



शहर के नालों को ढकने के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है। कुछ साल पहले सीवरेज सिस्टम प्लांट की कवायद शुरू हुई थी। मगर, सफल नहीं हुई। लोकसभा चुनाव के बाद इस मुद्दे पर गहनता से विमर्श कर कुछ ठोस विकल्प निकाला जाएगा।

-नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद।
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