- जनरल डिब्बे जैसी हो गई है स्लीपर कोच की स्थिति
- भीड़ इतनी की डिब्बे में घुसने तक में छूट जा रहे पसीने
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। त्योहारों पर घर लौटना मुसीबत भरा हो गया है। ट्रेनों में इस कदर भीड़ है कि स्लीपर कोच की हालत जनरल जैसी हो गई है। चारों तरफ यात्री ही यात्री नजर आ रहे हैं। ट्रेनों में तिल रखने की जगह नहीं है। एसी कोच में भी यात्री कब्जा जमाने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्हें गंगा नहा लेने जैसा सुखद एहसास हो रहा है।
जितनी दुर्दशा दिल्ली-मुंबई से बस्ती आने में हो रही है, उससे अधिक बस्ती से मनकापुर, गोंडा, बाराबंकी व लखनऊ जाने में हो रही है। स्टेशन पर ट्रेन आते ही यात्री गिरते-पड़ते कोच में घुसने की कोशिश करने लगते हैं। उधर, ट्रेन दिल्ली से फुल आ रही है।
शनिवार को दिल्ली से स्टेशन पहुंची सत्याग्रह एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में मनकापुर से गोरखपुर तक का टिकट लेककर आए हनुमान श्रीवास्तव दरवाजे पर जूझ रहे थे। संतकबीर नगर जा रहीं राजमति ने बताया कि कोच में तमाम यात्री टिकट लिए घूम रहे थे। दोपहर 12:04 बजे पहुंची बाघ एक्सप्रेस की हालत और बदतर थी। स्टेशन पर उतरे शिवहरि गुप्ता ने बताया कि लखनऊ से टिकट लेकर चढ़ा था। ट्रेन में रास्ते भर ढंग से खड़े होने की जगह नहीं मिली। तमाम यात्री टॉयलेट में खड़े होकर सफर कर रहे थे।
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ट्रेन पहुंचते ही मच रही अफरातफरी
स्टेशन पर शनिवार को यात्रियों की भीड़ देखकर लग रहा था कि कोई मेला चल रहा है। कोई यात्री प्लेटफॉर्म पर पन्नी बिछाए आराम फरमाता मिला तो कोई दीवार के सहारे खड़ा था। ट्रेन प्लेटफॉर्म पहुंचते ही अफरातफरी मचती रही। हर कोई एक-दूसरे को ठेलते हुए ट्रेन में चढ़ने का उतावला दिख रहा था। दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए यात्री सीढि़यों के बजाय लाइन पार कर रहे थे।
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ऑटो- टैक्सी वाले कर रहे मनमानी
त्योहार पर बाहर से आने वाले प्रवासी में घर पहुंचने की जल्दी देखी गई। इसका फायदा ऑटो व टैक्सी वाले जमकर उठा रहे हैं। स्टेशन से रोडवेज तक टैंपो से पहुंचाने का किराया सामान्य दिनों में 15 रुपये लगता है, लेकिन शनिवार को टैंपो चालक 25 से 30 रुपये वसूलते देखे गए।