मेडिकल कॉलेज में महिला मरीज के आत्महत्या करने की घटना से वार्ड में खौफ का माहौल रहा। बृहस्पतिवार की रात में उस वार्ड में भर्ती कोई मरीज या तीमारदार सो नहीं सका। सभी की नजरें शौचालय के दरवाजे की तरफ लगी रहीं, जिसमें महिला का शव पाया गया था।
अस्पताल के डाॅक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाॅफ में भी घटना को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। अपने आप में बेहद सनसनीखेज घटना के बारे में उनका कहना है कि इस तरह से दर्द से कराह रहे किसी मरीज के आत्महत्या करने की घटना उन लोगों ने कभी देखा-सुना नहीं था।
उधर, मृतका आराधना के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया। उसकी मां और भाई के अलावा ससुराल के लोग भी पहुंचे हुए थे। वह लोग शव को लेकर आराधना की ससुराल रामनगर पहुंचे। वहां से पास के घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सोनहा क्षेत्र के भानपुर की रहने वाली 30 वर्षीय आराधना की 10 दिन पहले लखनऊ के एक हॉस्पिटल में आंत का ऑपरेशन हुआ था। एक दिन पहले उसे परिजन घर लेकर आ गए थे। अगले दिन बृहस्पतिवार को महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मां सुशीला देवी और भाई राम विलास उसे लेकर मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली पहुंचे।
दोपहर 1:15 बजे उसे सर्जरी विभाग के महिला वार्ड में भर्ती किया गया। डॉ. डीके पाल की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था। मां सुशीला देवी के अनुसार, शाम 6 बजे के करीब अचानक उसे असहनीय दर्द होने लगा। वह डॉक्टर बुलाने के लिए स्टॉफ रूम में चली गई।
भाई वार्ड के बाहर खाना खा रहा था। इसी बीच बीमार महिला बगल में बैठी एक महिला को बोतल से मारते हुए बाथरूम में गई। कुछ देर बाद जब मां लौटी तो उसे बेड पर नहीं देखा। बाथरूम में छटपटाने की आवाज आई। इसके बाद शोर मचाने पर उसे लोग बाथरूम से मृत अवस्था में बाहर निकाला।
मां के अनुसार, बाथरूम में लटकी हुई एक डोरी में उसके गले में पड़ी थी। इस वजह से महिला के आत्महत्या किए जाने की चर्चा होने लगी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।