बस्ती। चकबंदी कर्मी की लापरवाही ने एक काश्तकार को ऐसा उलझाया कि उसे न्याय पाने के लिए 21 साल तक की लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। अंत में उसे उच्च न्यायालय इलाहाबाद से न्याय मिला। शहर से सटे राजस्व ग्राम अमहट तप्पा दुबखरा परगना नगर पूरब का है। यहां एक गाटा की खतौनी में रुपनारायन सिंह पुत्र जगन्नाथ दर्ज था लेकिन चककर्ता अजय पाण्डेय ने उक्त खाते को एक ही नंबर में दो लोगों का नाम दिखा कर जमीन को ताल के खाते में दर्ज करा दिया। अपनी जमीन दूसरों के नाम होते देख खातेदार रूप नारायण सिंह के उत्तराधिकारी राम प्रकाश सिंह ने न्यायालय की शरण ली। यह मामला उच्च् न्यायालय में 21 वर्ष तक चला। इसके बाद राम प्रकाश सिंह को अपनी जमीन मिल सकी। न्याय मिलने पर रामप्रकाश सिंह ने कहा कि अपने पूर्वज की जमीन जिस पर उनका हक था को पाने के लिए अदालत में 21 साल से लड़ाई लड़ी। अब जाकर वह जमीन मिल सकी है। कह कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था।