सिक्योरिटी व प्रोसेसिंग फीस जमा करवाकर रफू चक्कर हो रहीं कंपनियां
एप के जरिये लोगों को झांसा देकर बेरोजगारों को फंसाने का चल रहा खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मोबाइल एप के माध्यम से लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी का तरीका पुराना हुआ तो अब साइबर ठगों ने टेलीग्राम एप के जरिये वर्क फ्रा होम, पार्ट टाइम जॉब और निवेश का झांसा देकर ठगी शुरू कर दी। पहले आपसे डेमो वर्क करवाकर 100-200 रुपये दिए जाएंगे। उसके बाद आगे के काम के लिए पंजीकरण के नाम पर हजारों रुपये सिक्योरिटी के नाम पर जमा करवाएंगे। सिक्योरिटी का पैसा जमा होते ही नंबर ब्लॉक कर देते हैं। पिछले एक महीने में ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं।
साइबर अपराधी हर पांच-छह महीने में ठगी का तरीका बदल रहे हैं। शुरुआती दौर में डेबिट कार्ड बंद होने का डर दिखाकर डिटेल हासिल कर ठगी का सिलसिला चला। लोगों ने ओटीपी बताने बंद कर दिए तो मोबाइल फोन पर तत्काल लोन दिलाने के एप बनाकर ठगी शुरू की गई। बीते कुछ माह में सबसे ज्यादा मामले लोन एप के सामने आए हैं।
पुलिस ने गृह मंत्रालय के माध्यम से ठगी के ऐसे मोबाइल एप को बंद कराने की कार्रवाई की तो अब ठगों ने वर्क फ्राम होम और पार्ट टाइम जॉब दिलाने के बहाने ठगी करना शुरू कर दिए हैं। बीते तीन महीनों में ऐसे मामले बढ़े हैं जिनमें या तो घर बैठे काम दिलाने या मोटा मुनाफा दिलाने के बहाने निवेश की स्कीम बताकर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाई गई।
...
केस एक-
गांधीनगर निवासी अपूर्व गुप्ता ने बताया कि उनके पास एक फोन आया। ऑनलाइन काम करने के बदले पैसा मिलने की बात कही गई। आधार व पेनकार्ड आदि मांगे गए। एक हफ्ते का काम दिया गया। काम पूरा होने पर पैसे भेजने की बात कही गई। किसी कारणवश काम नहीं कर पाए। इसके बाद उनके पास एक मैसेज आया, जिसमें कहा गया कि उन्होंने एक कंपनी के साथ काम करने का वादा किया, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ, इसलिए केस दर्ज कराया जा रहा है। बुधवार को फोन आया कि एक सप्ताह में 10 हजार रुपये जमा करें, नहीं तो कोर्ट केस किया जाएगा।
...
केस दो-
मंगल बाजार निवासी अमृतलाल ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन वर्क फ्राम होम के लिए आवेदन किया था। आधार व पैन कार्ड और मोबाइल फोन और बैंक अकाउंट नंबर लिया गया। एक दिन काम करने के उन्हें 200 रुपये दिए गए। उसके बाद पंजीकरण कंफर्म करने के नाम पर उनसे 5000 रुपये मांगे गए। अमृतलाल ने 5000 रुपये जमा कर दिए, उसके बाद नंबर ब्लॉक कर दिया गया, जिस वेबसाइट पर उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया था, वह भी नहीं खुल रहा है।
..
ऐसे करते हैं ठगी
रेंज के साइबर थाने के प्रभारी विकास कुमार यादव का कहना है कि साइबर अपराधी लोगों के नंबर जुटाकर संपर्क करते हैं। अगर उनके मोबाइल में टेलीग्राम मोबाइल एप डाउनलोड है तो सीधे ही उस पर लिंक भेजकर घर बैठे रुपये कमाने का झांसा दे रहे हैं। यदि अगर एप नहीं हैं तो उन्हें सुनहरे सपने दिखाकर एप डाउनलोड करा लेते हैं। इस पर लिंक भेजकर लोगों के खातों में सेंध लगाकर ठगी कर रहे हैं। कई मामलों में लोगों से निवेश के लिए रुपये ट्रांसफर कराए गए हैं। साइबर सेल के प्रभारी का कहना है कि टेलीग्राम एप के माध्यम से ठगी की रकम विदेशों में पहुंच रही है। साइबर ठग लोगों से रकम चीन, दुबई और कई अन्य देशों के बैंक खातों में ट्रांसफर करा रहे हैं। ऐसे खातों को ब्लॉक कराना और उनसे रिकवरी कर पाना मुश्किल हो जाता है।
...
बंद कराते हैं संदिग्ध एप
साइबर सेल प्रभारी विकास कुमार यादव का कहना है कि जिन मोबाइल एप से ठगी की शिकायतें मिलती हैं, उनकी सूची तैयार की जाती है। इस सूची को वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से साइबर क्राइम के मुख्य कार्यालय लखनऊ को भेजी जाती है। यहां से गृह मंत्रालय को सूचना आंकड़ों के साथ भेजी जाती है। इसके बाद मोबाइल एप को बंद कराया जाता है। मोबाइल एप बंद होने के बाद साइबर ठग मिलते-जुलते नामों से फिर से एप बनाकर ठगी करने लगते हैं।
-
सावधानी ही बचाव का जरिया
- सरकारी विभाग में नौकरी दिलवाने के झांसे में न आएं।
- ऐसा वादा करने वाले के बारे में ठीक तरीके से पता करें।
- जान लें कि बिना परीक्षा, साक्षात्कार के कहीं नहीं मिलती जॉब।
- रिश्तेदार या मित्रों की बातों पर भी आंख मूंदकर न करें भरोसा।
- किसी को इसके लिए रूपये दें तो उसका लिखित प्रमाण जरूर रखें।
- कोई झांसा देकर रुपये मांगे तो पुलिस से बिना संकोच शिकायत करें।