बस्ती। मानसून आने में अब बमुश्किल एक महीने का ही समय है। बारिश के दौरान कई मोहल्ले जलमग्न हो जाते हैं। शहरियों की जिंदगी नारकीय बन जाती है। ऐसा हर साल होता है। जहां घर-आंगन तक पानी भरा रहता है, तो कहीं मुख्य सड़कें ही डूबी रहती हैं। मगर नगर पालिका ने इसे लेकर कोई तैयारी नहीं की है। मोहल्ले के लोग कहते हैं कि इस बार फिर उन्हें ऐसी समस्या से दो-चार होना पड़ेगा।
इन्हीं दुश्वारियों से हर बार जूझने वाला मोहल्ला गांवगोड़िया और मुरलीजोत भी है। यहां जलनिकासी का मुकम्मल इंतजाम अब तक नहीं हो सका है। दो-ढाई दशक पहले बने नाले बढ़ी हुई आबादी के लिहाज से कमतर साबित हो रहे हैं। इनसे सामान्य दिनों में गंदे पानी का ही बहाव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बरसात शुरू होते ही यह नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं। नतीजा मोहल्लों की सड़कों, गलियों या खाली जमीनों पर कई-कई दिनों तक पानी पसरा रहता है। बरसात के समय जलभराव का अहम कारण यह भी है कि मोहल्लेवार स्थित तालाब, पोखरे, गड्ढों में से अधिकतर पट चुके हैं। जिससे बरसात का पानी आबादी के बीच ही पसरा रहता है।
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तालाब की शक्ल में दिखने लगता है गांवगोड़िया
- रोडवेज और कोतवाली से सटा हुआ शहर का गांवगोड़िया मोहल्ला बारिश के दिनों में तालाब का शक्ल अख्तियार कर लेता है। यहां गली-गली से निकलने वाली नालियां शहर के बस्ती-मुंडेरवा मुख्य मार्ग पर स्थित मुख्य नाले में जुड़ती है। इस बार मुख्य नाले की सफाई अब तक नहीं हुई है। मोहल्ले की नालियां जगह-जगह चोक कर गई हैं। शिवा कॉलाेनी मोड़, स्लाटर हाउस, सिंचाई विभाग के निकट कई जगहों पर नालियों से पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है। सबसे खराब स्थिति इस मोहल्ले के अंतिम छोर की है। यहां शहरी सीमा खत्म होती है। सड़क के एक तरफ कब्रिस्तान और दूसरी ओर शिवालय है। यहीं से ग्राम जामडीह और चननी आंशिक क्षेत्र शुरू होता है। यहां नाले का निर्माण ही नहीं हुआ है। यह हिस्सा काफी निचले सतह पर है। वर्तमान में सड़क के दोनों तरफ सघन कालोनी का निर्माण हो चुका है। बारिश के समय हर साल यहां सड़क घुटने भर पानी में डूब जाती है। दृश्य बिल्कुल तालाब जैसा रहता है। ऊपर से सड़क भी ऊबड़-खाबड़ है। इसलिए मोहल्लेवासियों का इस रास्ते से निकलना दूभर रहता है। स्कूली बच्चे और दफ्तर जाने वाले लोग गिरने के भय से परिवर्तन मार्ग का सहारा लेते हैं।
डूबा रहता है कोतवाली परिसर
- गांवगोड़िया मोहल्ले के जलभराव का दबाव कोतवाली परिसर तक होता है। पहले मोहल्ले में पानी भरता है और बाद में कोतवाली परिसर डूब जाता है। यहां रहने वाले पुलिस कर्मचारी लगभग एक माह तक जलभराव की समस्या का सामना करते हैं। बचाव के लिए कोतवाली कार्यालय का फर्श ऊंचा कराया गया है, लेकिन अधिक बारिश होने पर कार्यालय में भी पानी घुस जाता है। पीछे पुलिस कालोनी के निचले तल पर तो रहने लायक ही नहीं रहता है।
मुरलीजोत, शिवाकाॅलोनी में भी जलभराव का संकट
- मुरलीजोत और शिवाकालोनी मोहल्ले में भी जलभराव का संकट गहराया रहता है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से यहां जगह-जगह गंदा पानी एकत्र रहता है। मुरलीजोत वार्ड के चइयाबारी में सार्वजनिक गड्ढा अतिक्रमण का शिकार बन गया है। यहां मलिन बस्ती के पास पानी बहने का कोई रास्ता नहीं है। बारिश के दिनों के जलभराव रहता है। इसी वार्ड में स्थित जिला उद्योग केंद्र का परिसर और कार्यालय दोनों पानी से भरे रहते हैं। कर्मचारी कार्यालय में आकर काम नहीं कर पाते हैं। मोहल्ले में गंदा पानी लगने से दुर्गंध भी बनी रहती है। शिवा काॅलोनी भी इसी समस्या का शिकार है।
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शहरियों की जुबानी, मोहल्ले की कहानी
- गांवगोड़िया में कब्रिस्तान के पास नाला और सड़क दोनों का निर्माण होना जरूरी है। प्रशासन के समक्ष कई बार आवाज उठाई गई, मगर इस ओर कोई ध्यान नहीं देता है। पानी में डूबी सड़क पर हम लोग गिरते-पड़ते चलते हैं। यह मोहल्ला उपेक्षा का शिकार बन गया है। -सुनील कुमार, गांवगोड़िया, बस्ती।
नगर पालिका और ग्राम पंचायत का सीमा क्षेत्र होने से गांवगोड़िया शिवालय के पास जलनिकासी की व्यवस्था नहीं बन पा रही है। जिसका दुष्प्रभाव कोतवाली परिसर तक देखने को मिलता है। सड़क और परिसर पानी में डूबे रहते हैं। सिंचाई विभाग कालोनी से चननी तक इस सड़क पर चलने लायक नहीं रहता। -प्रिंस शुक्ल, जामडीह, बस्ती।
शहर के अधिकांश हिस्सों में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं है। इसका स्थायी निदान तभी होगा जब सभी मोहल्लों में सीवर लाइन बिछेगी। हर बार बारिश में हम लोग जलभराव के संकट से जूझते है। मुख्य मार्गों को छोड़कर अधिकांश मोहल्लों में पानी भरा रहता है। -अमित कुमार पांडेय, मालवीय रोड, बस्ती।
गांवगोड़िया और शिवा काॅलोनी में जलभराव गंभीर समस्या है। नगर पालिका के पास इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं है। बहुत दबाव बनाने पर दो-चार दिन नालियों की साफ-सफाई नियमित हो जाती है। जबकि जलनिकासी के लिए नए सिरे से नालों के निर्माण की जरूरत है। -अजय चौधरी, गांवगोड़िया, बस्ती।
वर्जन
- शहर के कुछ प्रमुख नालों पर सिल्ट सफाई का कार्य शुरू करा दिया गया है। बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या जहां अधिक होगी, वहां पंपिंग सेट आदि की व्यवस्था की जाएगी। इसकी तैयारी की जा रही है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद, बस्ती।