बेलभरिया में विकास कार्य की जांच कर प्रधान व सचिव को दिया था क्लीन चिट
दूसरी जांच में बिना काम कराए धन निकालने की हुई थी पुष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। परशुरामपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बेलभरिया में बिना कार्य कराए धन निकालने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने दो अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। इन अधिकारियों में पूर्व डीपीओ और पीडब्लूडी के एक सहायक अभियंता शामिल हैं। आरोप है कि दोनों ने जांच में प्रधान व सचिव को क्लीनचिट दे दी थी। जबकि मौके पर कार्य नहीं कराया गया था।
परशुरामपुर ब्लॉक के बेलभरिया निवासी राजेंद्र प्रसाद ने सीडीओ को शिकायती पत्र देकर गांव के विकास कार्य में अनियमितता की शिकायत की थी। उन्होंने शपथ पत्र देकर जांच की मांग की थी। सीडीओ ने तत्कालीन डीपीओ अनुपम यादव और पीडब्ल्यूडी के अभियंता विनोद कुमार को जांच सौंपी। दोनों ने शिकायत को गलत बताते हुए जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। शिकायतकर्ता ने फिर से शिकायती पत्र समाधान दिवस हर्रैया में दिया। इसकी जांच दूसरी बार एडीओ विजय वर्मा और महेंद्र सिंह ने की।
जांच अधिकारियों ने बताया कि आरसीसी रोड का निर्माण कराए बगैर धनराशि निकाल ली गई। तालाब की खोदाई में जिस मजदूर का नाम लिया गया, उसने बताया कि खोदाई उसने नहीं की है। इंटरलॉकिंग का काम भी आधा मिला। कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत दिए प्रार्थनापत्र में शिकायतकर्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि तत्कालीन जांच अधिकारी डीपीओ और पीडब्ल्यूडी अभियंता ने गलत आख्या दी है। उन्होंने पदीय दायित्व का दुरुपयोग किया।
इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने जिला विकास अधिकारी को प्रकरण में प्रारंभिक जांच कर आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। दूसरी जांच के बाद काम कराने की शिकायत एसडीएम हर्रैया से की गई है। इसमें एसडीएम विनोद कुमार पांडेय ने बीडीओ परशुरामपुर को जांच का निर्देश दिया है।