महंगाई बढ़ी पर भक्तों के उत्साह में कमी नहीं
मातारानी का पंडाल, लाइट, साउंड सब हुआ महंगा, 30 से 50 फीसदी बढ़ा दाम
बस्ती। कोविड काल के कारण दो साल बाद शारदीय नवरात्र का पर्व उल्लास के साथ मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पूजा समितियां भव्य पूजा पंडाल के निर्माण का खाका खींच रही हैं तो मूर्तिकार मां दुर्गा की नौ स्वरूप की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने जुटे हैं। मगर इस बार मातारानी के पंडाल सजाने में डेढ़ गुनी महंगाई बढ़ गई है।
50वें वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन करने जा रहे भूअर निरंजनपुर दुर्गापूजा समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र चौहान बताते हैं कि इस बार देवी प्रतिमा के निर्माण में लगने वाली सामग्रियों की कीमत 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। लाइट, साउंड, टेंट, बांस-बल्ली का किराया भी बढ़ गया है। पूजा सामग्री के दामों में उछाल है।
प्रतिमाओं के निर्माण में लगे विपिन कुमार ने बताया कि देवी प्रतिमाओं की कीमत में 20 से 30 फीसदी वृद्धि हुई है। बीते वर्ष दो फीट की जो पांच प्रतिमाएं चार हजार में मिलती थीं, वही इस बार छह हजार में और 11 फीट की प्रतिमाएं 12 से 13 हजार रुपये में मिल रही हैं। इसमें मां दुर्गा की प्रतिमा के अलावा लक्ष्मी, गणेश, कार्तिकेय व सरस्वती की प्रतिमा शामिल हैं। 11 फीट से ऊंची प्रतिमाओं का निर्माण ऑर्डर पर किया जाता है।
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महंगी निर्माण सामग्री से बढ़ी लागत
मूर्तिकार रितु कुमार ने बताया कि प्रतिमा निर्माण में विशेष किस्म के बांस का प्रयोग किया जाता है। यह बांस पहले में 220 रुपये में एक पेड़ी मिलता था। अब तीन से साढ़े तीन सौ रुपये पेड़ी में मिल रहा। मूर्ति बनाने में देसी मिट्टी के साथ पांच अलग-अलग प्रकार की मिट्टी का प्रयोग होता है। देसी मिट्टी आसानी से मिल जाती है, लेकिन अन्य मिट्टी जुटाने के लिए मशक्कत करना पड़ती है। सुतली व पुआल के दाम भी बढ़े हैं। प्रतिमाओं की रंगाई में इस्तेमाल होने वाले पेंट के साथ सजाने में इस्तेमाल होने वाले साजो समान व कपड़ों के दामों में भी इजाफा हुआ है।
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ऐसे बढ़े प्रतिमाओं दाम
वर्ष 2017 में पांच हजार से लेकर 45 हजार तक
वर्ष 2018 में सात हजार से लेकर 50 हजार तक
वर्ष 2019 में सात हजार से लेकर 65 हजार तक
वर्ष 2020-21 में लॉक डाउन के कारण 10 हजार तक
वर्ष 2022 नौ हजार से लेकर 80 हजार तक की
प्रतिमाएं बन रही हैं।