भानपुर। भारत को अग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए राजाओं की तरह ही छोटे-छोटे कस्बों के जमींदारों ने भी अग्रेजों से जमकर मुकाबला किया था। जिन्हें अंग्रेजों ने खिलाफत करने के चलते फांसी पर लटका दिया था।
यह वह बलिदानी हैं जो देश के लिए शहीद होकर इतिहास के पन्नों में खो गए, लेकिन इनके नाम आज भी तमाम शहीद स्थलों पर शिलापट्टों पर अंकित हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि उनके वंशजों को आज भी अपने पुरखों के देश के लिए सर्वोच्च बलिदान का कोई प्रतिफल नहीं मिला है। ऐसा ही एक नाम भानपुर कस्बा निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे बाबू जयनारायण सिंह का भी है। जिन्हें आजादी के बाद इतिहास ने भुला दिया।
उनके वंशज (प्रपौत्र) बृृृजेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि उनके पर बाबा जयनारायण सिंह ने वर्ष 1920 में वर्तमान समय में रुधौली तहसील के बड़े जमींदार ठाकुर शिव गुलाम सिंह के साथ पैडा में हुए अग्रेजों के साथ संग्राम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। जिन्हें बाद में वर्तमान समय में हरैया तहसील क्षेत्र के छावनी कस्बे में स्थित पीपल के पेड़ पर लटकाकर फांसी दे दी गई थी।
बताते हैं कि उनका नाम आज भी उस शहीद स्थल पर लगी शिला पट्ट पर अंकित है। कहते हैं कि जयनारायण सिंह का नाम इलाहाबाद के आजाद पार्क वर्तमान समय में (प्रयागराज) जिले के साथ ही भानपुर तहसील क्षेत्र के रामनगर ब्लाॅक परिसर में लगे शिलापट्ट पर भी अंकित है। कस्बावासी उनके बलिदान को याद रख सकें, इसके उनके प्रपौत्र बृृृृजेंद्र सिंह ने पिछले दिनों अमर शहीद जयनारायण सिंह का स्मारक निर्माण कराने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। कहते हैं कि स्मारक निर्माण के लिए तहसील प्रशासन ने जमीन भी आरक्षित कर रखी है।
अमर शहीद जयनारायण सिंह के स्मारक के निर्माण में तहसील स्तरीय जो भी सहयोग होगा, कराया जाएगा, जिससे लोग उनके बारे में जान सकें।
-आशुतोष तिवारी, एसडीएम