बस्ती। शासन के निर्देश पर रियल टाइम (वास्तविक समय ) खतौनी जारी किए जाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। तहसीलों में वर्तमान खतौनी को अपडेट किया जा रहा है। नई व्यवस्था से भूमि विवादों पर अंकुश तो लगेगा, लेकिन इसमें कुछ झोल भी है। एक ही जमीन कई लोगों को बेचे जाने समेत अन्य दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां बरत कर किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है। मसलन खरीदारी से पहले जमीन से जुड़े राजस्व अभिलेखों का मुआयना जरूर करा लें, जिससे बैनामा की प्रक्रिया के बाद कोई पेच न फंसे बेहतर होगा कि किसी विशेषज्ञ अधिवक्ताओं के जरिए जमीन का बैनामा कराया जाए, भले इसके लिए थोड़ी फीस ही क्यों न अदा करनी पड़े।
शासन की ओर से भूमि विवादों को खत्म करने के लिए रियल टाइम खतौनी दी जाएगी। बैनामा कराते ही खरीदार को जमीन की खतौनी मिल जाएगी। नई खतौनी को आधार और पैन कार्ड से भी जोड़ा जाएगा। बैनामा होते ही क्रेता और विक्रेता दोनों के मोबाइल नंबर पर बैंक की तरह मैसेज पहुंच जाएगा जिससे वह अलर्ट हो जाएंगे।
पुरानी खतौनी में किसी भूमि के नामांतरण के बाद दाएं कालम में आदेश दर्ज होता था। बाएं स्थित मुख्य कालम में नाम चढ़वाया जाता है। इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।
नई प्रक्रिया में क्रेता का नाम सीधे मुख्य कालम में दर्ज होगा। नई खतौनी में 19 बिंदु शामिल हैं, जबकि पुरानी खतौनी में 13 थे। नए बिंदु में आधार नंबर, पैन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, जाति, गाटा का यूनिक कोड, हर खातेदार का अंश इत्यादि का जिक्र होगा। रियल टाइम खतौनी की भाषा भी सरल होगी। उर्दू की जगह ज्यादातर हिन्दी का इस्तेमाल होगा।
डीएम, एसडीएम के आदेश पर होगा सुधार
रियल टाइम खतौनी में किसी तरह की लिपिकीय त्रुटि को ठीक कराने के लिए डीएम अथवा एसडीएम के आदेश की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए क्रेता को आवेदन करना होगा। अधिकारी इसका परीक्षण करके आदेश जारी करेंगे। इसके बाद ही संशोधन हो सकेगा। खतौनी में अक्सर नाम, पति का नाम, पिता का नाम, गाटा संख्या सहित अन्य गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी दशा में लंबी प्रक्रिया होगी। वहां फर्जी बैनामा कराए जाने पर खतौनी निरस्त कराने के लिए पहले की तरह मुकदमा करना पड़ेगा। इसमें काफी वक्त गुजर जाएगा।
जमीन का मुआयना जरूरी
रियल टाइम खतौनी में जमीन खरीदते ही लोग मालिक बन जाएंगे। किसी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जमीन खरीदने के पहले उसका मुआयना जरूर करा लें। अच्छे अधिवक्ताओं से राय लें बिचौलियों पर किसी तरह का भरोसा न करें दस्तावेज लिखे जाने के दौरान भी उसकी पूरी जानकारी लें। -ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, उपनिबंधक बस्ती सदर
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रियल टाइम खतौनी के फायदे
तहसील के अधिकारियों का कहना है कि रियल टाइम खतौनी के लिए नए सिरे से नक्शा तैयार होगा। इसमें भूमि के हर टुकड़े की जानकारी दर्ज होगी। खतौनी गाटा संख्या के आधार पर तैयार होगी। इसमें भूमि की प्रकृति अथवा अंश का जिक्र किया जाएगा। भूमि के संबंध में सीलिंग, संक्रमणीय,असंक्रमणीय, पट्टेदार, नवीन परती, आबादी, रास्ता अथवा चकरोड की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। खातेदार का अंश स्पष्ट होने से अलग से हिस्सा प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भूमि के साथ पुश्तैनी मकान और अन्य अचल संपत्तियों का ब्योरा होगा। इसमें हर गाटा का एक यूनिक कोड होगा। राजस्व न्यायालयों में चल रहे भूमि के विवादों की जानकारी मिल सकेगी। हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने, लोन के दस्तावेज तैयार कराने में सुविधा होगी। रियल टाइम खतौनी में भूमि मालिक की जाति के कोड का उल्लेख होगा। अलग से जाति प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी।
गड़बड़ी पर सुधार नहीं होगा
रियल टाइम खतौनी में किसी तरह की त्रुटि होने पर उसमें संशोधन नहीं हो सकेगा। इससे पूरक बैनामा कराने का समय नहीं मिलेगा। मसलन, किसी बैनामे के दौरान गाटा नंबर या चौहद्दी इत्यादि में गड़बड़ी हो जाती है तो पूरक बैनामा कराकर उसे सुधार लिया जाता है। -योगेश श्रीवास्तव, अधिवक्ता
बंटवारा न होने पर दिक्कतें
यदि किसी भूमि का बंटवारा नहीं हुआ है। उसका रकबा टूटा नहीं है तो उसकी चौहद्दी तय करने मैं कठिनाई होगी। यदि सहखातेदार ने कोई आपत्ति करते हुए वाद दाखिल कर दिया तो इसमें स्थगन आदेश जारी हो सकता है। इससे पीड़ितों को कचहरी का चक्कर लगाना ही पड़ेगा। -कृष्ण मोहन उपाध्याय, अधिवक्ता
भुगतान में होगी परेशानी
कई बार भूमि के सौदेबाजी में भुगतान फंस जाता है। ऐसे में समय मिलने पर विक्रेता आपत्ति लगा देते थे। नई प्रक्रिया में यह मौका नहीं मिलेगा। यदि किसी ने भरोसे में लेकर धोखाधड़ी कर दी तो भूमि हाथ से निकल जाएगी। किसी तरह की गड़बड़ी होने पर सुधार कराने का मौका नहीं मिल पाएगा। -जितेंद्र नाथ शुक्ल, अधिवक्ता
फर्जी बैनामा बनेंगे मुसीबत
इसमें फर्जी बैनामा होने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ेगी। खतौनी जारी होने के बाद इसमें लोग वाद दाखिल करेंगे। उसका फैसला होने पर लंबा समय लग जाएगा। इससे दिक्कत की आशंका है। यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू होने के बाद ही कुछ चीजें स्पष्ट हो सकेंगी। - पंकज श्रीवास्तव, अधिवक्ता
रियल टाइम खतौनी से होगी आसानी
अभी खतौनी 13 कालम की है। रियल टाइम खतौनी 19 कालम की होगी। इसमें आधार नंबर / पैन कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, जाति, गाटा का यूनिक कोड, हर खातेदार का अंश इत्यादि का जिक्र होगा। हिंदी के सरल शब्दों का प्रयोग किया जाएगा। इससे अपनी खतौनी को समझने में सुविधा होगी। -राधेश्याम, तहसीलदार, सदर