फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: मरीज बढ़े तो हांफने लगेगा मेडिकल काॅलेज... अस्पताल में वेंटीलेटर है न आक्सीजन यूनिट

Fri, 30 Jun 2023 12:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। संचारी रोगों का महीना आने वाला है। इससे निपटने के लिए शासन ने जरूरी उपाय करने का निर्देश दिया है। छिड़काव, जागरुकता, फाॅगिंग आदि का अभियान गांव-गांव शुरू होने वाला है। इतने के बाद भी यदि संचारी रोगों का प्रकोप बढ़ा तो आगे नियंत्रण के कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। गिनाने को जनपद में महर्षि वशिष्ठ के नाम से मेडिकल काॅलेज भी है, लेकिन मरीज बढ़े तो यह भी हांफने लगेगा। इलाज के हाईटेक इंतजाम छोड़िए, अनुमन्य जरूरी सुविधाएं भी यहां नदारद हैं। लोगों का कहना है कि मेडिकल काॅलेज के 400 बेड के ओपेक कैली अस्पताल में केवल गगनचुंबी इमारत भर है। यहां इलाज के लिए मुकम्मल व्यवस्था तीन साल बाद भी नहीं बन पाई। केवल सामान्य मरीजों का ही इलाज हो पा रहा है। वेंटीलेटर, आक्सीजन, डायलिसिस आदि अनुमन्य सुविधाएं नदारद होने से सीरियस मरीजों को यहां से गोरखपुर और लखनऊ के लिए रेफर कर दिया जा रहा है। अभी भीषण गर्मी में लू के सीरियस मरीजों के इलाज में यह अस्पताल लाचार साबित हो चुका है। पड़ताल में यहां की व्यवस्था की कलई खुल गई।
विज्ञापन

-
पांच बेड का डायलिसिस यूनिट दो साल से बंद
ओपेक कैली में मेडिकल कालेज की ओर से पांच बेड की डायलिसिस यूनिट स्थापित है। कोरोना काल में कुछ दिनों के लिए इसे चालू भी किया गया था। इधर दो साल से यह बंद है। किडनी से संबंधित गंभीर मरीजों का डायलिसिस सुविधा न होने से यहां इलाज संभव नहीं है। डायलिसिस के लिए जरूरी मरीजों को यहां तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है। डायलिसिस यूनिट को चालू रखने के लिए मेडिकल कालेज के पास टेक्नीशियन ही नहीं हैं। मशीनों का निरंतर उपयोग न होने से वह भी जंग खा रही है। यहीं हाल कुछ दिनों तक और रहा तो इस यूनिट को निष्प्रयोज्य घोषित होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

120 बेड का वेंटीलेटर यूनिट भी बंद
शुरुआती दौर में मेडिकल काॅलेज के इस अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए 120 बेड की वेंटीलेटर यूनिट की स्थापना हुई थी। इस पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। उम्मीद जगी कि सीरियस मरीजों को वेंटीलेटर के जरिये यहां हैंडल किया जाएगा। मगर स्थापना के बाद से इस यूनिट को चलाने के लिए टेक्नीशियन एवं अन्य स्टाफ नहीं मिल पाए हैं। जिससे इस यूनिट को बंद रखना पड़ रहा है। इसमें स्थापित मशीन, वायर और बेड मरीजों के इलाज में उपयोग आने के बजाय धूल फांक रहे हैं।
विज्ञापन


नहीं चालू हुआ एक हजार एलपीएम क्षमता का आक्सीजन प्लांट
कोरोना काल में इस अस्पताल में आक्सीजन प्लांट के स्थापना की पहल हुई। अस्पताल परिसर में एक हजार एलपीएम क्षमता का आक्सीजन प्लांट बनकर तैयार हुआ। लेकिन दो साल से यह चालू नहीं हो सका। इसके अलावा वार्डों में केंद्रीयकृत आक्सीजन की व्यवस्था भी नहीं बन पाई। आक्सीजन प्लांट की स्थापना के बाद अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पाइपलाइन का कार्य नहीं कराया गया। भर्ती मरीजों को जरूरत पर सिलिंडर के जरिये आक्सीजन मुहैया कराई जा रही है।

अल्ट्रासाउंड सेंटर में सिर्फ एक मशीन
उच्चीकृत जांच की व्यवस्था भी इस अस्पताल के पास नहीं है। अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन की सिर्फ एक-एक मशीन चालू हालत में है। यहां मरीजों की भीड़ अधिक रहने से अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन कराने के लिए नंबर आने में दो से तीन दिन लग जाते हैं। जिला अस्पताल, जिला महिला चिकित्सालय एवं जनपद के अन्य सरकारी अस्पतालों के मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन के लिए यहीं भेजा जाता है। मरीजों की भीड़ बढ़ते ही यह व्यवस्था लगभग फेल हो जाती है।

कार्डियोलाजिस्ट और न्यूरोलाजिस्ट की तैनाती नहीं
मेडिकल काॅलेज स्तर के इस अस्पताल में कार्डियोजाजिस्ट की तैनाती अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में हार्ट अटैक के मरीजों को भी रेफर कर दिया जा रहा है। आए दिन हार्ट से संबंधित मरीज यहां से अन्यत्र रेफर किए जा रहे हैं। इसी तरह न्यूरोलाजिस्ट की भी तैनाती अब तक नहीं हो पाई है। न्यूरो सर्जरी की भी व्यवस्था यहां नहीं है। हृदय रोग विभाग एवं न्यूरो विभाग बंद चल रहा है।

महीने भर में 100 से अधिक मरीज हुए रेफर
25 मई से 28 जून तक इस अस्पताल में गंभीर मरीजों को रेफर किए जाने का आंकड़ा सौ के पार है। इसमें ज्यादातर दुर्घटनाग्रस्त मरीज शामिल हैं। दुर्घटना के बाद अत्यधिक चोट लगने वाले मरीजों को तत्काल वेंटीलेटर की जरूरत होती है। अस्पताल के पास यह व्यवस्था न होने से रेफर कर दिया जा रहा है। इसके अलावा हार्ट अटैक एवं किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीजों को भी यहां से रेफर किया गया है।

उपलब्ध सुविधाओं में मरीजों का भरपूर इलाज किया जा रहा है। आक्सीजन यूनिट चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वेंटीलेटर, डायलिसिस यूनिट के संचालन के लिए टेक्नीशियन और हृदय रोग तथा न्यूरो विभाग के लिए कार्डियोलाजिस्ट, न्यूरोलाजिस्ट की डिमांड की गई है। -डाॅ. एएन प्रसाद, सीएमएस, ओपेक चिकित्सालय कैली।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें