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स्कूटी चलाकर स्कूल आया बच्चा तो अभिभावक पर होगी कार्रवाई

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स्कूटी चलाकर स्कूल आया बच्चा तो अभिभावक पर होगी कार्रवाई
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बस्ती। बच्चों को स्कूटी चलाकर स्कूल भेजने वाले अभिभावकों पर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। मोटर वाहन एक्ट के तहत ऐसे अभिभावकों पर कार्रवाई की जाएगी, जिनके नाबालिग बच्चे बाइक या स्कूटी लेकर स्कूल आते-जाते होंगे।
सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा के दौरान डीएम प्रियंका निरंजन ने परिवहन विभाग को इसके लिए निर्देश दिए हैं। कहा है कि अभिभावकों को इसके लिए जागरूक किया जाए। समझाने पर न मानने वालों पर एमवी एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही स्कूलों के प्रबंधन को भी नसीहत दी गई है कि वे ऐसे विद्यार्थियों को स्कूल में प्रवेश न करने दें, जो बिना लाइसेंस के स्कूटी या बाइक लेकर स्कूल में दाखिल हो रहे हों।
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आजकल बच्चों में स्कूटी व बाइक लेकर स्कूल जाने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। 12वीं तक की कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थी की उम्र बमुश्किल 16-17 वर्ष होती है। ऐसे में उनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही ठीक से वाहन चलाने की ट्रेनिंग होती है। ऐसे में कभी-कभी सड़क पर या तो वे खुद हादसे का शिकार हो जाते हैं या दूसरे को टक्कर मारकर जख्मी कर देते हैं। पिछले तीन महीने में बच्चों की स्कूटी, बाइक से हो चुके नौ हादसों से साफ है कि यदि इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगी तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
बच्चों की जिद्द के आगे अभिभावक लाचार
अभिभावक अभिषेक गुप्ता ने बताया कि कई बच्चे जब 11वीं व 12वीं कक्षा में जाते हैं तो अभिभावक उनको दोपहिया वाहन उपलब्ध करा देते हैं। ऐसा नहीं कि अभिभावकों को इसके नुकसान के बारे नहीं पता, मगर बच्चों की जिद या ट्यूशन के चलते उन्हें अपने पाल्यों को वाहन लेकर ही देना पड़ता है। यह जानते हुए कि यह बच्चों के लिए ठीक नहीं है, मगर दूसरा विकल्प तलाशने की कोशिश करने के बजाए उन्हें स्वयं ही वाहन चलाने देते हैं।
नाबालिग तेज रफ्तार से दौड़ा रहे वाहन
अभिभावक विक्रम सिंह ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के हाथ तब तक वाहन नहीं देना चाहिए, जब तक बच्चे बालिग और यातायात नियमों के प्रति जागरूक न हो जाएं। उन्होंने बताया कि 12 से 18 साल की उम्र बहुत कच्ची होती है। नाबालिगों में इस उम्र में जुनून होता है। अभिभावक बच्चों को वाहन खरीद कर दे देते हैं और बच्चे उसे तेज रफ्तार से दौड़ातेे है, जिससे वह अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी खतरा पैदा कर देते हैं। उन्होंने कहा कि वे जागरूक युवा, जागरूक समाज अभियान चलाकर अब तक कई स्कूलों में बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर चुके हैं।
नाबालिग वाहन चलाते मिला तो होगा चालान
यातायात उपनिरीक्षक कामेश्वर सिंह ने कहा कि पुलिस प्रशासन की ओर से स्कूलों में विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान जारी है। जल्द ही स्कूलों के बाहर चेकिंग की जाएगी। छुट्टी के बाद नाबालिग वाहन चलाते पाया गया तो चालान किया जाएगा। इतना ही नहीं, स्कूल संचालकों से भी कहा जाएगा कि वे बच्चों को वाहन लाने से रोकें।
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यह है नियम
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 180 के तहत उस व्यक्ति को तीन महीने तक की सजा हो सकती है, जो बिना लाइसेंस वाले व्यक्ति को अपना वाहन चलाने के लिए देता है। इस कानून के तहत नाबालिग को भी अपनी गाड़ी चलाने की इजाजत देना गलत है। ऐसा करने पर एक वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना हो सकता है।
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