रुपये न मिलने पर उस जमीन पर पैदा हुई फसल में देना होगा बंटाई
कप्तानगंज क्षेत्र के मीता सोती गांव में टाइल्स कारीगर की मौत का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज (बस्ती)। कप्तानगंज क्षेत्र के मीता सोती गांव के प्रदीप चौधरी की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। फंदा लगाकर जान देने के पीछे की वजह को लेकर माथापच्ची तेज हो गई है। इस बीच प्रदीप की जेब में रखे तीन हजार रुपये भी गायब हैं। उसकी पत्नी का कहना है कि उनकी बड़ी ननद संध्या धमकी देकर गई है कि पिता के इलाज में आठ लाख रुपये खर्च हुए हैं। वह रुपये जब तक नहीं मिलते तब तक वह जमीन नहीं छोड़ेगी। जमीन पर बुआई भी नहीं करने देगी। जो भी उस जमीन पर बुआई करेगा, उसे बटाई में अनाज देना पड़ेगा।उधर, भाई का शव पहुंचने के पहले बहनों का घर से चले जाने चर्चा का विषय बना हुआ। प्रदीप के शव का बृहस्पतिवार रात मनोरमा नदी के तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। छोटे भाई संपीप कुमार ने बड़े भाई को मुखाग्नि दी।
कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मीता सोती गांव के प्रदीप कुमार चौधरी (32 वर्ष) पूणे में रखकर टाइल्स का काम करता था। तीन माह पहले वह घर आया था। प्रदीप के पिता पलटू की 20 मार्च को मौत हो गई थी। दो दिन पहले ब्रह्मभोज का कार्यक्रम हुआ। घर से सभी रिश्तेदार अपने-अपने घर चले गए थे। परिजनों के मुताबिक प्रदीप की बड़ी बहन संध्या ने पिता के दवा कराने के बहाने कीमती जमीन अपने नाम से वरासत करा ली थी। इससे प्रदीप अवसाद में रहता था।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात करीब 11 बजे वह कमरे में बांस में साड़ी का फंदा बनाकर लटक गया। तभी छोटे भाई संदीप की उस पर नजर पड़ गई। उसने फंदा काटकर उसे बचा लिया। परिवार के लोगों का कहना है कि सुबह चार बजे प्रदीप ने अपने कमरे में बिजली का तार पकड़कर आत्महत्या कर लिया। हालांकि, पोस्टमार्टम में करंट लगने की कोई निशानी नहीं पाई गई।
...
आवेदन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू
- एसएचओ दीपक कुमार दुबे ने बताया कि पिता की मौत के बाद बड़ी बहन संध्या के पैतृक जमीन का वरासत कराने के लिए तहसील में आवेदन किया गया है। लेकिन प्रदीप की मौत के बाद राजस्व कर्मियों ने आवेदन को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।