नियोजित शहर के लिए बीडीए नहीं कर रही पहल, भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में निजी अस्पतालों की भरमार
पार्किंग स्थल न होने से अस्पतालों के सामने सड़क पर खड़ी हो रहीं गाड़ियां, शहर में लग रहा जाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) को प्रभावी हुए पांच साल बीत गए। मगर, नियोजित शहर बसाने का प्रारूप तैयार नहीं हो सका। ऐसे में सुंदर एवं सुसज्जित शहर की तस्वीर सामने नहीं आ सकी है। मेडिसिटी तक विकसित नहीं हो पाया। शहर में बहुत सारे अस्पताल और नर्सिंग होम गली-मोहल्लों में संचालित हो रहे हैं। अस्पतालों के सामने गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। इससे लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है। एक किमी की दूरी तय करने में आधे घंटे से ज्यादा लग रहा है।
शिक्षक, इंजीनियर, अधिवक्ता समेत अन्य बुद्धजीवियों का मानना है कि अगर अस्पताल मेडिसिटी में शिफ्ट हो जाएं तो शहर के गली-मोहल्लों में जाम नहीं लगेगा। बस इसके लिए सभी को सोच बदलनी होगी, फिर हर किसी को आराम होगा। अस्पताल चौराहा से दक्षिण दरवाजा और दूसरी तरफ लबनापार तक करीब एक दर्जन से अधिक अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। इसी के बराबर डाइग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल स्टोर होने से यह पूरा क्षेत्र मेडिकाल का हब बन गया है। इस मार्ग पर पार्किंग का स्थान नहीं होने से सड़क के किनारे तक वाहन खड़ा कर लोग उपचार कराने के लिए मजबूर है। यहां पुलिस कर्मी दिन भर जाम हटवाने में व्यस्त रहते हैं। इन अस्पतालों के गेट के बाहर सड़क पर ही गाड़िया खड़ी हो रही है।
शनिवार सुबह 11 बजे अस्पताल चौराहे से दक्षिण दरवाजा की तरफ जाने पर चौराहे से आगे निजी अस्पतालों के सामने सड़क के किनारे तक कतार में चार पहिया वाहन खड़े मिले। इसके चलते जाम की स्थिति बनी रही। आसपास करीब पांच से छह हॉस्पिटल और पैथोलॉजी एवं अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। किसी में पार्किंग की सुविधा नहीं है। भाई को लेकर आए मुंडेरवा के भानुप्रकाश ने कहा कि यदि अस्पताल नहीं आना होता तो इस रूट पर आते ही नहीं। इसी तरह शिक्षक पाटेश्वरी प्रसाद ने कहा कि योजनाबद्ध ढंग से अस्पतालों के लिए मेडिसिटी बनाई जाए। इसमें सभी अस्पतालों को शिफ्ट किया जाए। इससे आमजन को बहुत राहत मिलेगी। अस्पताल संचालकों को भी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। यहां से आगे बढ़ने पर पांडेय गर्ल्स इंटर कॉलेज के आसपास, मालवीय रोड पर रौता से फब्वारा तिराहा, कटरा से बड़ेवन तक भी यहीं हाल देखने को मिला। कहीं गाड़ियां खड़ी रहीं तो अस्पताल के बाहर ठेलों कर जमावड़ा दिखा।
सिविल इंजीनियर संजय मिश्र ने कहा कि नियोजित शहर के लिए अच्छी सड़कें होनी चाहिए। पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य है। सड़कों की आपस में कनेक्टिविटी होनी चाहिए। इसके अलावा अस्पताल एवं शिक्षा के लिए नया हब विकसित किया जाए तो यह और अच्छा होगा।
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बीडीए के प्लान में मेडिसिटी की योजना नहीं
बीडीए के प्लान में मेडिसिटी बसाने की योजना फिलहाल नहीं है। इसके लिएशहर से बाहर किसी तरह का भूखंड चिह्नित नहीं किया गया है। इसीलिए अस्पताल संचालकों की भी रुचि इस ओर नहीं है। एक चिकित्सक ने बताया कि मेडिसिटी के लिए शहर से बाहर बड़ा भू-भाग होना चाहिए। साथ ही, वहां आवागमन, बिजली, पानी सहित हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। तभी अस्पताल संचालकों का रुझान मेडिसिटी की ओर बढ़ेगा।
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इसलिए खोल लिए शहर के मध्य में अस्पताल
पांच साल पहले तक यहां बीडीए नहीं था। शहर के मध्य में ताबड़तोड़ निजी अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेंटर खुलते चले गए। संचालकों की सोच रही मध्य हिस्से में इस तरह के सेंटर होने से मरीजों की आवक बनी रहेगी। उन्हें निजी साधनों से पहुंचने में आसानी होगी और ऑटो, टैक्सी से भी पहुंच सकेंगे। इसलिए पचपेड़िया मार्ग, बस्ती-कांटे मार्ग, कटरा-बांसी मार्ग, महिला अस्पताल के सामने, मालवीय मार्ग, ब्लॉक रोड पर इधर डेढ़ से दो दशक के भीतर नर्सिंग होम, अस्पताल एवं डायग्नोस्टिक सेंटर की भरमार हो गई है। बीडीए प्रभावी हुआ तब भी इस दिशा में कोई योजना तैयार नहीं हो सकी।
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महायोजना 2031 को अभी नहीं मिली मंजूरी
बीडीए का कदम अभी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। महायोजना 2021 के मास्टर प्लान के अनुसार मानचित्र स्वीकृति किए जा रहे हैं। इससे अपग्रेड व्यवस्था की उम्मीद महायोजना 2031 से रही। मगर इसे तैयार करने में पुरा वर्ष 2023 लग गया। चार बार महायोजना 2031 में संशोधन किया गया। अंतिम बार जनवरी 2024 में पत्रावली नियोजन विभाग गोरखपुर एवं शासन में प्रेषित की गई है। मगर अभी इसे स्वीकृति नहीं मिली है।
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जितने भी बड़े हॉस्पिटल हैं, उन्हें शहर के बाहर शिफ्ट होना चाहिए। इससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है। इस पर अफसर और अस्पताल संचालक संवाद करें और रास्ता निकालें। पहले जब भीड़ कम थी तब दिक्कत नहीं होती थी। आज हर घर में गाड़ी है। योजनाबद्ध तरीके से हल निकालने की जरूरत है।
दिलीप सिंह, अधिवक्ता
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प्राधिकरण का आशय ही नियोजित शहर है। ऐसी बसावट हो जिससे शहर की सड़कें अतिक्रमण से खाली दिखें। इससे आने-जाने में आमजन को सुविधा होगी। सड़कों के किनारे सुंदर फुटपाथ होना चाहिए। डिवाइडर पर हरियाली भी दिखनी चाहिए। अभी अपने शहर में इस तरह की व्यवस्था नहीं है।
प्रोफेसर डॉ. रघुवर पांडेय, समाजशास्त्री
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शहर को खाली रखने के लिए पहले प्रशासन और आमजनमानस का सम्मिलित प्रयास होना चाहिए। योजनाबद्ध ढंग से शहर के चारों तरफ खाली जगहों पर स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर और मेडिसिटी के लिए जगह चिह्नित की जाए। वहां हर तरह की सुविधा पहुंचाई जाए। तभी शहर को सुंदर बनाया जा सकता है।
रोशन शुक्ल, पांडेय बाजार
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बड़े उद्योग, अस्पताल, कोचिंग सेंटर शहर के मध्य में नहीं होने चाहिए। इसके लिए योजना बनाई जाए। संचालकों को अपना संस्थान बाहर शिफ्ट करने के लिए हर स्तर की सुविधा प्रदान की जाए। कारोबारियों को भी इसमें सहयोग करना होगा। यह मुहिम तभी सफल होगी जब एक- एक नागरिक पहल करेंगे।
आशुतोष दुबे, व्यवसायी।
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रामायण सिटी बसाने की योजना है। इसके लिए साढ़े बारह एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। शासन से स्वीकृति मिल गई है। बीडीए के पास धन की कमी है। महायोजना 2031 को स्वीकृति मिलने के बाद नए प्लान के अनुसार शहर को विकसित किया जाएगा। फिलहाल मेडिसिटी जैसी योजना नहीं है।
कमलेश चंद्र, सचिव, बीडीए/एडीएम