मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल की ओपीडी में राहत के इंतजाम नाकाफी
हीट वेव व तेज धूप में मरीज व तीमारदार हाे रहे हलकान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में बीमारों का उपचार कराने आए तीमारदार खुद ही हीट वेव की चपेट में आकर बीमार हो रहे हैं। वजह यह कि अस्पतालों में गर्मी से राहत के इंतजाम नहीं हैं। तीमारदारों को धूप और तेज पछुआ हवा से बचने के लिए पेड़ की छांव और भवन की दीवारों का सहारा लेना पड़ रहा है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है।
शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में ओपीडी के बाहर लोगों की भीड़ दिखी। अस्पताल में पर्ची कटवाने, दवा लेने, डॉक्टर को दिखाने और जांच की रिपोर्ट के इंतजार में बैठे मरीजों के परिजन तेज धूप और हीट वेव से बचने के लिए चेहरे को गमछे और दुपट्टे से ढंके नजर आए। गर्मी से त्रस्त लोगों के पास पसीना पोंछने और अपनी बारी के इंतजार के अलावा कोई और चारा नहीं था। इस दौरान मरीज को दिखाने आए कुछ तीमारदारों की तबीयत भी खराब होने लगी। बीमार का इलाज कराने आए तीमारदार खुद ही बीमार होते दिखाई दिए।
ओपेक चिकित्सालय कैली के सीएमएस डॉ. एएन प्रसाद ने कहा कि ओपीडी में कुछ पंखे खराब हैं तो कुछ स्थानों पर पंखा नहीं है। यह समस्या शीघ्र दूर कर ली जाएगी। गर्मी में मरीजों के लिए अलग से कूलर लगवाने की व्यवस्था कॉलेज प्रशासन ने नहीं बनाई है।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. विनोद कुमार सोनकर ने कहा कि ओपीडी में कूलर लगवाया जाएगा। क्योंकि मरीजों व तीमारदारों को दिक्कत हो रही है। वातावरण ठंडा रहे, इसके लिए व्यवस्था बनाई जा रही है।
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केस एक
महादेवा बाजार से साइकिल से इलाज कराने आए अवधेश सिंह ने कहा कि उनकी तबीयत खराब थी। इसलिए साइकिल से अस्पताल पहुंच गए। यहां भीड़ होने की वजह से बैठने की जगह नहीं मिली तो पेड़ की छांव में आ गए हैं। कहा कि अभी डॉक्टर से मिलना है, मगर गर्मी अधिक होने के कारण थोड़ी देर बाद जाएंगे।
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केस नंबर दो
लखनऊरा से पहुंचे वनारसी ने कहा कि अस्पताल में इस गर्मी में बैठने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। यहां कूलर तो दूर पंखा तक नहीं है। कई पंखे हिल भी नहीं रहे हैं। गर्मी से राहत के यहां कोई इंतजाम नहीं हैं।
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धूप में खड़े होकर दवा लेना मजबूरी
जिला अस्पताल में मरीजों को ओपीडी में बैठकर गरम हवा के थपेड़े झेलनी पड़ती है, वहीं दवा के लिए काउंटर पर धूप में खड़ा होना पड़ता है। जबकि पर्ची लेने के लिए तीमारदारों को टिन शेड के नीचे धक्का खाना पड़ता है। यहां लोगों को घंटों लग जाता है।