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Basti News: बिना पंजीकरण और मानक के अस्पताल... मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

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- सीएमओ के निरीक्षण में 50 में से 30 अस्पतालों में मानक नहीं मिले थे पूरे
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- बिना योग्य चिकित्सक के अस्पतालों की भरमार



बस्ती। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब भी जांच के लिए निकलती है, बिना पंजीकरण और मानक विहीन अस्पताल पकड़े जाते हैं और सील होते हैं। इसके बाद भी धंधेबाजों में खौफ नहीं है और गली-मोहल्लों में इनका धंधा जारी है। कहीं घर में क्लीनिक चल रही है तो कहीं दुकान में। बिना योग्य चिकित्सक के ये अस्पताल मरीजों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।

पिछले माह सीएमओ के निरीक्षण में इस तरह के कई मामले सामनेे आए हैं। 50 से अधिक अस्पतालों की जांच करीब 30 अस्पताल जुगाड़ वाले मिले। इनमें एक दर्जन तो ऐसे अस्पताल थे जो बिना पंजीकरण और मानक पूरा किए संचालित किए जा रहे थे। कई अस्पताल ऐसे भी थे जहां पंजीकरण में उल्लेखित डॉक्टर मौजूद ही नहीं थे। इन अस्पतालों के खिलाफ अभी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आ सकी है। विभाग सिर्फ नोटिस जारी करने तक ही सीमित है।
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सूत्रों के मुताबिक कई बड़े अस्पताल भी ऐसे हैं जहां सर्जरी होती है लेकिन बेहोशी के डॉक्टर की स्थायी व्यवस्था नहीं है। अधिकतर छोटे-बड़े अस्पतालों में सर्जरी और बेहोशी के चिकित्सकों को प्रति केस रेट तय करके बुलाया जाता है। ऐसी सेवा देने वाले कुछ सरकारी चिकित्सक भी हैं। सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के बाद शाम चार से पांच बजे के बाद ये निजी अस्पतालों में सेवाएं देते हैं। ये चिकित्सक चार से पांच केस इकट्ठा होने पर पहुंचते हैं। जानकारों के मुताबिक प्रति केस बेहोशी के चिकित्सक को ढाई से तीन हजार और सर्जन को 10 से 15 हजार रुपये तत्काल मिलता है।


बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जांच
कारोबार बढ़ने के साथ छद्म किस्म के अस्पतालों में जांच की भी व्यवस्था बनाई जा रही है। ऐसे अस्पतालों में बिना विशेषज्ञ के अल्ट्रासाउंट और एक्स-रे जैसी तमाम महत्वपूर्ण जांचें भी हो रही हैं। जनवरी में तत्कालीन एसडीएम ने जिला महिला अस्पताल के सामने सात अल्ट्रासाउंड सेंटर सील कराए थे। वजह यह थी कि इन जांच केंद्रों में बिना विशेषज्ञ के जांच की जा रही थी। ओपेके चिकित्सालय कैली के सामने भी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड मिलाकर चार सेंटरों पर प्रशासन ने ताला जड़ा था। इसी तरह जुलाई में सीएमओ की जांच में तीन नर्सिंग होम में बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के अल्ट्रासाउंड जांच होती मिली।




पंजीकरण में डिग्री बीएमएस की, कर रहे सर्जरी
जिले के अधिकांश निजी अस्पतालों में छोटे-बड़े ऑपरेशन तक की व्यवस्था है। बीएएमएस की डिग्री पर पंजीकरण वाले इन अस्पतालों में प्रसव के अलावा पथरी, हड्डी, गाल ब्लेडर, हाइड्रोसील, हार्निया आदि की सर्जरी कराई जा रही है। इन अस्पतालों के पंजीकरण में सर्जन का उल्लेख नहीं रहता है। अस्पताल संचालक ऐसे मरीजों को भर्ती करने के बाद सर्जरी के लिए चिकित्सक बाहर से बुला लेते हैं। इसी आधार पर छोटे स्तर के निजी अस्पतालों में भी मरीजोें का ऑपरेशन कराया जा रहा है।
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निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच लगातार कराई जा रही है। जहां चिकित्सक और पंजीकरण नहीं मिल रहा है उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ
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