कोतवाली में केस दर्ज कराने वाली छत्तीसगढ़ की पीड़िता का पूरा हुआ बयान
सच्चिदानंद व उसके सहयोगियों पर कोतवाली में दर्ज केस का चल रहा है ट्रायल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। आश्रम में साध्वियों का यौन शोषण करने के केस में मंगलवार को पीड़िता की गवाही हुई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम विजय कुमार कटियार की अदालत में पीड़िता 2009 से लेकर 2017 के बीच के घटनाक्रम को बताते हुए अदालत में रोने लगी। उसने बताया कि बाबा की करीबी साध्वियां उसे परमेश्वर का अवतार बताती थीं। कहती थीं कि बाबा प्रसन्न हो गए तो तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी और जीवन मरण से मुक्ति मिल जाएगी। उसकी बातों में आकर वह जैसा बताती थी, वैसा करती गई। अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की गई है।
पीड़िता ने बयान देने के बाद बताया कि केस में महिला सहअभियुक्त सच्चिदानंद उर्फ दयानंद की खास सेविका थी, जो पीड़िता के घर आती-जाती थी। दोनों ने उसे समझाया कि सच्चिदानंद उर्फ दयानंद बाबा परमेश्वर के अवतार हैं। श्रद्धा के नाम पर दोनों बरगला कर 2009 में बाबा के अमरोहा जिले के बृजघाट आश्रम में ले गईं। जहां पीले वस्त्र देकर दीक्षा लेने के लिए तैयार किया। उस समय उम्र करीब 15 साल थी। फिर खाने में कुछ नशीला पदार्थ खिला दिया। इसके बाद बाबा के पास ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया। जहां बाबा ने उसके साथ गलत काम किया और वीडियो भी बना यया। बाबा ने धमकी दी थी कि किसी से बताओगी तो मारकर यहीं दफन कर देंगे। इसके बाद बिहार, दिल्ली, बस्ती, मुंबई, छत्तीसगढ़ के आश्रम में बाबा अपने साथ उसे लेकर गया। जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
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इस तरह बिगड़ी बात
सच्चिदानंद ने बस्ती जिले में बेलवाडाड़ी मोहल्ले और मूड़घाट में आश्रम बना रखा था। पीड़िता ने बताया कि 17 दिसंबर 2017 को मूड़घाट आश्रम में शाम को प्रमिला बाई समझाने लगी कि बाबा सच्चिदानंद से संबंध बनाना तो ठीक है, मगर अन्य लोगों से भी संबंध बनाओगी तो तुम्हारी प्रोग्रेस जल्द होगी और समाज में मान प्रतिष्ठा मिलेगी। मना करने पर उसने मुझे एक गिलास पानी दिया और कहा कि चलो गुरु महाराज के पास सेवा करने। अंदर गई तो कमरे में चार लोग थे। जिन चार लोगों में बाबा सचिदानंद, परमचेतनानंद, ज्ञानवैराग्या नंद व विश्वासानंद थे। गवाह ने खुद कहा कि चारों लोग उस कमरे में बिना कपड़े के थे और वे सभी लोग चिलम टाइप का कुछ पी रहे थे, जिससे धुआं निकल रहा था। सभी ने बारी-बारी दुष्कर्म किया। बाद में किसी से न बताने की धमकी देकर डंडे से मारा, डंडा टूट गया था। इसके बाद भागकर सेल्हरा आश्रम गई। जहां से अगले दिन पुलिस अधीक्षक के पास जाकर शिकायत की।
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यह है मामला
दिसम्बर 2017 में यौन शोषण का मामला तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से कुछ युवतियों को धक्के मारकर निकाल देने का आरोप लगाया। तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर सच्चिदानंद के अलावा उसके तीन शिष्यों परमचेतानंद, विश्वासानंद, ज्ञान वैराग्यानंद तथा दो मुख्य सेविकाओं पर 2009 से लगातार यौन शोषण व सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया। बाद में झारखंड की ही एक अन्य पीड़िता ने इन्हीं आरोपों में एक और केस कराया। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम पर बुलाया जाता था। उनमें से पसंद की लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता था। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा देते थे। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा व चेलों के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रवचन-सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता था।