जनपद न्यायाधीश ने 14 दिसंबर तय की अगली सुनवाई की तारीख
महिला अधिकारी प्रकरण में जेल मेंं बंद हैं निलंबित नायब तहसीलदार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महिला अधिकारी के आवास में घुसकर दुष्कर्म की कोशिश, हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में जेल भेजे गए निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम की जमानत याचिका पर मंगलवार को भी सुनवाई नहीं हो पाई। वरिष्ठ अधिवक्ता के निधन की वजह ने न्यायालय में कंडोलेंस घोषित कर दिया गया। इस वजह से न्यायिक कार्य से अधिवक्ताओं ने खुद को अलग रखा। सोमवार को भी सुनवाई थी, लेकिन विशाखा कमेटी की रिपोर्ट तलब करने की मांग के बाद सुनवाई मंगलवार को तय की गई थी। अगली सुनवाई के लिए 14 दिसंबर को तारीख तय की गई है।
तहसील में तैनात एक महिला राजस्व अधिकारी ने 16 नवंबर को पुलिस को तहरीर देकर तत्कालीन नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ल पर 11-12 नवंबर की रात सरकारी आवास में जबरदस्ती घुसकर दुष्कर्म की कोशिश, गला दबाकर हत्या का प्रयास, मारपीट, अपशब्द कहने का आरोप लगाया था। उसी दिन डीएम स्तर से विशाखा कमेटी की सिफारिशों के क्रम में तीन महिला अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की गई थी। 17 नवंबर को पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के हिसाब से केस दर्ज किया। 21 नवंबर को राजस्व परिषद ने आरोपी घनश्याम शुक्ल को निलंबित कर कानपुर कमिश्नर कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। साथ ही लखनऊ की कमिश्नर को जांच सौंप दिया। इधर, विवेचक के प्रार्थनापत्र पर न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी हुआ। साथ ही गिरफ्तारी के लिए छह टीमों का गठन किया गया। एक दिन बाद ही एसपी की तरफ से उसकी गिरफ्तारी करने वाले को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा कर दी। 27 नवंबर को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।
सोमवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी घनश्याम शुक्ला के अधिवक्ताओं की तरफ से कहा गया कि घटना के संबंध में गठित विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट को न्यायालय में तलब किया जाए। जबकि शासकीय अधिवक्ता परिपूर्णानंद पांडेय व सहायक शासकीय अधिवक्ता कमलेश चौधरी ने कोतवाली में दर्ज केस की विवेचना और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जमानत अर्जी खारिज करने का आग्रह किया। ऐसे में जिला सत्र एवं जनपद न्यायाधीश कुलदीप सक्सेना ने जांच रिपोर्ट मंगलवार को न्यायालय के समक्ष पेश करने का आदेश दिया।
इससे पहले 28 नवंबर को सीजेएम न्यायालय में जमानत की अर्जी दी गई थी, जिसे न्यायालय ने उसी दिन खारिज कर दिया था। इस पर पांच दिसंबर को जिला एवं सत्र न्यायालय में अर्जी दी गई। जिला शासकीय अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि आरोपी घनश्याम पर गंभीर अपराध करने का आरोप हैं। उसकी केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट आदि समस्त प्रपत्र तलब किया जाए। ताकि विवेचक की तफ्तीश और केस से जुड़े अन्य पहलुओं को गौर करते हुए जमानत पर निर्णय लिया जाए। इसमें सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की गई थी।