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Basti News: दिवाली में न हो जाए सेहत का दिवाला

Thu, 24 Oct 2024 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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गांधीनगर में ज्वेलरी की दुकान पर सोने-चांदी का भाव पूछ रही ग्राहक
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बस्ती। त्योहार के जोश में होश खोने की जरूरत नहीं है। खाने-पीने की चीजों पर विशेष ध्यान दीजिए। जरा सी चूक हुई तो दीपावली में सेहत का दिवाला निकल सकता है। यकीन मानिए, खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट का धंधा जोरों पर है।
खास व्यंजनों में शुमार होने वाला खोआ-पनीर भी शुद्ध नहीं मिल रहा है। दूध से तैयार होनेे वाले यह उत्पाद पैदावार से ज्यादा मात्रा में उपलब्ध हो रहे हैं। असली-नकली की पहचान भी नहीं हो पा रही है। त्योहार के सीजन में धंधेबाज बड़े पैमाने पर मिलावटी खोआ-पनीर खपाना शुरू कर दिए हैं।
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सामान्य दिनों की अपेक्षा आजकल पनीर और खोआ की डिमांड बढ़ गई है। जिले भर में प्रतिदिन 10 से 15 क्विंटल पनीर की खपत हो रही है। जबकि खोआ भी पांच से सात क्विंटल बेचा जा रहा है। दोनों सामग्रियों की आपूर्ति गैर जनपदों से की जा रही है। ज्यादातर पनीर अयोध्या और बाराबंकी से पहुंचाई जा रही है। इस पनीर का कोई ब्रांड नहीं होता है। अलबत्ता तीन से पांच किलो का चॉक सूती कपड़े में बांधकर थोक में मंगाया जा रहा है।
होलसेल में पनीर 250 रुपये किलोग्राम तक फुटकर दुकानदारों को पहुंचाया जा रहा है। आम ग्राहकों को यही पनीर 280 से 300 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है।
विश्वास में लेने के लिए फुटकर दुकानदार इस पनीर पानी की बड़ी-बड़ी बाल्टी में रखकर बेच रहे हैं, ताकि दिखने में ताजा लगे। इस चक्कर में ग्राहक इसे खूब पसंद कर रहे हैं। शहर के सभी नुक्कड़ों पर छोटे-छोटे काउंटर लगाकर पनीर की बिक्री की जा रही है।
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जानकार बताते हैं कि जितनी मात्रा में पनीर की खपत हो रही है, उतनी मात्रा में दूध का उत्पादन ही नहीं है। ऐसे में डिमांड पूरी करने के लिए सिंथेटिक दूध, सोयाबीन एवं विशेष किस्म के केमिकल मिलाकर पनीर तैयार किया जा रहा है।
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