- मंडलायुक्त की सख्ती पर 27 दिसंबर से शुरु हुई थी मरीजों की देखभाल
संवाद न्यूज एजेंसी
हर्रैया। मंडलायुक्त योगेश्वर राम मिश्रा की सख्ती के बाद 27 दिसंबर से महिला चिकित्सालय की ओपीडी शुरू हुई, लेकिन यह अधिक दिन तक नहीं चल सकी। अस्पताल कर्मी बताते हैं कि 15 जनवरी के बाद से ओपीडी बंद पड़ी है। इलाज के लिए पहुंच रहीं महिलाओं को फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स द्वारा जरूरत की कुछ दवाएं देकर उन्हें चलता कर दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि 2016 में करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से 100 बेड के महिला अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ। इसे दो वर्षों में बनकर तैयार होना था, लेकिन धन की कमी, कार्यदायी संस्था व ठेकेदारों की लापरवाही से निर्माण कार्य नवंबर 2022 में पूरा हुआ। अस्पताल में 18 चिकित्सकों, 53 पैरामेडिकल और 42 आउट सोर्सिंग कर्मी सहित 118 पद स्वीकृत हैं, जिनकी शासन से अभी तक तैनाती नहीं की गई है। मंडलायुक्त की सख्ती के बाद स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्पताल की ओपीडी का संचालन शुरू कराया गया। इसमें दो महिला चिकित्सक डॉ. अनामिका श्रीवास्तव और डॉ. सीमा शर्मा के अलावा फार्मासिस्ट ध्रुव कुमार, दीपक श्रीवास्तव, नरेंद्र चौधरी, हरीश मिश्रा, लैब टेक्नीशियन अजय श्रीवास्तव, राममणि और एक्सरे टेक्नीशियन सूर्य प्रकाश को नियुक्त कर ओपीडी शुरु कराई गई।
शुक्रवार को अस्पताल में सीएचसी की संबद्ध स्टाफ नर्स निर्मला के साथ संस्थागत प्रसव केंद्र की दो एएनएम गर्भवतियों को परामर्श देतीं दिखाई दीं। कर्मियों ने बताया कि चिकित्सक न होने के कारण हमारे पास कोई काम नहीं है। गर्भवतियों और प्रसूताओं के लिए आयरन, कैल्शियम, पैरासिटामोल सीएचसी से मंगाकर उपलब्ध कराया जा रहा है।
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बिना सूचना अनुपस्थित चल रहीं डॉ. अनामिका
- सीएचसी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृजेश शुक्ला ने बताया कि डॉ. अनामिका श्रीवास्तव बिना सूचना के ही अनुपस्थित चल रही हैं, जबकि डॉ. सीमा शर्मा प्रशिक्षण पर हैं। उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया गया है।