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Basti News: एमटीपी पंजीकरण के बगैर अवैध अस्पताल करा रहे गर्भपात

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बस्ती। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के नियमों को दरकिनार कर अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों में भ्रूण के लिंग परीक्षण और गर्भपात का खेल हो रहा है। अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इसमें भी आशा व स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों के अलावा झोलाछाप डॉक्टरों का सहयोग लिया जाता है। मगर स्वास्थ्य विभाग उनके रसूख के आगे बेबस है, जबकि इस खेल में 70 से अधिक अस्पताल शामिल हैं, जो मोटी रकम लेकर गर्भपात करा रहे हैं।
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ऐसे अस्पतालों के पास केवल उनके बोर्ड व बैनर पर ही प्रशिक्षित डॉक्टर हैं। इतना ही नहीं, इनमें से कई अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है। जिले में स्त्री रोग विशेषज्ञ वाले करीब 22 अस्पताल हैं। यह गर्भपात कराने के लिए अर्ह हैं, मगर उसके पीछे वाजिब कारण देना होगा।



यह है नियम
नियम के तहत 12 सप्ताह से पहले गर्भवती स्वेच्छा से गर्भपात करा सकती है। लेकिन, 12 से 24 सप्ताह तक की गर्भवती को गर्भपात के लिए कारण सीएमओ और उनके निर्देशन में गठित कमेटी को बताना होगा। इसके बाद ही महिला को गर्भपात का अधिकार मिलेगा, वह भी शहर के 22 चुनिंदा अस्पतालों में, जो एमटीपी के तहत स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड हैं।
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शर्तों के साथ करा सकती हैं गर्भपात
पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) के नोडल अधिकारी डॉ. एके मिश्र ने बताया कि एमटीपी एक्ट के तहत 12 सप्ताह की गर्भवती खुद गर्भपात करा सकती है।इसके अलावा 12 से लेकर 24 सप्ताह के बीच वाली गर्भवती को शर्तों के साथ गर्भपात का अधिकार है। इसके लिए वजह सीएमओ और उनकी कमेटी को बतानी होगी। डॉ. एके मिश्र ने बताया कि एमटीपी एक्ट के तहत विवाहित महिलाओं की विशेष श्रेणी, जिसमें दुष्कर्म पीड़िता व दिव्यांग और नाबालिग जैसी अन्य संवेदनशील महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी समय सीमा 24 सप्ताह है, जबकि अविवाहित महिलाओं के लिए यही समय सीमा 20 सप्ताह है। लेकिन, अब इसे बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दिया गया है।
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भ्रूण जांच का कोई मामला जिले में अब तक संज्ञान में नहीं आया है। न तो ऐसा कोई मामला ही कहीं दर्ज हुआ है। हर महीने अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच कराई जाती है। सभी का अभिलेख व मशीन जांची जाती है। रही अवैध नर्सिंग होमों की बात, तो जांच पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ है कि करीब 140 नर्सिंग होम बिना डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए पंजीकरण नहीं किया गया है। अब इनके लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है।
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-डॉ. आरके मिश्र, सीएमओ
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