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Basti News: नहीं टूट रही स्वास्थ्य विभाग की नींद... बिना डॉक्टर के चल रहे अस्पताल

Thu, 11 Apr 2024 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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जिनके नाम पंजीयन उन चिकित्सकों की तैनाती अन्यत्र, विभाग नहीं कर पा रहा धरपकड़
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सरकारी चिकित्सक भी चला रहे निजी नर्सिंग होम, सरकारी आवास पर भी चल रही प्रैक्टिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट नहीं रही है। मुख्यालय सहित जिले के प्रमुख कस्बाें और बाजार में अस्पतालों की बहार है। पंजीयन की आड़ में बिना डॉक्टर वाले अस्पताल खुलेआम संचालित हो रहे हैं। विभाग इनके बुलंद हौसलों के आगे बौना साबित हो रहा है। शासन के निर्देश के बावजूद इसकी जांच नहीं हो पा रही है कि जिस चिकित्सक के नाम पंजीकरण है वह वास्तव में संबंधित अस्पताल में नियमित रूप से बैठ रहे हैं या नहीं। बहरहाल बगैर मौजूद रहने वाले चिकित्सकों की डिग्री पर अस्पताल संचालित होने की फेहरिस्त लंबी है। मगर विभाग कार्रवाई करने से परहेज कर रहा है।
शासन का स्पष्ट निर्देश है कि एक चिकित्सक एक ही जगह प्रैक्टिस कर सकता है। सख्ती से इस आदेश का पालन कराने के फरमान जारी हुआ है। मगर, यहां इस तरह की कोई सुगबुगाहट नहीं है। मुख्यालय पर ही दो दर्जन से अधिक निजी अस्पताल ऐसे हैं जिनके पंजीयन में दर्ज चिकित्सक मौजूद नहीं मिलते हैं। उनकी तैनाती अन्यत्र है। छह माह पहले कुछ दिनों के लिए चेकिंग अभियान चलाया गया तो कई जगहों पर यह कलई खुलकर सामने आई।
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लगभग 10 प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने स्वयं पहल कर विभाग को अवगत कराया कि उनकी डिग्री पर एक नहीं बल्कि कई-कई निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इस पर कार्रवाई करने के बजाय मामला दुरुस्त करने में अमला जुटा रहा। अब निजी अस्पताल के संचालकों ने पैतरा बदल दिया है। पंजीयन में सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक या प्राइवेट अस्पताल चलाने वाले नामी चिकित्सकों की डिग्री नहीं लगाई जा रही है। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सक तथा अन्य डिग्री धारक चिकित्सकों के प्रपत्रों पर पंजीयन कराकर बेधड़क अस्पताल चलाए जा रहे हैं। यहां मरीजों के ऑपरेशन एवं इलाज के लिए दूसरे चिकित्सकों को शुल्क पर बुलाया जा रहा है।
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प्रसूताओं को भर्ती करने की होड़
छद्दम किस्म के निजी अस्पतालों में प्रसूताओं को भर्ती करने की होड़ मची रहती है। चिकित्सक मौजूद नहीं रहते हैं। फिर भी प्रसूता को तत्काल भर्ती कर लिया जा रहा है। बाद में सेटिंग के डॉक्टर पहुंचते हैं और महंगे दर पर इलाज शुरू करते हैं। जिले में यह खेल लंबे समय से चल रहा है। शहर एवं आसपास के क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक ऐसे अस्पताल हैं जहां आयुर्वेदिक एवं यूनानी तथा अन्य विषयों के चिकित्सकों की डिग्री पर पंजीयन हुआ है और गायनी से संबंधित मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
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सरकारी चिकित्सक भी चला रहे निजी नर्सिंग होम
जिला व अस्पताल में तैनात कुछ सरकारी चिकित्सक भी प्राइवेट प्रैक्टिस एवं निजी नर्सिंग होम संचालित करने का आरोप है। इनके पीछे मरीज माफिया भी दौड़भाग करते है। कुछ चिकित्सक तो मरीज माफिया के भरोसे अस्पताल परिसर में अपने आवास पर ही प्रैक्टिस कर रहे हैं। वहीं कुछ ने बकायदा अपने करीबियों के नाम निजी बिल्डिंग तैयार कर नर्सिंग होम संचालित कर रहे हैं। मरीज माफिया इन अस्पतालों में अच्छी खासी तादाद में मरीज पहुंचा रहे हैं। जिला व महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को गुमराह कर चिकित्सक के निजी नर्सिंग होम में पहुंचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बदले मरीज माफिया की अच्छी खासी कमाई हो रही है।
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केस- एक
पिछले दिनों डॉ. पीपी मिश्र ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया कि उनकी डिग्री पर रुधौली समेत दो जगहों पर पंजीयन कराकर अस्पताल चलाए जा रहे हैं। विभाग ने संबंधित अस्पतालों की जांच करके कार्रवाई नहीं की। अलबत्ता मामला कुछ दिनों के बाद शांत हो गया।
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केस- दो
भानपुर में प्रैक्टिस करने वाली एक महिला चिकित्सक ने विभाग को शिकायती पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि वह केवल भानपुर में प्रैक्टिस करती हैं। मगर, उनके नाम से हर्रैया में भी अस्पताल संचालित किया जा रहा है। इस मामले में विभाग फौरी तौर कार्रवाई करने के बजाय लिखा पढ़ी में ही उलझ कर रह गया।
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सरकार की नीति से आईएमए सहमत
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि एक चिकित्सक एक ही अस्पताल में रहेगा यह सरकार की नीति है। इसका समर्थन आईएमए भी करता है। अब पंजीयन का नियम बदल गया है। एक चिकित्सक एक ही पंजीकरण करा सकता है। यदि किसी चिकित्सक की दो जगह डिग्री पाई जाएगी तो उसका पंजीकरण निरस्त हो जाएगा। ऐसा होना भी चाहिए।
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कोट

निजी अस्पतालों के पंजीकरण की जांच कराई जा रही है। एक ही चिकित्सक की डिग्री पर एक से अधिक अस्पताल का पंजीयन पाए जाने पर उसे निरस्त कर दिया जा रहा है। इस तरह के दो मामले पकड़ में आए हैं। इसके अलावा निजी अस्पतालों का निरीक्षण कराकर सत्यता जांची जाएगी।
-डॉ. रमा शंकर दुबे, सीएमओ
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