बस्ती। 110 पंजीकृत निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग की सूची से गायब हो गए हैं। यह वह अस्पताल हैं, जो मानक के विपरीत संचालित हो रहे थे। अधिकारियों ने जांच शुरू की तो इन अस्पतालों का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। कमी पाए जाने के बाद इनके नाम के लाइसेंस के निरस्तीकरण की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग ने शुरू करा दी है।
एसीएमओ/नोडल ऑफिसर डॉ. एके मिश्र का कहना है कि गलत व फर्जी दस्तावेज के आधार पर पंजीकरण कराने वाले निजी अस्पताल जांच में पकड़ में आ रहे हैं, इनका पंजीकरण निरस्त किया जा रहा है, इसीलिए लगातार निजी अस्पतालों की संख्या कम होती जा रही है। अब नियम से काम करने वाले अस्पताल ही संचालित हो सकेंगे। जानकारों का कहना है कि निजी अस्पतालों को इलाज का प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग में खूब बांटा जाता रहा है। इसका नतीजा यह रहा कि बीयूएमएस, बीएएमएस, नर्सिंग सर्टिफिकेट पर अस्पताल चलाने का प्रमाणपत्र जारी कर दिया जा रहा था। एक साल पहले तक पोर्टल पर यह संख्या बढ़कर 310 तक पहुंच गई थी। जब से नवीनीकरण में सख्ती हुई तो लगातार निजी अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त होता चला जा रहा है। यह संख्या घटकर 110 तक सिमट कर रह गई है। पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी चल रहे अस्पताल जिले में 110 अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त होने के बाद संचालन पर रोक लगा दी गई है। अपंजीकृत हो चुके इन अस्पतालों को झोलाछाप की श्रेणी में गिना जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने अब ऐसे अस्पतालों को बंद कराने में जुटा है।
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जिन अस्पतालों ने आन लाइन अपना रिन्यूवल आवेदन नहीं किया है, अब उनके लाइसेंस निरस्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी को अब तक मौका दिया गया, मगर जब बार-बार सूचना के बाद यह लोग अपने प्रपत्रों को आन लाइन नहीं किए तो अब उनको मौका न देते हुए लाइसेस निरस्त किया जाएगा।
-डॉ. आरपी मिश्र, सीएमओ