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Basti News: कुआनो के तट से उठ रहा कचरे का धुआंं... खराब हो रही शहर की आबोहवा

Fri, 02 Feb 2024 02:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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कुआनो नदी के तट पर कूड़े के ढेर में लगी आग, कई दिन से धुआं ही धुआं
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सुबह टहलना हुआ मुश्किल, गले तक जा रहा धुआं, सांस लेने में दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जल, जंगल, जमीन तीनों का मनोरम दृश्य संजोने वाली कुआनो नदी के तट के पास कचरे का धुआं उठ रहा है। यह वातावरण में घुलकर शहर की आबोहवा खराब कर रसी है। प्रकृति की छटा यहां रोज काली हो रही है।
लोगों का कहना है कि अमहट घाट के आसपास पहुंचने पर धुएं से गला चोक कर जा रहा है। खांसी आने लगती है। वहीं कुछ लोग मुंह पर रुमाल रखकर चल रहे हैं। इस धुएं का धुंध आला अधिकारियों के आवास तक छाया हुआ है। मगर, न इन अफसरों को इसकी चिंता है और न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस पर रोक लगा पा रहा है। अमहट पुल पार करने के बाद हाईवे के नीचे सर्विस रोड के दोनों किनारों पर कूड़ों का ढेर लगा हुआ है। शहर का कचरा यहीं लाकर गिरा दिया जा रहा है। कचरे का जब ऊंचा टीला तैयार हो रहा है तो इसमें आग लगा दी जाती है।
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ठंड के मौसम में अक्सर यहां एकत्र कचरे आग के हवाले कर दिए जाते हैं। फिर कई-कई दिन तक इस कचरे के टीले से धुएं उठते हैं। धूप खिलने पर धुएं के साथ लौ भी निकल रही है। यह धुआं इतना जहरीला है कि आसपास खुली सांस लेने पर गला पकड़ ले रहा है। जीव-जंतुओं के लिए यह खतरा बना हुआ है। सड़े-गले पदार्थ, अस्पतालों से निकलने वाली सुई, काटन, प्लास्टर, दवा, रसायन के अपशिष्ट समेत न जाने क्या-क्या यहां एक साथ जल रहे हैं।
नगर पालिका परिषद की ओर से कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं बन पाई है। शहर से निकलने वाला प्रतिदिन औसतन 40 टन कचरा इधर-उधर फेंका जा रहा है। अधिकतर कचरा अमहट के पास कुआनो नदी और बगल में स्थित सड़क के किनारे गिराया जा रहा है।
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सुबह अमहट पुल नहीं पार कर रहे लोग
शहर की आबादी का निकास अमहट की ओर है। अधिकारियों, कर्मचारियों का आवास भी अधिकतर इसी क्षेत्र में है। सुबह पांच बजे से ही यहां सेहत पसंद लोगों की चहलकदमी शुरू हो जाती है। शांत वातावरण में लोग यहां टहलने पहुंचते है। आजकल टहलने वाले लोग अमहट पुल पार करने से कतरा रहे हैं। क्योंकि इससे आगे बढ़ने पर कचरे का धुआं सांस के जरिए अंदर पहुंच रहा है। कुछ देर सांस लेने पर गले में खराश आ रही है। यहां प्रतिदिन सुबह टहलने वालों में मोनू ने बताया कि एक पखवाड़े से धुएं की समस्या बढ़ गई है। कूड़े के ढेर से उतनी दिक्कत नहीं होती है जितना इसे जलाने पर महसूस की जा रही है। अनंत कुमार ने बताया कि सिविल लाइंस क्षेत्र होने के नाते यहां अधिकारियों का आवास भी है। इसलिए इस क्षेत्र को हर दृष्टिकोण से सुरक्षित माना जाता है। बावजूद इसके यहां खुलेआम प्रदूषण फैलाया जा रहा है।
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नदी भी हो रही प्रदूषित
नदी के किनारे कूड़े-कचरे का ढेर होने से वह भी प्रदूषित हो रही है। बारिश के दौरान ऊंचाई से कचरा बहकर नदी में गिर जाता है। तेज हवा चलने पर भी कूड़ा- करकट उड़कर नदी में ही गिरता है। जिससे नदी का पानी दूषित हो रहा है। जलीय जीव- जंतुओं पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी नहीं कर रहा आपत्ति
कुआनो के तट पर गंदगी एकत्र करने एवं आग लगाकर आबोहवा को खराब करने की रोकथाम प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी नहीं कर पा रहा है। समय- समय पर कुआनो एवं पर्यावरण के संरक्षण की चर्चा कर विभाग किनारा कस लेता है। नदियों और उसके आसपास के क्षेत्रों का रखरखाव तक नहीं किया जाता है। कूड़े के ढेर से कुछ ही दूरी पर एक निजी विद्यालय भी है। यहां बच्चों की सेहत पर कचरे के धुएं का कुप्रभाव न पड़े इसलिए खिड़कियां बद रखी जाती हैं। बच्चे खराब वातावरण के चलते खुले मैदान में खेलने से कतराते हैं।
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कोट
कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए। इसे खुले में जलाया नहीं जाना चाहिए। कचरा जलाने से मीथने, कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी नुकसानदायक गैस निकलती है। इससे समूचे प्राणियों पर खतरा होता है। यह गैस मनुष्य के प्रजनन व प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है। कैंसर, दमा, खांसी, सांस फूलने जैसी बीमारी बढ़ती है।
-डॉ. शिवेंद्र पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान
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कुआनो नदी के किनारे कचरा जलाने की जानकारी हमें नहीं है। इस तरह की कोई शिकायत भी नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-टीएन सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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