बस्ती। पीडब्ल्यूडी में फिर बड़ा खेल हुआ है। पूर्व में बनी तीन सड़कों पर बिना कार्य कराए ही 50 लाख रुपये के फर्जी भुगतान का मामला प्रकाश में आया है। इसकी शिकायत शासन से लेकर मुख्यमंत्री तक गई है। इसके बाद से विभाग में हड़कंप मच गया है। जिम्मेदार अफसर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। सवालों से घिरे अधिकारी सफाई में बस इतना बोल रहे हैं कि कार्य कराने के बाद ही भुगतान किया गया है।
इस बार मामला पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-एक का है। भानपुर क्षेत्र की तीन सड़कों पर हुए 50 लाख रुपये के भुगतान को फर्जी बताया जा रहा है। आरोप है कि विभाग पूर्व में बनी सड़कों का नाम बदलकर भुगतान कर दिया है। यह भुगतान छह महीने के भीतर हुआ है। विभागीय अधिकारियों ने इन सड़कों का भौतिक सत्यापन तक नहीं कराया। गोपनीय ढंग से भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई और चेक निर्गत कर दिए गए। इस आशय की शिकायत के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शिकायत के बाद से ही विभागीय अमला अलर्ट हो गया है। भुगतान से संबंधित फाइलों को लेखाकार से लेकर प्रशासनिक कार्यालय तक अधिकारी, कर्मचारी अवलोकन करने में जुटे हैं। ताकि यदि लिखा-पढ़ी में कहीं कोई त्रुटि हो तो उसे समय रहते दूर कर लिया जाए।
इन सड़कों की हुई है शिकायत
पूर्व विधायक के प्रतिनिधि रहे भाजपा नेता मनोज सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के मंत्री, मुख्यमंत्री और शासन के उच्च पदस्थ अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में तीन सड़कों का फर्जी भुगतान करने का उल्लेख किया है। शिकायती पत्र के अनुसार भानपुर क्षेत्र के उकड़ा से कडजहना और पिरैला से जोगिया तक 1400 मीटर लंबी सड़क पर छह माह पहले तीन बार भुगतान किया गया है। इसके अलावा पिरैला-बहराइच मार्ग शंकरपुर से उकड़ा तक मानक के विपरीत कार्य कराकर भुगतान किया गया है। इस सड़क की दशा बनने के बाद ही दयनीय हो गई। तीसरी सड़क पीबीबी से भानपुर मजरा तक इंटरलॉकिंग कार्य के लिए भुगतान किया गया है। जबकि इस सड़क का इंटरलॉकिंग निर्माण नगर पंचायत भानपुर ने हाल में ही करवाया है। एक महीने पहले पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-एक ने बिना सत्यापन कराए एक चहेते फर्म के नाम भुगतान कर दिया। तीनों सड़कों पर 50 लाख का भुगतान होना बताया जा रहा है।
42 करोड़ रुपये का पहले भी हो चुका है गोलमाल
आठ साल पहले पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में 200 सड़कों के निर्माण के नाम पर 42 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान का भांडा पहले ही फूट चुका है। वर्ष 2017 में यह मामला पकड़ में आया था। शासन स्तर से प्रकरण की जांच कराई गई। पता चला कि विभिन्न मदों का पैसा नियम विरुद्ध ढंग से सड़कों के निर्माण के नाम पर खर्च कर दिया गया। दोष सिद्ध होने पर शासन ने इस मामले में तत्कालीन एक एक्सईएन और दो एई को बर्खास्त भी कर दिया। जबकि दो अवर अभियंताओं का वेतन वृद्धि अग्रिम सेवाकाल तक रोक दी गई है। उनसे रिकवरी का आदेश हुआ है। यह मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है। अधिकारियों के बाद ठेकेदारों पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।